खास बातें
- सिक्के गलाने अथवा उनको तोड़ने फोड़ने के जुर्म में सात साल तक की सजा का प्रावधान किया गया है।
New Delhi: सिक्कों की समय समय पर बढ़ती तंगी पर गौर करते हुए एक ऐसा कानून बनने जा रहा है जिसमें सिक्के गलाने अथवा उनको तोड़ने फोड़ने के जुर्म में सात साल तक की सजा का प्रावधान किया गया है। लोकसभा ने इससे संबंधित विधेयक को शुक्रवार को बिना चर्चा के पारित कर दिया। सदन ने कॉयनेज बिल 2009 को ध्वनिमत से पारित कर दिया। वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने विधेयक को विचार और पारित करने के लिये पेश किया था। इस विधेयक में चार मौजूदा कानूनों को भी शामिल कर दिया गया है। सिक्कों से जुड़े इन कानूनों के प्रावधानों में भी बदलाव किया गया है। विधेयक दिसंबर 2009 में लोकसभा में पेश किया गया था। उसके बाद इसे वित्त मंत्रालय से जुड़ी स्थायी समिति के सुपुर्द कर दिया गया था। समिति से मिले सुझावों के बाद विधेयक के संशोधित रुप को 10 फरवरी को मंत्रिमंडल की मंजूरी मिल गई थी। वित्त मंत्रालय से जुड़ी स्थायी समिति ने सिक्कों को गलाने अथवा बिगाड़ने का काम करने के दोषी व्यक्ति को अधिकतम 10 साल की सजा की सिफारिश की थी लेकिन मंत्रिमंडल ने इसे घटाकर सात साल कर दिया। इस विधेयक के साथ जिन अन्य पुराने कानूनों को शामिल कर दिया गया है उनमें इंडियन कॉयनेज एक्ट 1906, दि स्माल कॉयन्स :आफेंसेस: एक्ट 1971, दि मैटल टोकन एक्ट 1889 और दि ब्रोंज कॉयन :लीगल टेंडर: एक्ट 1918, शामिल हैं। लोकसभा में पारित नये विधेयक में कॉयन की परिभाषा को भी व्यापक बनाया गया है। चांदी, निकेल, तांबा और कांसे से बने सिक्के अब प्रचलन में नहीं है इसलिये विधेयक में धातु और मिश्रधातु के अलावा किसी अन्य धातु से बने सिक्के को शामिल किया गया है। इस समय 50 पैसे, एक, दो, पांच और दस रुपये का सिक्का प्रचलन में है।