यह ख़बर 06 मार्च, 2011 को प्रकाशित हुई थी

डीएमके के फैसले से उद्योग जगत में खलबली

खास बातें

  • केंद्र की संप्रग सरकार से हटने के डीएमके के फैसले का असर आर्थिक सुधारों के लिए उठाए जाने वाले कदमों पर पड़ सकता है।
नई दिल्ली:

केंद्र की संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार से हटने के द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) के फैसले का असर आर्थिक सुधारों के लिए उठाए जाने वाले कदमों पर पड़ सकता है। इस मसले पर देश के बड़े कारोबारी खुल कर अपनी प्रतिक्रिया देने से बच रहे हैं, लेकिन कुछ कारोबारियों ने निजी तौर पर कहा कि यदि इस स्थिति से जल्द नहीं निपटा गया तो इससे आर्थिक सुधारों के लिए निर्णय लेने की प्रक्रिया धीमी हो सकती है। एक कारोबारी ने कहा, "केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी की टिप्पणी से हमें कुछ अनहोनी के संकेत मिल रहे थे, लेकिन स्थिति इस तरह से मोड़ लेगी इसकी हमें उम्मीद नहीं थी।" इसके पहले वित्त मंत्री ने संवाददाताओं से कहा था कि तमिलनाडु में विधानसभा सीटों की साझेदारी को लेकर डीएमके के साथ कुछ समस्याएं हैं लेकिन इन्हें सुलझा लिया जाएगा। मुखर्जी ने शनिवार को कहा था कि राजनीतिक सम्बंध में कभी कभी परेशानी आती है। हममें परेशानी पैदा करने की क्षमता है, तो उसका समाधान करने की भी क्षमता है। इसे सुलझा लिया जाएगा। एक अन्य कारोबारी ने संसद में रखे जाने वाले बीमा, पेंशन, बैंकिंग सहित अन्य वित्तीय सुधार वाले विधेयकों को लेकर चिंता प्रकट की। उन्होंने कहा कि इस विवाद से विदेशी निवेश और खास तौर से मल्टी-ब्रांड रिटेल में विदेशी निवेश का मामला भी फिर से ठंडे बस्ते में चले जाने की सम्भावना है। उल्लेखनीय है कि डीएमके ने शनिवार को तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में सीटों की साझेदारी को लेकर कांग्रेस से मतभेद होने पर केंद्र की संप्रग सरकार से हटने का फैसला किया।


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