खास बातें
- सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से 2−जी स्पेक्ट्रम के 122 लाइसेंस रद्द करने की समयसीमा दो जून से आगे बढ़ाने की मांग की है।
नई दिल्ली: सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से 2−जी स्पेक्ट्रम के 122 लाइसेंस रद्द करने की समयसीमा दो जून से आगे बढ़ाने की मांग की है। सरकार ने कोर्ट से कहा है कि अगर इसे नहीं बढ़ाया जाता है तो इससे 6.9 करोड़ से अधिक मोबाइल उपभोक्ताओं पर असर पड़ेगा क्योंकि नई नीलामी की प्रक्रिया में कम से कम 400 दिन लगेंगे।
सुप्रीम कोर्ट ने 2 फरवरी को पूर्व दूरसंचार मंत्री ए राजा के कार्यकाल में दिए गए 122 लाइसेंसों को रद्द करने का फैसला सुनाया था। सरकार ने पांच पन्नों की अपनी याचिका में यह भी कहा है कि वह अदालत के आदेश को ध्यान में रखते हुए इस बारे में संभावित समय सीमा तय करने की कोशिश कर रही है।
सरकार 2−जी मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ आज रिव्यू पेटिशन भी दाखिल कर सकती है। इसमें सरकार पहले आओ पहले पाओ की नीति को गलत ठहराने और सिर्फ नीलामी को आवंटन का सही तरीका बताने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले को चुनौती देगी। सरकार की पहले आओ−पहले पाओ की नीति के तहत ही 2008 में 122 2−जी स्पेक्ट्रम लाइसेंस बांटे गए थे जिन्हें सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिया। साथ ही सरकार नीति बनाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट के दखल पर भी सवाल उठा सकती है क्योंकि नीति बनाना सरकार का काम है।
गौरतलब है कि 2−जी मामले में सुप्रीम कोर्ट के दो फरवरी के फैसले से सबसे ज्यादा किसी पर असर पड़ा तो वह है नॉर्वे की टेलीकॉम कंपनी टेलीनॉर। यह कंपनी यूनीटेक के साथ करार करके भारतीय बाजार में यूनीनॉर के नाम से उतरी लेकिन इस कंपनी के 22 लाइसेंस रद्द होने के बाद भी टेलीनॉर का कहना है कि भारत के टेलीकॉम सेक्टर को छोड़ने का उसका कोई इरादा नहीं है। एनडीटीवी से बातचीत में टेलीनॉर के वाइस प्रेसिडेंट सिग्वे ब्रेक−के ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि सरकार जल्द दी 2−जी स्पेक्ट्रम की नीलामी करके अनिश्चितता का यह दौर खत्म करेगी।