खास बातें
- बड़ी संख्या में कंपनियों का मानना है कि अगर भ्रष्टाचार पर काबू पा लिया जाए, तो हम सालाना 9 फीसद आर्थिक वृद्धि हासिल कर सकते हैं।
New Delhi: 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले के कारण हाल के महीनों में चर्चा में रहा दूरसंचार क्षेत्र रीयल एस्टेट तथा निर्माण के बाद दूसरा सबसे भ्रष्ट क्षेत्र है। वैश्विक सलाहकार कंपनी केपीएमजी के सर्वे में यह बात कही गई है। सर्वे में कॉरपोरेट इंडिया को शामिल करते हुए यह भी कहा गया है कि बड़ी संख्या में कंपनियों का मानना है कि अगर भ्रष्टाचार पर काबू पा लिया जाए, तो हम सालाना 9 फीसद आर्थिक वृद्धि हासिल कर सकते हैं। कारपोरेट क्षेत्र ने यह भी माना है कि निजी क्षेत्र बड़े पैमाने पर रिश्वत और भाई-भतीजावाद के लिये काफी हद तक जिम्मेदार है। सर्वे में देश में परिवहन, नागर विमानन, तेल एवं गैस, उपभोक्ता वस्तुएं, वित्तीय सेवा, वाहन और रसायन जैसे विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत 100 भारतीय और बहुराष्ट्रीय कंपनियों को शामिल किया गया। सर्वे में 32 फीसद लोगों ने रीयल एस्टेट और निर्माण क्षेत्र को सबसे भ्रष्ट माना। दूसरे स्थान पर दूरसंचार क्षेत्र रहा। कुल 17 फीसद लोगों ने इसे सर्वाधिक भ्रष्ट क्षेत्र बताया। 2जी घोटाले के कारण दूरसंचार क्षेत्र इन दिनों चर्चा में है। भ्रष्टाचार के मामले में केपीएमजी सर्वे में शिक्षा और गरीबी उन्मूलन जैसे विकास से संबद्ध क्षेत्र तीसरे स्थान पर रहा। कुल 13 फीसद लोगों ने इसे सर्वाधिक भ्रष्ट बताया। सर्वे में दस फीसद लोगों ने बैंकिंग और बीमा क्षेत्र को, जबकि 9 फीसद ने रक्षा क्षेत्र को भ्रष्ट बताया। आईटी, आईटी संबद्ध और बीपीओ सेवा को भ्रष्ट बताने वालों की संख्या 6 फीसद तथा ऊर्जा एवं बिजली क्षेत्र को भ्रष्ट बताने वालों की संख्या 5 फीसद रही। ट्रांसपरेंसी इंटरनेशनल इंडिया की कार्यकारी निदेशक अनुपमा झा ने सर्वे जारी करते हुए कहा, यह सर्वे बताता है कि कंपनियां भ्रष्टाचार का शिकार होने का दावा नहीं कर सकतीं। वे भी इसके लिये जिम्मेदार हैं। सर्वे के मुताबिक 51 फीसद लोगों ने आशंका जतायी है कि भ्रष्टाचार बढ़ने से विदेशी निवेश प्रभावित होगा वहीं 90 फीसद का मानना है कि भ्रष्टाचार से शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव आएगा। इससे निवेशक देश में आने से कतराएंगे। सर्वे में 99 फीसद लोगों का मानना था कि भ्रष्टाचार के कारण व्यापार का समान अवसर घटता है। केपीएमजी इंडिया के कार्यकारी निदेशक :फोरेंसिंक सर्विसेज: रोहित महाजन ने कहा, 68 फीसद लोगों का मानना था कि भ्रष्टाचार के लिये निजी क्षेत्र भी जिम्मेदार है। सर्वे में 84 फीसद कारपोरेट क्षेत्र ने माना कि सरकार भ्रष्टाचार निरोधक नियमों का प्रभावी तरीके से पालन नहीं कर रही है।