यह ख़बर 19 जून, 2014 को प्रकाशित हुई थी

सरकार ने रेलवे में एफडीआई नीति को उदार बनाने की कवायद शुरू की

नई दिल्ली:

रक्षा क्षेत्र के बाद वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने तेज रफ्तार वाली ट्रेन प्रणाली तथा मालगाड़ियों के लिए अलग लाइन में 100 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) प्रस्ताव के जरिये क्षेत्र में एफडीआई नियमों में ढील देने की पहल शुरू की है।

सूत्रों के मुताबिक वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अधीन आने वाला औद्योगिक नीति एवं संवर्धन विभाग (डीआईपीपी) ने मामले में अंतर-मंत्रालयी विचार-विमर्श के लिए कैबिनेट नोट का मसौदा जारी किया है।

सूत्रों के अनुसार, विभाग रेलवे में उन सभी क्षेत्रों पर गौर कर रहा है, जहां एफडीआई की मंजूरी दी जा सकती है। इससे रेलवे के विकास में मदद मिलेगी। देश की आर्थिक वृद्धि को गति देने के लिए रेलवे प्रमुख क्षेत्र है और इसमें जीडीपी में एक प्रतिशत वृद्धि करने की क्षमता है।

तीव्र गति की रेल तथा मालगाड़ियों के लिए अलग रेलवे लाइन के अलावा उपनगरीय गलियारों तथा बंदरगाहों, खानों तथा बिजली इकाइयों को जोड़ने वाली रेलवे लाइनों में विदेशी निवेश की अनुमति देने का भी प्रस्ताव है।

हालांकि मौजूदा यात्री तथा माल ढुलाई के नेटवर्क को विदेशी निवेशकों के लिए नहीं खोला जाएगा। सूत्रों के अनुसार रेल नेटवर्क को आधुनिक रूप देने, मजबूत बनाने तथा उसके विस्तार की तत्काल जरूरत महसूस की गई है, जिसके लिए बड़े पैमाने पर पूंजी निवेश की जरूरत है। फिलहाल मास रैपिड ट्रांसपोर्ट प्रणाली को छोड़कर रेलवे में किसी प्रकार के एफडीआई पर प्रतिबंध है।

विभिन्न मंत्रालयों से प्रतिक्रिया प्राप्त करने के बाद नोट को मंजूरी के लिए मंत्रिमंडल के समक्ष रखा जाएगा। भाजपा की अगुवाई वाली सरकार रक्षा क्षेत्र में शत-प्रतिशत एफडीआई के लिए पहले ही कैबिनेट नोट जारी कर चुकी है।


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