खास बातें
- माना जा रहा है कि इससे डेवलपर्स के लिए कोष की लागत बढ़ जाएगी और अगले तीन से छह माह में घरों के दाम 5 से 10 प्रतिशत तक बढ़ जाएंगे।
New Delhi: भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा नीतिगत दरों में 0.25 फीसदी की और वृद्धि के फैसले का असर आवास क्षेत्र पर दिखाई देने के आसार हैं। माना जा रहा है कि इससे डेवलपर्स के लिए कोष की लागत बढ़ जाएगी और अगले तीन से छह माह में घरों के दाम 5 से 10 प्रतिशत तक बढ़ जाएंगे। रीयल्टी कंपनियों के प्रमुख संगठन केड्राई के चेयरमैन प्रदीप जैन ने कहा, देश भर में अगले तीन से छह माह में प्रॉपर्टी की कीमतों में 5 से 10 प्रतिशत का इजाफा होगा। जैन पार्श्वनाथ डेवलपर्स के चेयरमैन भी हैं। उन्होंने कहा कि रेपो और रिवर्स रेपो दरों में बढ़ोतरी से बिल्डरों के लिए ब्याज दरों में इजाफा होगा और इसका बोझ अंत में घर के खरीदारों पर पड़ेगा। जैन ने कहा कि इससे हालांकि मांग पर कोई असर नहीं पड़ेगा। लोग घर की खरीद जारी रखेंगे, क्योंकि वे भी जानते हैं कि इनके दाम चढ़ेंगे। उन्होंने कहा कि मांग के बजाय आपूर्ति ज्यादा प्रभावित होगी। ब्याज दरें बढ़ने से छोटे डेवलपर्स की नकदी की स्थिति पर असर पड़ेगा। डीएलएफ समूह के कार्यकारी निदेशक राजीव तलवार ने कहा, ब्याज दरों में पिछले एक साल से निरंतर बढ़ोतरी से निश्चित रूप से कुछ प्रभाव पड़ेगा। तलवार ने कहा कि सरकार को आपूर्ति बढ़ाने के लिए सुधारों की पहल करनी चाहिए। कुछ इसी तरह की राय जाहिर करते हुए क्रेडाई के अध्यक्ष ललित कुमार जैन ने कहा कि ब्याज दरों में बढ़ोतरी का निश्चित असर होगा। मुझे लगता है कि इससे महंगाई पर अंकुश लगने के बजाय इसमें इजाफा होगा। मुंबई की कुमार अर्बन डेवलपमेंट के प्रमुख जैन ने कहा कि इससे डेवलपर्स के लिए कोष की लागत बढ़ जाएगी। इसे खरीदारों पर डाला जाएगा। रहेजा डेवलपर्स के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक नवीन रहेजा ने कहा, धन की लागत बढ़ने से निर्माण और उत्पादन भी महंगा होगा। इससे मुद्रास्फीतिक दबाव और बढ़ेगा। रहेजा ने कहा कि मांग के दबाव को कम करने के लिए मकानों की आपूर्ति बढ़ाने की जरूरत है। इससे ही कीमतों को काबू रखा जा सकेगा।