यह ख़बर 25 मार्च, 2011 को प्रकाशित हुई थी

तस्करी की सिगरेटों से पटा है भारतीय बाजार

खास बातें

  • तस्करी वाली सिगरेटों की सर्वाधिक खपत के लिहाज से भारत अब दुनिया में छठे तथा एशिया में चौथे स्थान पर है।
New Delhi:

भारत में पड़ोसी देशों से तस्करी होकर आने वाली सिगरेटों का आंकड़ा लगातार बढ़ रही है। यहां तस्करी वाली सिगरेटों का बाजार बढ़कर 17 अरब सिगरेट का हो गया है। एसोचैम के एक अध्ययन में यह निष्कर्ष निकाला गया है। इसके अनुसार विश्व स्तर पर सिगरेट तस्करी बाजार 520 अरब सिगरेट का है। इसमें आने वाले वर्षों में और तेजी से वृद्धि का अनुमान है। चैंबर के अनुसार यूरोमानिटर की रपट में अनुमान लगाया गया है कि 2014 तक दुनिया में अवैध सिगरेट खपत 14.2 प्रतिशत बढ़ेगी। इसमें कहा गया है कि भारत में चीन, म्यामां तथा नेपाल से सस्ते सिगरेट ब्रांडों की मात्रा बढ़ रही है। तस्करी वाली सिगरेटों की सर्वाधिक खपत के लिहाज से भारत अब दुनिया में छठे तथा एशिया में चौथे स्थान पर है। चैंबर ने 'ब्रांड सुरक्षा' पर अध्ययन में कहा है कि भारत में वर्जित सिगरेट बाजार अनुमानित: 42.5 करोड़ अमेरिकी डालर :1,700 करोड़ रुपये: का है। भारत में 2004-2009 के दौरान अवैध सिगरेट खपत में 57.7 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखने में आई। इसके अनुसार म्यामां तथा नेपाल जैसे पड़ोसी देशों से सस्ती सिगरेटों की अवैध आवक लगातार बढ़ती जा रही है। चैंबर ने इसे किसानों तथा सरकारी खजाने के लिए बड़ा नुकसान बताया है।


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