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उदित नारायण का वो ब्लॉकबस्टर गाना, 20 बार रिजेक्ट, डायरेक्टर थे नाखुश, पत्नी ने कहा- गाने को छोड़ना होगी गलती

हर सुपरहिट गाने की किस्मत सुपरहिट नहीं होती. कुछ गाने रिलीज से पहले ही लोगों का दिल जीत लेते हैं, तो कुछ को अपनी पहचान बनाने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है.

उदित नारायण का वो ब्लॉकबस्टर गाना, 20 बार रिजेक्ट, डायरेक्टर थे नाखुश, पत्नी ने कहा- गाने को छोड़ना होगी गलती
उदित नारायण का गाना, उड़ जा काले कांवा खूब हुआ पॉपुलर
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नई दिल्ली:

उदित नारायण की आवाज ने 90 से 2000 के दशक में अपनी आवाज से फैंस के दिलों पर राज किया. लेकिन आज हम आपको हिंदी सिनेमा के एक ऐसे गाने की कहानी बताने जा रहे हैं, जिसकी धुन सुनकर खुद डायरेक्टर का चेहरा उतर गया था. उन्हें लगा था कि ये गाना फिल्म में बिल्कुल फिट नहीं बैठेगा. किसे पता था कि यही गाना आगे चलकर लाखों दिलों की धड़कन बन जाएगा और आज भी इसके बिना बॉलीवुड की सदाबहार प्लेलिस्ट अधूरी मानी जाएगी. वहीं प्लेबैक सिंगर उदित नारायण (Udit Narayan) की आवाज फैंस के दिलों पर छाप छोड़ जाएगी. हम बात कर रहे हैं साल 2001 में रिलीज हुई फिल्म 'गदर: एक प्रेम कथा' के आइकॉनिक गाने 'उड़ जा काले कांवां' की कहानी की. संगीतकार उत्तम सिंह इस फिल्म के लिए लगातार नई धुनों पर काम कर रहे थे. करीब डेढ़ महीने की मेहनत के बाद उन्होंने इस गाने की धुन तैयार की. उन्हें पूरा भरोसा था कि ये फिल्म का सबसे खास गाना बनेगा. लेकिन जब उन्होंने इसे डायरेक्टर अनिल शर्मा को सुनाया तो उनका रिएक्शन बिल्कुल उल्टा था.

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डायरेक्टर को बिल्कुल पसंद नहीं आई धुन

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अनिल शर्मा ने इस धुन को पहली बार सुनते ही पसंद नहीं किया. बताया जाता है कि करीब 20 बार इस धुन पर बदलाव किए गए, लेकिन डायरेक्टर फिर भी सेटिस्फाइड नहीं थे. उन्हें लगता था कि इसमें वो असर नहीं है, जिसकी फिल्म को जरूरत है. ऐसे में लगने लगा था कि शायद इस धुन का इस्तेमाल ही नहीं होगा.

पत्नी की एक सलाह ने बदल दी पूरी कहानी

धुन भले ही रिजेक्ट हो रही थी, लेकिन अनिल शर्मा उसे पूरी तरह भूल नहीं पाए. उन्होंने घर जाकर वही धुन अपनी पत्नी को सुनाई. संगीत की अच्छी समझ रखने वाली उनकी पत्नी ने तुरंत कहा कि इस गाने को छोड़ना बड़ी गलती होगी. उन्होंने भरोसा जताया कि सही तरीके से तैयार होने पर यही गाना लोगों के दिल जीत लेगा. पत्नी की बात सुनकर अनिल शर्मा ने इसे एक और मौका देने का फैसला किया.

यहीं से पलटी गाने की किस्मत

कहते हैं किसी भी गाने की जान सिर्फ उसकी धुन नहीं, बल्कि उसके बोल भी होते हैं. 'उड़ जा काले कांवां' के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ. शुरुआत में सिर्फ धुन सुनकर किसी को भरोसा नहीं था, लेकिन जब उस पर आनंद बख्शी के लिखे बोल जुड़े, तो वही धुन जादू बन गई. इसके बाद किसी ने पीछे मुड़कर नहीं देखा. इसके बाद उदित नारायण और अलका याज्ञनिक की आवाज में गाना रिकॉर्ड हुआ. रिलीज होते ही ये गाना लोगों की जुबान पर चढ़ गया और फिल्म की सबसे बड़ी पहचान बन गया.

आज भी लोगों की प्लेलिस्ट में शामिल है ये गाना

'उड़ जा काले कांवां' सिर्फ उस दौर का सुपरहिट गाना नहीं बना, बल्कि आज भी इसे बॉलीवुड के सबसे यादगार रोमांटिक गीतों में गिना जाता है. यही वजह रही कि 'गदर 2' में भी इस गाने को नए अंदाज में फिर से शामिल किया गया. जिस धुन को कभी बार-बार रिजेक्ट किया गया था, उसी ने आगे चलकर इतिहास रच दिया और साबित कर दिया कि असली हीरे की पहचान कई बार देर से होती है.

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