यह ख़बर 27 अप्रैल, 2012 को प्रकाशित हुई थी

निहित स्वार्थों ने एयर इंडिया को बनाया 'प्राण विहीन'

खास बातें

  • संसद की दो समितियों ने एयर इंडिया की खस्ता हालत को लेकर सरकार पर निशाना साधा है। इसमें से एक समिति ने कहा है कि ‘अनैतिक और निहित स्वार्थ’ ने सार्वजनिक क्षेत्र की विमानन कंपनी की ‘जान निकालने’ के लिए दिन-रात काम किया।
नई दिल्ली:

संसद की दो समितियों ने एयर इंडिया की खस्ता हालत को लेकर सरकार पर निशाना साधा है। इसमें से एक समिति ने कहा है कि ‘अनैतिक और निहित स्वार्थ’ ने सार्वजनिक क्षेत्र की विमानन कंपनी की ‘जान निकालने’ के लिए दिन-रात काम किया।

एयर इंडिया के समक्ष पैदा हुई नाजुक स्थिति पर चिंता जताते हुए अनुमानों पर गठित समिति ने कहा, ‘अनैतिक और निहित स्वार्थ ने इस सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम की जान निकालने के लिए दिन-रात काम किया।’

कांग्रेस सांसद फ्रैंसिस्को सरदिन्हा की अध्यक्षता वाली समिति ने अपनी रपट में कहा, ‘इसकी हालत खराब होने से रोकने में विफलता और कुछ नहीं बल्कि सरकार की ओर से पूरी तरह से बेरुखी थी।’

समिति ने कंपनी की वित्तीय हालत के लिए पूरी तरह से सरकार को जिम्मेदार ठहराया।

परिवहन, पर्यटन व संस्कृति पर संसद की स्थायी समिति ने कहा, ‘यह बेचैन करने वाली बात है कि एयर इंडिया 11वीं पंचवर्षीय योजना के दौरान आबंटित संपूर्ण राशि खर्च किए बगैर वित्तीय मदद मांगती रही है।’

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माकपा नेता सीतराम येचुरी की अध्यक्षता वाली समिति ने कहा, ‘समिति यह देखकर आश्चर्यचकित है कि जब सार्वजनिक क्षेत्र की विमानन कंपनी संकट से उबरने के लिए वित्तीय संस्थानों के दरवाजे खटखटा रही थी, उस समय, उसके पास 11वीं पंचवर्षीय योजना के दौरान आबंटित राशि पड़ी थी।’