सिल्क स्मिता का असली नाम विजयालक्ष्मी वाडलापति था. वह 1980 के दशक की मशहूर अभिनेत्री थीं, जिन्होंने साउथ सिनेमा में काम किया. 2 दिसंबर 1960 को आंध्र प्रदेश के एलूरू के पास एक गरीब परिवार में जन्मी सिल्क ने केवल चौथी कक्षा तक ही पढ़ाई की. महज 14-15 साल की उम्र में उनकी शादी हो गई, लेकिन घरेलू हिंसा और प्रताड़ना से परेशान होकर वह घर से भागकर चेन्नई आ गईं. चेन्नई में उन्होंने पहले एक मेकअप आर्टिस्ट और हेल्पर के रूप में काम किया, जिसके बाद उन्हें फिल्मों में छोटे-मोटे रोल मिलने लगे.
उन्हें पहली बार 1979 की तमिल फिल्म 'वंदीचक्करम' (Vandichakkaram) में 'सिल्क' नाम की एक शराब बेचने वाली लड़की का रोल मिला. यह फिल्म सुपरहिट रही और वह सिल्क स्मिता के नाम से मशहूर हो गईं. अपने 17-18 साल के करियर में उन्होंने तमिल, तेलुगू, मलयालम, कन्नड़ और हिंदी की लगभग 450 से अधिक फिल्मों में अभिनय किया. उन्हें इंडस्ट्री में एक सेक्स सिंबल और ग्लैमर आइकन के रूप में पेश किया गया. एक दौर ऐसा था, जब उनकी लोकप्रियता का आलम यह था कि फिल्मों की सफलता की गारंटी सिर्फ उनका एक गाना माना जाता था. हालांकि कम उम्र में ही इस एक्ट्रेस का निधन हो गया. बाद में उनके जीवन पर फिल्म बनी. फैंस आज भी सिल्क के बारे में जानने के लिए उत्सुक रहते हैं.
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सिल्क स्मिता की आखिरी कॉल
मौत से एक रात पहले वह क्या कहना चाहती थीं? यह एक ऐसा सवाल है, जिसके बारे में आज भी उनके फ्रेंड्स और फैंस जानना चाहते हैं. सिल्क स्मिता 35 साल की थीं जब वह चेन्नई स्थित अपने घर में मृत पाई गईं.
सिल्क स्मिता बात करना चाहती थीं
22 सितंबर, 1996 की रात, उन्होंने एक्ट्रेस अनुराधा को फोन किया और उन्हें अपने पास बुलाया. वह किसी जरूरी बात पर चर्चा करना चाहती थीं. अनुराधा उस शाम नहीं आ सकीं. वे अगले दिन मिलने वाली थीं. स्मिता ने एक्टर रविचंद्रन से भी संपर्क करने की कोशिश की. वह शूटिंग कर रहे थे और खराब कनेक्टिविटी की वजह से वे बात नहीं कर पाए. सुबह तक यह खबर उन दोनों तक पहुंच गई. वे बातचीत अधूरी ही रह गईं.
स्मिता ने अपने लगभग 18 साल के करियर में 450 से ज्यादा फिल्मों में काम किया. खासकर उनके डांस नंबर हिट थे. कहा जाता है कि जब फ़िल्मों को खरीदार नहीं मिलते थे, तो प्रोड्यूसर उनके पास जाते थे. सिर्फ उनके फिल्म में होने से ही फिल्म की मार्केट वैल्यू बढ़ जाती थी. लेकिन सफलता के साथ उन्हें मिलने वाले रोल सीमित हो गए. कैबरे डांसर, वैम्प, ऐसी महिला जिसके आते ही सीन का माहौल बदल जाता था.इंडस्ट्री उनसे बार-बार वही चीजें करवाती रही, जिनके बारे में उन्हें पहले से पता था कि वे बिकेंगी.
बालू महेंद्र की फिल्म 'मूंद्रम पिराई' और बाद में उसके हिंदी रीमेक 'सदमा' में उनके काम ने एक ऐसी एक्ट्रेस की झलक दिखाई, जिसमें अपनी बनी-बनाई इमेज से कहीं ज्यादा कुछ करने की क्षमता थी. दोनों फिल्मों में श्रीदेवी और कमल हासन थे और स्मिता ने रीमेक में भी अपना रोल दोबारा निभाया था. फिर भी, उस जानी-पहचानी इमेज से बाहर निकलने के मौके कम ही थे. उनकी लोकप्रियता बहुत ज्यादा थी, लेकिन खुद को अपनी मर्जी से पेश करने की आजादी बहुत कम थी.
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फिर फोन कॉल्स आए
अनुराधा ने बाद में बताया कि स्मिता 22 सितंबर को किसी गंभीर विषय पर बात करना चाहती थीं. उन्हें उम्मीद थी कि अगले दिन उनसे मुलाकात होगी. वहीं रविचंद्रन ने याद करते हुए बताया कि उनसे संपर्क करने की कई बार कोशिश की गई थी. "मैं उस दिन शूटिंग में व्यस्त था और यह देखकर हैरान रह गया कि स्मिता ने मुझसे संपर्क करने की कई बार कोशिश की थी." उन्होंने उनसे बात करने की कोशिश की, लेकिन कनेक्शन नहीं हो पाया. "मुझे लगा कि यह एक आम कॉल है, लेकिन अगले दिन, मुझे यह जानकर गहरा सदमा लगा कि स्मिता ने आत्महत्या कर ली है." वह हमेशा सोचते रहे कि वह उनसे क्या कहना चाहती थीं. दोनों दोस्तों में से किसी को भी अंदाज़ा नहीं था कि अगली सुबह क्या होने वाला है.
उनके घर पर मिला सुसाइड नोट
उनके घर से मिले एक नोट से उनकी परेशानी का एक और पहलू सामने आया, लेकिन इसके बारे में अलग-अलग बातें कही गईं. कुछ रिपोर्टों में कहा गया कि कुछ हिस्सों को पढ़ा नहीं जा सका. सालों से चल रहे अनुवादों ने इसके सटीक शब्दों के बारे में और भी अनिश्चितता पैदा कर दी है. उन रिपोर्ट में स्मिता ने एक्ट्रेस बनने के लिए की गई कड़ी मेहनत और इस बात का जिक्र किया कि लोगों ने उनका फायदा उठाया है. उन्होंने अकेलेपन, टूटे हुए वादों और एक ऐसे भविष्य के बारे में बात की, जिसका इंतजार वह सालों से किसी के साथ बिताने के लिए कर रही थीं.
कहा जाता है कि पत्र में डॉ. राधाकृष्णन का जिक्र था, जिन्हें वह "बाबू" कहती थीं. इसमें प्यार और उसके बाद कथित धोखे का जिक्र था. पत्र में गहनों, संपत्ति और साथ जिंदगी बिताने के वादों का जिक्र था. ये बातें उस कथित पत्र के आधार पर लगाए गए आरोप हैं, न कि कुछ साबित हुआ. स्मिता की मौत को आत्महत्या माना गया. समय के साथ, उनके रिश्तों और पैसों के मामलों को लेकर कई तरह की बातें होने लगीं, जिनमें उनकी हत्या की आशंका भी शामिल थी. इन बातों को साबित करने के लिए कोई पक्का सबूत नहीं मिला.
सिनेमा के जरिए याद की गईं सिल्क
सालों बाद, सिनेमा उस महिला की कहानी लेकर आया, जिसे उसने एक 'तमाशा' बना दिया था. विद्या बालन की 2011 की फिल्म 'द डर्टी पिक्चर' की तुलना स्मिता की जिंदगी और उनकी स्क्रीन इमेज से की गई. प्रोड्यूसर एकता कपूर का कहना था कि यह फिल्म आधिकारिक तौर पर उन पर आधारित नहीं थी. स्मिता के परिवार ने फिल्म में दिखाए गए उनके किरदार पर आपत्ति जताई. इसके बाद और भी फिल्में आईं, जिनमें कन्नड़ फिल्म 'डर्टी पिक्चर: सिल्क सक्कथ हॉट' और मलयालम फिल्म 'क्लाइमैक्स' शामिल थीं.
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