खास बातें
- कंपनी जितनी बड़ी होगी उसे उतनी ही ज्यादा कर रियायतें उपलब्ध होंगी, जबकि इसके विपरीत छोटी कंपनियों को उनके मुकाबले ज्यादा कर देना पड़ता है।
New Delhi: कंपनी जितनी बड़ी होगी उसे उतनी ही ज्यादा कर रियायतें उपलब्ध होंगी, जबकि इसके विपरीत छोटी कंपनियों को उनके मुकाबले ज्यादा कर देना पड़ता है। नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (कैग) की रिपोर्ट में जांच पड़ताल के बाद यह मुद्दा सामने आया है। कैग की रिपोर्ट के अनुसार 179 शीर्ष कंपनियां जिनका कर पूर्व मुनाफा 500 करोड़ रुपये अथवा इससे अधिक रहा है वर्ष 2008.09 में इन कंपनियों ने 33.9 प्रतिशत के प्रभावी कर के बजाय 22.1 प्रतिशत की दर से ही कर का भुगतान किया। रिपोर्ट के अनुसार इसके विपरीत एक करोड़ रुपये तक का कर पूर्व मुनाफा अर्जित करने वाली कंपनियों के मामले में कर भुगतान की प्रभावी दर 25.5 प्रतिशत तक रही है। कैग ने अपनी इस नवीनतम रिपोर्ट में कहा है इस लिहाज से कहा जा सकता है कि कर रियायतों का ज्यादा लाभ बड़ी कंपनियों को ही होता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 2005-06 में बड़ी कंपनियों को दी गई कर रियायतें 150 प्रतिशत तक बढकर 1,20,000 करोड रुपये तक पहुंच गई जबकि एक साल पहले तक यह 48,168 करोड़ रुपये पर थी। कैग की इस रिपोर्ट से वामपंथी दलों द्वारा बार-बार उठाये जाने वाले मुद्दे को ही बल मिलता है। वामपंथी दल समय समय पर यह कहते रहे हैं कि सरकार की कर राजस्व वसूली केवल निम्न और मध्यमवर्गीय आय आयवर्ग से ही ज्यादा होती है जबकि बड़ी कंपनियां कर रियायतों के साथ खुले हाथ निकल जाती हैं। सरकार की इसी नीति का विरोध करते हुए मार्क्सवादी पार्टी की नेता वृंदाकरात ने कहा वर्ष 2011-12 के बजट में सरकार का झुकाव अमीरों के पक्ष में साफ दिखाई देता है। सरकार ने अमीरों का ध्यान रखा है जबकि आम जनता का इसमें कोई ध्यान नहीं रखा गया है।