यह ख़बर 05 जनवरी, 2012 को प्रकाशित हुई थी

'खुदरा क्षेत्र में एफडीआई से डेयरी किसानों को नुकसान होगा'

खास बातें

  • एशिया की सबसे बड़ी दूध उत्पादक गुजरात सहकारी दुग्ध विपणन संघ (जीसीएमएमएफ) ने बहु ब्रांड खुदरा क्षेत्र को प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के लिए खोलने का विरोध किया है।
अहमदाबाद:

एशिया की सबसे बड़ी दूध उत्पादक गुजरात सहकारी दुग्ध विपणन संघ (जीसीएमएमएफ) ने बहु ब्रांड खुदरा क्षेत्र को प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के लिए खोलने का विरोध किया है। अमूल ब्रांड के तहत अपने डेयरी उत्पाद बेचने वाली जीसीएमएमएफ का मानना है कि इस कदम से डेयरी किसान बुरी तरह प्रभावित होंगे।

जीसीएमएमएफ के प्रबंध निदेशक आरएस सोढ़ी ने कहा, ‘यदि भारत में बहु ब्रांड खुदरा क्षेत्र में एफडीआई की अनुमति दी जाती है, तो भारतीय डेयरी किसानों का भी पश्चिमी देशों के किसानों जैसा ही हाल होगा।’ उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि अमेरिका में डेयरी किसानों की हिस्सेदारी 1996 में 52 फीसद थी, जो 2009 में घटकर 38 प्रतिशत रह गई। इसी तरह, ब्रिटेन के डेयरी किसानों की हिस्सेदारी 1996 के 56 फीसद से घटकर 2009 में 38 प्रतिशत पर आ गई है।

Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com

सोढ़ी ने कहा कि संगठित रिटेल क्षेत्र एकाधिकार की स्थिति पैदा कर देता है। इसका न केवल किसानों बल्कि प्रसंस्करणकर्ताओं को भारी मूल्य चुकाना पड़ता है। उन्होंने कहा, ‘हमारी सहकारिताएं उपभोक्ता के रूप में भारतीय किसानों के लिए 70 से 80 प्रतिशत की हिस्सेदारी सुनिश्चित करती हैं। इसकी वजह यह है कि भारतीय सहकारिता किसान उत्पादन, प्रोसेसिंग और खासकर विपणन का शत-प्रतिशत नियंत्रण करती हैं।’