हिंदी सिनेमा में 44 साल पहले रिलीज हुई बासु चटर्जी की कॉमेडी फिल्म 'शौकीन' आज भी अपनी अनोखी कहानी और यादगार गानों के लिए याद की जाती है. फिल्म में तीन बुजुर्ग दोस्त उत्पल दत्त (उस समय 53 साल), ए.के. हंगल (68 साल) और अशोक कुमार (71 साल) और हीरोइन रति अग्निहोत्री (22 साल) की जोड़ी ने दर्शकों को खूब हंसाया था. इस फिल्म में मिथुन चक्रवर्ती भी थे. इसको जितनी बार देखो उतना ही कम है. ये कल्ट क्लासिक फिल्मों में गिनी जाती है.
इस फिल्म का गाना 'जब भी कोई कंगना बोले' किशोर कुमार की आवाज में आज भी उतना ही ताजा लगता है और ये हिंदी गीतों की दुनिया में खास महत्व भी रखता है.
44 पुरानी अतरंगी फिल्म है शौकीन
बासु चटर्जी की 'शौकीन' 16 अप्रैल 1982 को रिलीज हुई थी. यह समरेश बसु की कहानी 'राम नाम केवलम' पर आधारित है और अमेरिकी फिल्म बॉयज नाइट आउट से भी इंस्पायर्ड मानी जाती है. फिल्म में अशोक कुमार ओम प्रकाश चौधरी, उत्पल दत्त जगदीशभाई और ए.के. हंगल इंद्रसेन (एंडरसन) के किरदार में हैं. तीनों बुजुर्ग दोस्त अपनी उम्र भूलकर पुराने दिनों को जीना चाहते हगैं. जब अशोक कुमार की पत्नी तीर्थ यात्रा पर जाती है तो तीनों गोवा की सैर पर निकल पड़ते हैं. मिथुन चक्रवर्ती उनके ड्राइवर के रोल में नजर आते हैं, जिसकी प्रेमिका है रति अग्निहोत्री. जो गोवा के एक क्लब में गाती है. तीनों बुजुर्ग उस पर फिदा हो जाते हैं और उसके बाद जो हंसी का छौंक लगता है, वो बेजोड़ है. एकदम बासु चटर्जी स्टाइल.
ऐसे तैयार हुआ शौकीन का यादगार गाना 'जब भी कोई कंगना बोले'
फिल्म का म्यूजिक आर.डी. बर्मन का है और गीत योगेश ने लिखे. फिल्म के सबसे लोकप्रिय सॉन्ग 'जब भी कोई कंगना बोले, पायल छनक जाए' किशोर कुमार ने गाया है. दिलचस्प यह है कि बासु चटर्जी को एस.डी. बर्मन का पुराना गाना बहुत पसंद था, इसलिए उन्होंने आर.डी. बर्मन से इसी धुन पर यह गाना बनाने को कहा था. अन्य गानों में आशा भोसले का 'ये रंगे महफिल', सुरेश वाडकर का 'आ वहीं चल मेरे दिल' और अशोक कुमार का खुद गाया 'चलो हसीन गीत एक बनाएं' शामिल हैं.
शौकीन का 12 साल पहले बना है रीमेक
फिल्म ने अपनी हल्की-फुल्की कॉमेडी, बेहतरीन अभिनय और आर.डी. बर्मन के म्यूजिक से दर्शकों का दिल जीत लिया. अशोक कुमार को फिल्मफेयर अवॉर्ड में बेस्ट कॉमेडियन के लिए नॉमिनेट भी किया गया था. फिल्म की खासियत यह थी कि उम्रदराज कलाकारों और युवा हीरोइन के बीच का कॉन्ट्रास्ट कॉमेडी का मुख्य आधार बना. शौकीन सिर्फ एक कॉमेडी फिल्म नहीं, बल्कि दोस्ती, उम्र और छोटी-छोटी खुशियों की कहानी है जो 44 बाद भी प्रासंगिक लगती है. 2014 में इसका रीमेक द शौकीन्स भी आया, लेकिन ओरिजिनल फिल्म और उसका गाना आज भी बेजोड़ है.
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