नई दिल्ली: विशेषज्ञों ने आयकर कानून में प्रस्तावित संशोधन को सभी पक्षों के लिए फायदेमंद बताया है. उनका कहना है कि यह कालाधन रखने वालों को 50 प्रतिशत टैक्स और जुर्माना देकर पाक साफ होने का एक और मौका देगा.
केपीएमजी (इंडिया) पार्टनर और टैक्स मामलों के प्रमुख गिरीश वनवारी ने कहा, 'जो प्रस्तावित संशोधन हैं, वे प्रगतिशील हैं और नोटबंदी की घोषणा के बाद बैंक खातों में जमा राशि पर जुर्माने को लेकर अनिश्चितता पर विराम लगाता है.'
वित्त मंत्री अरुण जेटली ने आयकर कानून में संशोधन के लिए लोकसभा में कराधान कानून (दूसरा संशोधन) विधेयक 2016 पेश किया. इसमें प्रस्ताव किया गया है कि अगर लोग अपनी अघोषित नकद की घोषणा करते हैं, तो उन्हें कर एवं जुर्माने के रूप में 50 प्रतिशत देना होगा, जबकि ऐसा नहीं करने और पकड़े जाने पर 85 प्रतिशत कर एवं जुर्माना लगेगा.
प्रस्तावित संशोधित आयकर कानून में यह भी प्रावधान है कि घोषणा करने वालों को अपनी कुल जमा राशि का 25 प्रतिशत प्रधानमंत्री मंत्री गरीब कल्याण योजना (पीएमजीकेवाई) में लगाना होगा, जहां कोई ब्याज नहीं मिलेगा. साथ ही इस राशि को चार साल तक नहीं निकाला जा सकेगा.
उन्होंने कहा, 'यह संशोधन काफी रणनीतिक जान पड़ता है और सभी के लिए फायदेमंद है, क्योंकि अगर सब कुछ अच्छा रहता है तो टैक्स कलेक्शन उल्लेखनीय रूप से बढ़ेगा. एक बार फिर विशेष बांड के जरिये देश में निवेश के लिए धन जुटाया जा सकता है. इतना ही नहीं करदाता के पास अघोषित आय का 25 प्रतिशत भविष्य में उपयोग के लिए रहेगा.'
अर्न्स्ट एंड यंग इंडिया नेशनल टैक्स लीडर सुधीर कपाड़िया ने कहा कि अघोषित नकद और बैंक जमा का बड़ा हिस्सा वैकल्पिक पीएमजीकेवाई के अंतर्गत आएगा.
ग्रांट थोर्नटन एडवाइजरी निदेशक रियाज थिंगना का मानना है कि प्रस्तावित संशोधन जटिल मुद्दे पर कुछ निश्चितता लाएगा और चूककर्ताओं को अपनी अघोषित नकद अर्थव्यवस्था में लगाने के लिए एक स्वीकार्य मार्ग उपलब्ध कराएगा.
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