नई दिल्ली: सरकार ने बासमती चावल के एक्सपोर्ट (Basmati Rice Export) के लिए फ्लोर प्राइस 1200 डॉलर/टन से घटाकर 950 डॉलर/टन कर दिया है. अलग-अलग सेक्शन से ये बात दोहराई जा रही थी कि ऊंचे फ्लोर प्राइस के चलते एक्सपोर्ट पर बुरा असर पड़ रहा है. दरअसल फ्लोर प्राइस वो मिनिमम लिमिट होती है, जिसके नीचे किसी चीज को बेचा या एक्सपोर्ट नहीं किया जा सकता.
एक्सपोर्ट प्रोमोशन बॉडी APEDA से कम्युनिकेशन में केंद्रीय उद्योग मंत्रालय (Commerce Ministry) ने कहा, 'बासमती चावल के एक्सपोर्ट कॉन्ट्रैक्ट के रजिस्ट्रेशन के लिए प्राइस लिमिट को घटाकर 950 डॉलर/टन करने का फैसला किया गया है.' APEDA को 950 डॉलर/टन से ऊपर के कॉनट्रैक्ट को रजिस्टर करने का निर्देश दिया गया है.
सरकार ने 27 अगस्त को बासमती चावल का फ्लोर प्राइस 1200 डॉलर/टन तय किया था, ताकि प्रीमियम बासमती चावल की आड़ में गैर बासमती चावल के संभावित 'अवैध एक्सपोर्ट' पर प्रतिबंध लगाया जा सके. 2022-23 में भारत ने कुल 4.8 बिलियन डॉलर का बासमती चावल एक्सपोर्ट किया था, जिसकी वॉल्यूम 45.6 लाख टन थी. राइस एक्सपोर्टर कर रहे थे मांग
पिछले दो महीने से राइस एक्सपोर्टर एसोसिएशन इस प्राइस लिमिट को घटाने की मांग कर रहे थे. उनका कहना था कि इस लिमिट के चलते भारत, पाकिस्तान जैसे पड़ोसी देशों से एक्सपोर्ट में पिछड़ रहा है. इनके मुताबिक बीते- 2-3 वित्त वर्ष में भारत का एवरेज एक्सपोर्ट प्राइस 800-900 डॉलर/टन के आसपास रहा है.
इन मांगों के बाद उपभोक्ता मामलों के मंत्री पीयूष गोयल ने बासमती चावल के एक्सपोर्टर्स के साथ एक मीटिंग की थी.
चावल की कीमतों को नियंत्रित करने की कोशिश
बता दें सरकार घरेलू स्तर पर चावल के रिटेल प्राइस को नियंत्रित रखने के उद्देश्य से आपूर्ति को बढ़ाने के लिए कई कदम उठा रही है. पिछले साल सितंबर में सरकार ने टूटे चावल के एक्सपोर्ट पर बैन लगा दिया था, जबकि जुलाई में गैर-बासमती चावल के एक्सपोर्ट पर प्रतिबंध लगाए गए. 20% की एक्सपोर्ट ड्यूटी भी थोपी गई.
क्या है APEDA का काम
फॉरेन ट्रेड पॉलिसी के मुताबिक APEDA को बासमती चावल के सभी एक्सपोर्ट कॉन्ट्रैक्ट का रजिस्ट्रेशन करना होता है. इसके बाद संस्थान बासमती चावल की इन खेपों के लिए रजिस्ट्रेशन और एलोकेशन सर्टिफिकेट जारी करती है.