खास बातें
- भारतीय रिजर्व बैंक आर्थिक रूप से कमजोर तबकों के लिए आवास ऋण को अगले महीने से प्राथमिक क्षेत्र की श्रेणी में लाने पर विचार कर रहा है।
नई दिल्ली: भारतीय रिजर्व बैंक आर्थिक रूप से कमजोर तबकों के लिए आवास ऋण को अगले महीने से प्राथमिक क्षेत्र की श्रेणी में लाने पर विचार कर रहा है। इसका उद्देश्य इस क्षेत्र में कर्ज के प्रवाह को बढ़ाना है।
रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर एचआर खान ने कहा, ‘हम कमजोर तबकों के लिए आवास ऋण को प्राथमिक क्षेत्र के अंतर्गत लाने की कोशिश कर रहे हैं। एक समिति इसपर विचार कर रही है। फरवरी के पहले सप्ताह तक रिपोर्ट आने की संभावना है।’
रिजर्व बैंक ने यूनियन बैंक आफ इंडिया के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक एमवी नायर की अध्यक्षता में समिति का गठन किया है जिसे प्राथमिक क्षेत्र की ऋण सीमा बढ़ाने समेत इससे जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विचार करना है।
बैंकों के कुल कर्ज में 40 प्रतिशत ऋण प्राथमिक क्षेत्र के लिए आरक्षित है। इस क्षेत्र में कषि एवं संबद्ध सेवाएं तथा लघु उद्योग आते हैं।
खान ने यह भी कहा कि कारपोरेट बांड बाजार के विकास और उसे व्यापक बनाने के उद्देश्य से शीर्ष बैंक सरकार तथा बाजार नियामक सेबी के साथ समन्वय करने की कोशिश कर रही है।