नई दिल्ली:
सरकार ने लौह अयस्क और बॉक्साइट सहित अन्य खनिजों पर रॉयल्टी दरों में बढ़ोतरी के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इस कदम से राज्यों के सालाना राजस्व में उल्लेखनीय इजाफा होगा।
संचार तथा सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कैबिनेट की बैठक के बाद संवाददाताओं से कहा कि कैबिनेट ने सैद्धांतिक रूप से खनिजों की रॉयल्टी दरों में संशोधन को मंजूरी दे दी है। कुल 55 उत्पादों पर रॉयल्टी की दरें बढ़ाई गई हैं। हालांकि इसमें कोयला, लिग्नाइट व रेत शामिल नहीं हैं।
उन्होंने कहा कि हमें इस बात का संतोष है कि रॉयल्टी दरों में संशोधन कर दिया गया है... लंबे समय से इनमें संशोधन नहीं हुआ था। हालांकि, उन्होंने यह नहीं बताया कि रॉयल्टी दरों में संशोधन का वित्तीय प्रभाव क्या होगा। अनुमानों के अनुसार इस कदम से खनिज संसाधनों से समृद्ध राज्यों का सालाना राजस्व संग्रहण 40 प्रतिशत बढ़कर 15,000 करोड़ रुपये हो जाएगा।
खनिज संपदा से समृद्ध 11 राज्यों में छत्तीसगढ़, ओडिशा, झारखंड, कर्नाटक व गोवा शामिल हैं। बॉक्साइट के लिए रॉयल्टी की दर मौजूदा 0.5 से बढ़ाकर 0.6 प्रतिशत करने का प्रस्ताव है। इसके अलावा मैंगनीज पर रॉयल्टी की दर 4.2 से बढ़ाकर 5 प्रतिशत करने की योजना है।
प्रमुख खनिजों कोयला, लिग्नाइट व रेत को छोड़कर अन्य खनिजों की रॉयल्टी की दरें प्रत्येक तीन साल पर संशोधित की जाती हैं। इनमें आखिरी बार संशोधन अगस्त, 2009 में किया गया था। मौजूदा प्रस्ताव यूपीए-2 के कार्यकाल में 2011 में गठित 17-सदस्यीय अध्ययन समिति की सिफारिशों पर आधारित है।
रॉयल्टी ऐसा कर है, जो सरकार द्वारा खनन कंपनियों पर खानों के स्वामित्व के अधिकार के स्थानांतरण के लिए लगाया जाता है। सरकार जहां रॉयल्टी को राजस्व के रूप में देखती है, उद्योगपति इसे उत्पादन लागत का हिस्सा मानते हैं।