आज के दौर में किसी भी गाने की रिकॉर्डिंग हाईटेक स्टूडियो और आधुनिक तकनीक की मदद से कुछ ही घंटों में पूरी हो जाती है. लेकिन हिंदी सिनेमा का एक दौर ऐसा भी था, जब तकनीक की सीमाओं के बीच संगीतकार अपनी सोच को साकार करने के लिए नए-नए प्रयोग करते थे. साल 1960 में रिलीज हुई फिल्म ‘मुगल-ए-आजम' का मशहूर गीत ‘जब प्यार किया तो डरना क्या' इसका सबसे बड़ा उदाहरण है. इस गाने ने न सिर्फ अपने बोल और संगीत से लोगों का दिल जीता, बल्कि इसकी रिकॉर्डिंग से जुड़ा किस्सा भी आज तक लोगों को हैरान करता है. बहुत कम लोग जानते हैं कि यह गाना किसी रिकॉर्डिंग स्टूडियो में नहीं, बल्कि एक बाथरूम में रिकॉर्ड किया गया था. इसके पीछे की वजह उस समय की तकनीक और संगीतकार नौशाद की परफेक्शन थी.
इको इफेक्ट के लिए अपनाया गया अनोखा तरीका
‘जब प्यार किया तो डरना क्या' में संगीतकार नौशाद एक खास तरह का इको (गूंज) चाहते थे, जिससे गाना शाही महल में गाए जाने जैसा महसूस हो. लेकिन उस समय रिकॉर्डिंग स्टूडियो में ऐसा इफेक्ट देने वाली आधुनिक तकनीक मौजूद नहीं थी. ऐसे में उन्होंने बाथरूम को रिकॉर्डिंग की जगह बनाया, क्योंकि वहां आवाज़ स्वाभाविक रूप से गूंजती थी. गायिका लता मंगेशकर ने वहीं इस गीत को रिकॉर्ड किया और यही प्राकृतिक इको इस गाने की सबसे बड़ी पहचान बन गया.
दो साल में तैयार हुआ था शीशमहल का सेट
इस गाने की भव्यता पर्दे पर भी साफ दिखाई देती है. निर्देशक के. आसिफ ने इसके फिल्मांकन के लिए लाहौर के मशहूर शीशमहल से प्रेरित एक विशाल सेट बनवाया था. बताया जाता है कि इसे तैयार करने में करीब दो साल लगे और हजारों शीशों का इस्तेमाल किया गया. उस दौर में इस सेट पर लगभग 15 लाख रुपये खर्च हुए थे, जबकि इतनी रकम में उस समय पूरी फिल्म बन जाती थी. आज की कीमत के हिसाब से यह रकम कई करोड़ रुपये के बराबर मानी जाती है. इसी भव्य सेट पर मधुबाला ने अनारकली बनकर अपने करियर का सबसे यादगार प्रदर्शन दिया.
आज भी लोगों की जुबान पर है यह गीत
गीतकार शकील बदायूंनी के लिखे बोल और नौशाद के संगीत ने ‘जब प्यार किया तो डरना क्या' को हिंदी सिनेमा के सबसे अमर गीतों में शामिल कर दिया. फिल्म में यह गाना उस दृश्य पर फिल्माया गया है, जहां अनारकली बादशाह अकबर के दरबार में सलीम के लिए अपने प्यार का खुलकर इजहार करती है. मधुबाला, दिलीप कुमार और पृथ्वीराज कपूर के दमदार अभिनय ने इस दृश्य को और भी खास बना दिया. रिलीज के 65 साल बाद भी यह गीत संगीत प्रेमियों की पसंद बना हुआ है और भारतीय सिनेमा के इतिहास के सबसे पॉपुलर गानों में गिना जाता है.
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