नई दिल्ली: धनाड्य निवेशक (एचएनआई HNI) अब बॉन्ड वाले म्यूचुअल फंड के बजाए सावधि जमा (एफडी) को ज्यादा तरजीह दे रहे हैं. इसका कारण बॉन्ड वाले म्यूचुअल फंड का कर दायरे में आना है जिससे इसके प्रति निवेशकों का आकर्षण कम हुआ है. मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज ने यह कहा. मोतीलाल ओसवाल इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज में बीएफएसआई (बैंक, वित्तीय सेवाएं और बीमा ) रिसर्च के प्रमुख नितिन अग्रवाल ने कहा, “इसके साथ ही, बैंक में जमा पर ब्याज दरों में पिछले एक वर्ष में अच्छी वृद्धि हुई है. इससे एचएनआई बॉन्ड वाले म्यूचुअल फंड की जगह बैंक में एफडी की ओर ज्यादा आकर्षित हो रहे हैं.”
हालांकि एचएनआई अन्य वित्तीय उत्पादों की तुलना में म्युचुअल फंड के फायदों को समझते हैं, लेकिन इस क्षेत्र की पिछली समस्याएं अभी भी उन्हें चिंतित करती हैं.
यह रिपोर्ट 1,000 करोड़ रुपये से अधिक की प्रबंधन अधीन परिसंपत्ति (एयूएम) वाले बड़े म्यूचुअल फंड वितरकों और संस्थागत बिक्री प्रतिनिधियों की सूचनाओं पर आधारित है.
रिपोर्ट के अनुसार, एचएनआई पीएमएस (पोर्टफोलियो प्रबंधन योजनाओं) और एआईएफ (वैकल्पिक निवेश कोष) को भी तरजीह दे रहे हैं.
व्यवस्थित निवेश योजनाओं (एसआईपी) के मामले में एचएनआई ग्राहक एसआईपी में बड़े स्तर पर निवेश बनाए रखने में विफल रहे हैं. इसका कारण पिछले तीन वर्षों में इससे रिटर्न न्यूनतम रहा है.
एक अप्रैल से शुरू हुए बॉन्ड म्यूचुअल फंड के लिए नए कराधान नियमों के बाद एचएनआई बैंक एफडी को तरजीह दे रहे हैं.
नये नियम के तहत, एक अप्रैल, 2023 या उसके बाद खरीदे गए बॉन्ड म्यूचुअल फंड में निवेश पर अल्पकालिक पूंजीगत लाभ कर लगाया जाएगा.
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