खास बातें
- खास तौर से तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश की विकास दर राष्ट्रीय विकास दर से भी नीचे रही है।
बेंगलुरू: दक्षिण भारत के चार राज्यों में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के विकास की रफ्तार पिछले कुछ सालों में घटी है। खास तौर से तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश की विकास दर राष्ट्रीय विकास दर से भी नीचे रही है। यह जानकारी एक अध्ययन में सामने आई है। यह अध्ययन मैकिंसे द्वारा भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के लिए किया गया था। मैकिंसे के साझीदार अनंत नारायणन ने शनिवार को सीआईआई के दक्षिण क्षेत्रीय सलाना सम्मेलन में तकरीबन 200 सदस्यों के बीच अध्ययन के मुख्य बिंदुओं को रखते हुए कहा कि वर्ष 2005-10 की पांच सालों की अवधि में राष्ट्रीय विकास दर 8.7 फीसदी रही। इसी अवधि में दक्षिण के चार राज्यों की सम्मिलित विकास दर 7.85 फीसदी रही। चारों राज्यों में कर्नाटक की विकास दर सर्वाधिक 8.7 फीसदी, केरल की 8.1 फीसदी, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु की 7.4 फीसदी रही। उधर पश्चिमी राज्य गुजरात की विकास दर इसी अवधि में 11.3 फीसदी, हरियाणा की 11 फीसदी और पिछड़े राज्य के रूप में पहचाने जाने वाले बिहार की विकास दर 9.6 फीसदी रही। नारायणन ने कहा कि कई कारणों से दक्षिण भारतीय राज्यों की विकास दर में गिरावट आई। यहां भूमि की कीमतों में वृद्धि, मजदूरों की कमी, आधारभूत संरचनाओं की सीमाएं और दूसरे राज्यों द्वारा निवेशकों को आकर्षित करने के लिए किए गए प्रयासों ने इन राज्यों की विकास की गति पर नकारात्मक असर डाला है। दक्षिण भारतीय राज्यों की विकास दर पर केंद्रित इस सम्मेलन में नारायणन ने अध्ययन के हवाले से कहा कि दक्षिण भारत देश के विकास में अग्रणी भूमिका निभा सकता है, लेकिन इसके लिए प्रतिभा और उनकी उपलब्धता पर ध्यान देने की जरूरत है, जो निर्माण और सेवा क्षेत्र की कम्पनियों के लिए मुख्य चिंता का विषय है। मंजूरी की शिथिल प्रक्रिया और नीतियों के कार्यान्वयन में देरी चिंता का एक अन्य विषय है।