यह ख़बर 28 फ़रवरी, 2011 को प्रकाशित हुई थी

आम आदमी, किसानों को राहत दी प्रणब ने...

खास बातें

  • समय पर कर्ज चुकाने वाले किसानों को छूट मिलेगी, करमुक्त आयसीमा को बढ़ाकर 1.8 लाख रुपये करने का प्रस्ताव किया गया है।
New Delhi:

वित्तमंत्री प्रणब मुखर्जी ने सोमवार को अपना छठा और यूपीए-2 सरकार का तीसरा आम बजट पेश करते हुए आम नागरिकों को कुछ राहत देते हुए करमुक्त आयसीमा को 1.6 लाख रुपये से बढ़ाकर 1.8 लाख रुपये करने का प्रस्ताव किया है। दो ही महीनों में पांच राज्यों में विधानसभा चुनावों के मद्देनजर वित्तमंत्री ने आम आदमी को राहत देने के लिए कई कदम उठाए हैं, जिनके तहत अब 62 के स्थान पर 60 वर्ष के नागरिक वरिष्ठ माने जाएंगे, जिन्हें 2.5 लाख तक की आय पर कर नहीं देना होगा। इसके अतिरिक्त 80 वर्ष से अधिक आयु वाले 'अतिवरिष्ठ' नागरिक माने जाएंगे, जिनके लिए करमुक्त आयसीमा पांच लाख होगी। वित्तमंत्री ने वर्ष 2011-12 में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में नौ प्रतिशत वृद्धि की उम्मीद भी जताई है, तथा दावा किया है कि महंगाई अगले साल कम हो जाएगी। इसके अतिरिक्त श्री मुखर्जी ने कैश सब्सिडी के लिए सरकार द्वारा समिति बनाए जाने की भी घोषणा की। उन्होंने कहा कि एलपीजी, खाद तथा कैरोसिन में कैश सब्सिडी दी जाएगी, जो 2012 से लागू होगी। वित्तमंत्री ने भ्रष्टाचार से लड़ने की जरूरत बताते हुए मिलजुल-कर इस दिशा में काम करने का आहृवान किया। सरकार ने शिक्षा क्षेत्र के लिए भी 52 हज़ार करोड़ रुपये, तथा भारत निर्माण के लिए 58 हज़ार करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। उन्होंने घोषणा की कि समय पर कर्ज चुकाने वाले किसानों को तीन प्रतिशत की छूट मिलेगी, जबकि अब 25 लाख तक के होम लोन सुरक्षित माने जाएंगे, पहले यह सीमा 20 लाख थी। इसके अतिरिक्त सरकार 15 लाख तक होम लोन पर छूट के तौर पर ब्याज पर एक फीसदी सब्सिडी देगी। सरकार ने राष्ट्रीय कृषि विकास योजना का बजट भी बढ़ाकर 7,866 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। ग्रामीण बैंकों को भी नए वित्त वर्ष में 5,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त पूंजी दी जाएगी। वित्तमंत्री के मुताबिक ग्रामीण क्षेत्रों में अभी काफी कुछ करना बाकी है। वित्तमंत्री के अनुसार सरकार ने वर्ष 2011-12 में 40 हजार करोड़ के विनिवेश का लक्ष्य तय किया है, तथा नए बैंक लाइसेंस देने के संबंध में विधेयक भी इसी सत्र में लाए जाने की घोषणा की गई है। वित्तमंत्री ने महंगाई के घटने का दावा करते हुए कहा कि चीनी-दाल की कीमतों में कमी आई है तथा अगले साल महंगाई कम हो जाएगी। उन्होंने कहा कि खाने-पीने की महंगाई दर में कमी आई है, और वह 20.2 से 9.3 फीसदी हो गई है, तथा थोक-खुदरा भाव में ज्यादा अंतर है। उन्होंने कहा कि 2014-15 तक घाटा पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है तथा टैक्स प्रणाली को और सरल बनाया जाएगा। तथा जनरल सर्विस टैक्स (GST) को देशभर में लागू करने के लिए विधेयक लाया जाएगा।उद्योगों की प्रोत्साहन पैकेज वापसी की दिशा में कोई बड़ा कदम नहीं उठाया गया और उत्पाद एवं सीमा शुल्क की शीर्ष मानक दरों में बदलाव नहीं किया गया है। सेवाकर को 10 प्रतिशत पर यथावत रखा गया और कई अन्य सेवाओं को इसके दायरे में लाने की घोषणा की गई। घरेलू कंपनियों पर कर बोझ को कुछ हल्का करते हुए वित्तमंत्री ने कंपनियों पर लगने वाले 7.5 प्रतिशत अधिभार की दर को घटाकर 5 प्रतिशत कर दिया। हालांकि उन्होंने न्यूनतम वैकल्पिक कर (मैट) दर को घटाने के बजाय 18 से बढ़ाकर 18.5 प्रतिशत कर दी। उद्योग जगत की मांग थी कि मैट दर सामान्य कंपनी कर की आधी होनी चाहिए। वित्तमंत्री ने सामाजिक क्षेत्र की विभिन्न योजनाओं के लिए बजट आवंटन पिछले साल की तुलना में 17 प्रतिशत बढ़ाकर 1,60,887 करोड़ रुपये रखने का प्रस्ताव किया है। यह राशि कुल योजना आवंटन का 36.4 प्रतिशत है। एकीकृत बाल विकास योजना के तहत आंगनबाड़ी कार्यकताओं की लंबे समय से चली आ रही मांग पर गौर करते हुए वित्तमंत्री ने आंगनबाड़ी कार्यकताओं का मेहनताना 1,500 से बढ़ाकर 3,000 रुपये और आंगनबाड़ी सहायकों का पारिश्रमिक 750 से बढ़ाकर 1500 रुपये प्रतिमाह कर दिया। यह व्यवस्था अप्रैल, 2011 से लागू होगी। इससे देशभर में 22 लाख आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायक लाभान्वित होंगे। बजट में अगले वित्त वर्ष में भारत निर्माण योजना के लिए कुल मिलाकर 58,000 करोड रुपये का प्रावधान किया गया है, मौजूदा वित्तवर्ष की तुलना में यह 10,000 करोड़ रुपये अधिक है। भारत निर्माण योजना में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, त्वरित सिंचाई योजना, राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना, इंदिरा आवास योजना, राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल योजना और ग्रामीण टेलीफोनी योजना शमिल है। मुखर्जी ने बजट पेश करते हुए कहा कि चालू वित्तवर्ष में देश का विकास तीव्र और व्यापक रहा है। अर्थव्यवस्था संकट से उभरकर विकास के पथ पर वापस आ गई है। कृषि क्षेत्र में फिर से वृद्धि दिखाई दी है और उद्योग जगत अपनी पूर्व तेजी पर लौट रहा है। सेवा क्षेत्र में दो अंक की वृद्धि हुई है तथा राजकोषीय मजबूती की दिशा में उठाये कदम प्रभावी रहे हैं। इससे निकट भविष्य में द्विअंकीय वृद्धि का मार्ग प्रशस्त होगा।


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