खास बातें
- वैश्विक बैंकिंग फर्म सिटीग्रुप ने कीमत दबाव को देखते हुए 2011-12 में भारत की औसत मुद्रास्फीति दर 8.6% रहने का संशोधित अनुमान लगाया है।
New Delhi: वैश्विक बैंकिंग फर्म सिटीग्रुप ने कीमत दबाव को देखते हुए 2011-12 में भारत की औसत मुद्रास्फीति दर 8.6 प्रतिशत रहने का संशोधित अनुमान लगाया है। इससे पहले उसने यह दर 8.0 प्रतिशत रहने का अनुमान व्यक्त किया था। इसके साथ ही कंपनी ने कहा है कि भारत की मुख्य मुद्रास्फीति मार्च, 2012 तक 8 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जो भारतीय रिजर्व बैंक के 6 प्रतिशत के अनुमान से कहीं अधिक है। सिटी इन्वेस्ट रिसर्च एंड एनालसिस में कहा गया है कि फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य में वृद्धि तथा घरेलू ईंधन कीमतों में तेजी के कारण कीमतों में तेजी रहेगी। अब हमारा मानना है कि मुख्य मुद्रास्फीति औसत 8.6 प्रतिशत रहेगी, जो पहले 8.0 प्रतिशत रहने का अनुमान था। बैंक ने अपने एक ताजा अध्ययन में कहा है कि मार्च, 2012 में मुद्रास्फीति 8 प्रतिशत रहने का अनुमान है। भारतीय रिजर्व बैंक ने सालाना मौद्रिक नीति में मौजूदा वित्तवर्ष की पहली छमाही में औसत मुद्रास्फीति 9 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया था, जबकि उसने कहा था कि मार्च, 2012 में यह लगभग 6 प्रतिशत हो जाएगी। सकल मुद्रास्फीति इस साल मई में 9.06 प्रतिशत रही। भारतीय रिजर्व बैंक ने 16 जून को मध्य तिमाही समीक्षा में गैर-खाद्य मुद्रास्फीति के बढ़ने पर चिंता जताते हुए कहा था कि वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की ऊंची कीमतों का पूरा असर मुद्रास्फीति पर अभी आना है। तेल विपणन कंपनियों द्वारा पेट्रोल के दाम 5 रुपये प्रति लीटर बढ़ाने का असर मई के मुद्रास्फीति आंकड़ों पर दिख गया, लेकिन डीजल तथा रसोई गैस के दाम अभी बढ़ने हैं और इनका असर भी बाद में ही सामने आएगा। तेल विपणन कंपनियां अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के कारण बढ़ते दबाव की बात लगातार कर रही हैं। सरकार ने इसी माह धान, दलहन तथा कपास सहित अन्य फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाया है।