दिलजीत दोसांझ की फिल्म 'सतलुज' को ओटीटी से हटाए जाने पर इन दिनों बवाल मचा हुआ है. हालांकि बॉलीवुड की ये पहली फिल्म नहीं है जिसे लेकर विवाद हुआ हो और उसे भारत में बैन किया गया है. 21 साल पहले भी एक फिल्म को लेकर बहुत बड़ा विवाद हुआ था. 2005 में रिलीज हुई इस फिल्म ने दुनियाभर में नाम कमाला. ऑस्कर में भी गई लेकिन भारत में फिल्म की रिलीज पर जमकर बवाल हुआ. रिलीज के बाद इसे हटा दिया गया और बैन कर दिया गया. हम बात कर रहे हैं दीपा मेहता की फिल्म 'वॉटर' की.
फिल्म में नंदिता दास, शबाना आजमी और अक्षय कुमार लीड रोल निभाने वाले थे. हालांकि बाद में अक्षय की जगह जॉन अब्राहम ने लीड रोल निभाया. शबाना और नंदिता ने वाराणसी की विधवाओं का किरदार निभाने के लिए अपने सिर मुंडवा लिए थे. लेकिन राइट-विंग प्रदर्शनकारियों की वजह से शूटिंग में रुकावट आई.
क्या थी फिल्म की कहानी?
2005 की फिल्म 'वॉटर' को लेकर जबरदस्त विवाद हुआ और हिंसक विरोध-प्रदर्शन हुए. 1930 के दशक में वाराणसी में विधवाओं के साथ होने वाले बुरे बर्ताव और उन्हें समाज से अलग-थलग रखने की कहानी पर बनी इस फिल्म को राइट-विंग समूहों ने निशाना बनाया. उनका आरोप था कि फिल्म की स्क्रिप्ट हिंदू धर्म का अपमान करती है और देश की छवि को नकारात्मक रूप में दिखाती है.
वाराणसी में जला दिया गया फिल्म का सेट
साल 2000 में, वाराणसी में प्रदर्शनकारियों ने गंगा किनारे बने फिल्म के मेन सेट को जला दिया, जिससे फिल्म की शूटिंग रोकनी पड़ी. डायरेक्टर को वहां शूटिंग पूरी तरह से बंद करनी पड़ी. इस रुकावट के बाद, फिल्म का काम चुपचाप दूसरी जगह ले जाया गया और इसकी शूटिंग श्रीलंका में पूरी की गई.
अक्षय कुमार होने वाले थे लीड हीरो
वैरायटी इंडिया के साथ बातचीत में दीपा ने बताया कि वॉटर फिल्म में पहले अक्षय कुमार, शबाना आजमी और नंदिता आजमी थे. लेकिन शूटिंग के दौरान हुए हंगामे के बाद फिल्म 3-4 साल तक रुकी रही. इसके बाद नई कास्ट के साथ फिल्म को श्रीलंका में शूट किया गया. इस फिल्म को भारत में बैन कर दिया गया और आज भी ये बैन है, इसे ओटीटी पर भी नहीं देखा जा सकता. हालांकि विदेशों में रिलीज हुई और काफी पसंद भी की गई.
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