यह ख़बर 11 अक्टूबर, 2012 को प्रकाशित हुई थी

सरकार ने उर्वरक पर सब्सिडी भुगतान प्रणाली में बदलाव किया

खास बातें

  • सरकार ने बढ़ती सब्सिडी पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से अब कंपनियों को वास्तविक बिक्री के आधार पर ही सब्सिडी का भुगतान करने का फैसला किया है।
नई दिल्ली:

सरकार ने बढ़ती सब्सिडी पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से अब कंपनियों को वास्तविक बिक्री के आधार पर ही सब्सिडी का भुगतान करने का फैसला किया है। उर्वरक के खुदरा विक्रेताओं द्वारा बिक्री रसीद पेश किए जाने के आधार पर ही सब्सिडी का भुगतान किया जाएगा।

मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति (सीसीईए) ने उर्वरक सब्सिडी जारी करने की प्रक्रिया में इस तरह का सुधार लाने को मंजूरी दे दी। सीसीईए के निर्णय के अनुसार कंपनियों को उर्वरक सब्सिडी प्राप्ति रसीद के आधार पर दी जाएगी। खुदरा विक्रेताओं द्वारा उर्वरक की प्राप्ति रसीद उपलब्ध कराने पर ही इसका भुगतान किया जाएगा।

बयान के अनुसार खुदरा कंपनियों से रसीद की प्राप्ति पर सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) युक्त मोबाइल फर्टिलाइजर मॉनिटिरिंग सिस्टम (एमएफएमएस) तथा उर्वरक निगरानी प्रणाली (एफएमएस) के जरिये नजर रखी जाएगी।

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यूरिया के मामले में सरकार अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) तय करती है और तथा एमआरपी एवं उत्पादन लागत में अंतर के बराबर राशि उर्वरक कंपनियों को सब्सिडी के रूप में भुगतान करती है। फॉस्फेट और पोटाश उर्वरकों के मामले में अधिकतम खुदरा मूल्य का निर्धारण नहीं किया जाता, लेकिन सरकार सब्सिडी राशि तय करती है।