सिंगापुर:
एक रिपोर्ट के अनुसार भारत की आर्थिक वृद्धि दर में गिरावट अब न्यूनतम स्तर पर पहुंच गई लगती है और वर्ष 2013 के दौरान जीडीपी वृद्धि दर 4.7 प्रतिशत रहने की संभावना है। आगे सुधार की उम्मीद है, लेकिन घटबढ़ बनी रहेगी।
परामर्श फर्म कैपिटल इकोनॉमिक्स लिमिटेड के अनुसार मौजूदा वित्तवर्ष की तीसरी तिमाही (कैलेंडर वर्ष के अनुसार) में वृद्धि दर 4.8 प्रतिशत रही, जो कि दूसरी तिमाही में चार साल के निचले स्तर 4.4 प्रतिशत पर रही थी।
फर्म ने अपनी रिपोर्ट में कहा है, यह वृद्धि दर हमारे अनुमान 4.7 प्रतिशत से मामूली ऊंची है। इस दौरान विनिर्माण क्षेत्र वृद्धि की राह पर लौटा आया है और उसने एक प्रतिशत वृद्धि दर्ज की। कैपिटल इकोनॉमिक्स के अनुसार, भविष्य की तरफ देखने से हमें लगता है कि भारत की आर्थिक वृद्धि में सुधार की गति धीमी रहेगी और इसमें उतार-चढ़ाव बना रहेगा।
रिपोर्ट के अनुसार आर्थिक वृद्धि के मासिक आंकड़े दिखाते हैं कि अर्थव्यवस्था में सुधार की गति में मजबूती नहीं है। उदाहरण के तौर पर, जुलाई में औद्योगिक उत्पादन में वृद्धि रही, जबकि अगस्त में धीमी पड़ गई और सितंबर में पिछले गिरावट से ही यह उबर पाया। इसमें कहा गया है कि ऊंची उपभोक्ता तथा थोक मूल्य आधारित मुद्रास्फति से परिवारों और कंपनियों के बजट पर दबाव बना रहेगा।