यह ख़बर 05 जुलाई, 2013 को प्रकाशित हुई थी

खाद्य सुरक्षा अध्यादेश लागू, सरकार-विपक्ष आमने-सामने

खास बातें

  • देश के करीब 80 करोड़ लोगों को रियायती दरों पर खाद्यान्न मुहैया कराने के लक्ष्य वाले केंद्र सरकार के खाद्य सुरक्षा अध्यादेश पर शुक्रवार को राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने हस्ताक्षर कर दिए।
नई दिल्ली:

देश के करीब 80 करोड़ लोगों को रियायती दरों पर खाद्यान्न मुहैया कराने के लक्ष्य वाले केंद्र सरकार के खाद्य सुरक्षा अध्यादेश पर शुक्रवार को राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने हस्ताक्षर कर दिए। केंद्र सरकार जहां इसे एक बड़ी कामयाबी के रूप में देख रही है, वहीं विपक्ष ने विधेयक संसद में पारित कराने के बजाय इस पर अध्यादेश लाने के केंद्र सरकार के फैसले की आलोचना करते हुए इसे आगामी चुनावों से पहले एक 'राजनीतिक कदम' करार दिया।

विपक्ष का यह भी कहना है कि केंद्र सरकार अपने कार्यकाल के शुरुआती चार साल तक सोती रही और अब जबकि इस साल के आखिर में पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव तथा अगले साल आम चुनाव होने हैं, तो सरकार ने चुनाव में इसका फायदा उठाने के लिए आनन-फानन में अध्यादेश लागू किया। लेकिन सत्तारूढ़ कांग्रेस का कहना है कि इसमें कोई देरी नहीं हुई और न ही यह चुनावी हथकंडा है।

विपक्ष की आलोचनाओं और समाजवादी पार्टी (सपा) की आशंका का जवाब देते हुए कांग्रेस नेता अजय माकन ने संवाददाताओं से कहा, "देरी कहां हुई? हमें मई 2014 तक के लिए जनादेश मिला है।

हमारे पास अब भी खाद्य सुरक्षा विधेयक को लागू करने के लिए एक साल का समय है। यह चुनावों के लिए नहीं किया गया है।"

माकन ने समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव की इन आशंकाओं को भी खारिज किया कि इससे किसानों को नुकसान होगा। उन्होंने कहा कि इससे किसानों को नुकसान नहीं, बल्कि फायदा होगा। साथ ही कुपोषण तथा भुखमरी जैसी समस्या से निपटने में भी मदद मिलेगी।

माकन ने विपक्ष के इस दावे को भी खारिज कर दिया कि संसद में अल्पमत में होने के कारण सरकार ने इस पर अध्यादेश लागू किया। उन्होंने कहा, "हम अगले छह माह के भीतर संसद के दोनों सदनों में अध्यादेश लागू करने के लिए आवश्यक बहुमत जुटा लेंगे।" उन्होंने इससे भी इनकार किया कि इस अध्यादेश के लागू होने से सरकारी खजाने पर वित्तीय बोझ बढ़ेगा। केंद्रीय खाद्य मंत्री के.वी. थॉमस के साथ संवाददाता सम्मेलन में माकन ने कहा कि इस योजना के लिए 5,55,000 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया था, लेकिन इसके लागू होने से सरकारी खजाने पर केवल 23,800 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा, जो पूरी योजना के लिए निर्धारित बजट की तुलना में काफी कम है और इससे राजस्व पर कोई बोझ नहीं पड़ेगा।

विपक्ष पर बजट सत्र में विधेयक पारित नहीं करने का आरोप लगाते हुए माकन ने कहा कि अध्यादेश लाने का निर्णय विपक्ष द्वारा कोई अन्य विकल्प नहीं छोड़े जाने के बाद लिया गया।

इसे 'सोनिया गांधी, प्रधानमंत्री और राहुल गांधी का सपना' करार देते हुए माकन ने कहा कि इससे देश की करीब 80 करोड़ आबादी को रियायती दरों पर खाद्यान्न मिल सकेंगे।

अध्यादेश लागू करने के संबंध में केंद्रीय खाद्य मंत्री थॉमस ने कहा कि सरकार पिछले चार साल में पहले ही करीब 6.02 करोड़ टन खाद्यान्न की खरीद कर चुकी है। इसलिए इसके क्रियान्वयन के लिए आवश्यक 6.12 करोड़ टन का प्रबंध करने में कोई कठिनाई नहीं होगी।

इससे पहले मुख्य विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अध्यादेश लागू करने के केंद्र सरकार के फैसले को राजनीतिक कदम करार दिया था। भाजपा के नेता रविशंकर प्रसाद ने कहा, "आखिर अध्यादेश लाने की जल्दबाजी क्या थी?" भाजपा नेता यशवंत सिन्हा ने संसद की कार्यवाही में बाधा के लिए केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराया।

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वहीं, मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) की नेता वृंदा करात ने कहा, "सरकार कुपोषण की समस्या से निपटने में अक्षम रही। अब वे अध्यादेश लागू कर रहे हैं। आखिर वे चार साल से क्या कर रहे थे? क्या वे सो रहे थे?"