नई दिल्ली:
दूरसंचार व प्रसारण क्षेत्र को जल्द महानियामक मिल सकता है। दूरसंचार विभाग संचार कन्वर्जेंस विधेयक को पुनर्जीवित करने का प्रयास कर रहा है।
सूत्रों ने बताया कि दूरसंचार विभाग कई स्तरीय संचार, आईटी व मल्टीमीडिया के लिए एकल नियामकीय ढांचे के विचार पर काम कर रहा है। कम्युनिकेशन कन्वर्जेंस विधेयक के ढांचे पर विचार के लिए एक समिति का गठन किया गया है।
मूल रूप से इस विधेयक का मसौदा बीजेपी की अगुवाई वाली एनडीए सरकार के कार्यकाल में 2000 में तैयार किया गया था। लेकिन उस समय प्रसारण क्षेत्र को महानियामक के दायरे में लाने को लेकर दूरसंचार मंत्रालय व प्रसारण मंत्रालय में मतभेदों की वजह से यह विधेयक आगे नहीं बढ़ पाया था।
सूत्रों ने बताया कि विधेयक में महानियामक का प्रस्ताव है, जिसे संचार आयोग कहा जाएगा। इस महानियामक के पास परिभाषित अधिकार होंगे। इनमें प्रक्रियाएं और नियामकीय व लाइसेंसिंग कामकाज के अलावा अपीलीय न्यायाधिकरण का अधिकार शामिल है।
हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि प्रस्तावित नियामक अलग निकाय होगा या फिर ट्राई के अधिकारों को ही बढ़ाया जाएगा। सूत्रों ने बताया कि दूरसंचार विभाग संसद के शीत सत्र से पहले विधेयक का मसौदा तैयार कर लेगा।
एक सूत्र ने कहा, हम संचार नियामक के गठन के लिए काम कर रहे हैं। इसका तौर-तरीका अभी तय किया जाना है। दो संभावनाएं हैं - या तो ट्राई का अधिकार बढ़ाया जाए या फिर नए निकाय का गठन किया जाए।