यह ख़बर 30 मार्च, 2011 को प्रकाशित हुई थी

विश्व कप के कारण बढ़ी 'क्रिकेट चूड़ियों' की मांग

खास बातें

  • क्रिकेट विश्व कप के चलते फिरोजाबाद में खासतौर बनाई गई 'क्रिकेट चूड़ियों' और कंगनों की मांग काफी बढ़ गई है। इससे यहां के चूड़ी निर्माताओं को बहुत फायदा हो रहा है।
फिरोजाबाद:

क्रिकेट विश्व कप के चलते फिरोजाबाद में खासतौर बनाई गई 'क्रिकेट चूड़ियों' और कंगनों की मांग काफी बढ़ गई है। इससे यहां के चूड़ी निर्माताओं को बहुत फायदा हो रहा है। फिरोजाबाद के चूड़ी आपूर्तिकर्ता अश्विनी गुप्ता ने बताया, इस समय देश के सभी हिस्सों में हमारी विश्व कप क्रिकेट चूड़ियों की मांग काफी बढ़ गई है। खासतौर पर दिल्ली, हरियाणा, पंजाब और उत्तर प्रदेश में यह मांग बहुत ज्यादा है। गुप्ता ने बताया कि कंगन जैसी दिखने वाली पांच रंग-बिरंगी चूड़ियों की कीमत 70 रुपये के आसपास है। गुप्ता कहते हैं, हमने विभिन्न स्रोतों के जरिए डिजाइन तैयार किए और फिर उन्हें चूड़ी निर्माताओं के पास भेजा। उन्होंने बताया, चूड़ियों के अलग-अलग नाम दिए गए हैं। कुछ लोकप्रिय ब्रांड्स को फिल्मी नाम जैसे 'पवित्र रिश्ता' या 'भाभी की चूड़ियां' दिए गए हैं। बाजार बहुत बड़ा है। कांच के शहर के रूप में फिरोजाबाद अब भी नंबर एक के स्थान पर कायम है। एक कम्प्यूटर व्यवसायी प्रवीण अग्रवाल ने बताया, महाराष्ट्र से भी डिजाइन आ रहे हैं। एक डिजाइन में क्रिकेट विश्व कप का लोगो और भारतीय झंडा बने हुए हैं। गजानन बैंगल स्टोर के नरेंद्र शर्मा कहते हैं, विश्व कप हमारी योग्यता और रचनात्मकता को प्रदर्शित करने का एक अच्छा अवसर है। हमारे कारीगर बहुत बढ़िया काम करते हैं। ये चूड़ियां पूरे फिरोजाबाद और पड़ोसी आगरा में भी मिल रही हैं। एक अन्य चूड़ी आपूर्तिकर्ता महेश अग्रवाल ने बताया, सदर बाजार और राजा की मंडी स्थित स्टोर्स 'क्रिकेट चूड़ियां' बेचकर अच्छा व्यवसाय कर रहे हैं। चूड़ी व्यापारी राशिद कहते हैं कि विश्व कप के बाद वह आठ अप्रैल से शुरू होने जा रहे इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) क्रिकेट चैम्पियनशिप में व्यवसाय करने को तैयार हैं। साल 1993 में फिरोजाबाद के कांच व्यवसाय को तगड़ा झटका लगा था। दरअसल उस समय सर्वोच्च न्यायालय ने ताज ट्रैपेजियम क्षेत्र में इन प्रदूषणकारी उद्योगों को बंद करने का आदेश दिया था। आगरा में ताजमहल के चारों ओर फैले 10,400 किलोमीटर क्षेत्र में ताजमहल के अलावा आगरा के किले, फतेहपुर सीकरी सहित 40 से ज्यादा संरक्षित इमारतें हैं। बाद में 'गैस अथॉरिटी ऑफ इंडिया' ने इन उद्योगों को प्राकृतिक गैस की पाइपलाइन उपलब्ध कराई और यहां फिर काम शुरू हो गया। अब इस क्षेत्र के उद्योग दुनिया के सबसे बेहतरीन कांच उद्योगों में शामिल हैं। 'सुहाग नगरी' के नाम से मशहूर फिरोजाबाद में सबसे ज्यादा कांच उद्योग हैं। स्थानीय उद्योगों में देश की 80 प्रतिशत चूड़ियों का निर्माण होता है। पाकिस्तान, बांग्लादेश और कुछ अन्य देशों में भी यहां की चूड़ियों की मांग है।


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