हिंदी सिनेमा में परिवार, रिश्तों और त्योहारों पर कई यादगार गाने बने हैं, लेकिन कुछ गीत ऐसे होते हैं जो हर पीढ़ी के साथ आगे बढ़ते रहते हैं. शादी हो, जन्माष्टमी का उत्सव हो या फिर घर में कोई पारिवारिक कार्यक्रम, कुछ गाने अपने आप बजने लगते हैं. इन गीतों की सबसे बड़ी खासियत यह होती है कि इनमें सिर्फ मधुर धुन ही नहीं, बल्कि अपनापन और भारतीय परिवारों की झलक भी दिखाई देती है. ऐसा ही एक गीत करीब तीन दशक बाद भी लोगों की पहली पसंद बना हुआ है. यह गीत है 'मैय्या यशोदा ये तेरा कन्हैया', जिसने रिलीज होते ही हर घर में अपनी जगह बना ली थी.
तीन हीरोइनें बनीं राधा, तीन गायिकाओं ने दी आवाज
1999 में रिलीज हुई 'हम साथ-साथ हैं' का यह गीत उस दौर के सबसे खास फिल्मी गीतों में गिना जाता है. पर्दे पर तब्बू, करिश्मा कपूर और सोनाली बेंद्रे राधा के रूप में नजर आई थीं, जबकि उनकी आवाज बनीं तीन दिग्गज गायिकाएं अलका याज्ञनिक, अनुराधा पौडवाल और कविता कृष्णमूर्ति. एक ही गीत में इन तीनों की आवाज का संगम उस समय भी खास माना गया था और आज भी यही इसकी सबसे बड़ी पहचान है.
परिवारों की पहली पसंद बन गया था यह गीत
'मैय्या यशोदा ये तेरा कन्हैया' सिर्फ फिल्म का हिस्सा बनकर नहीं रह गया. जन्माष्टमी के कार्यक्रमों, स्कूलों की प्रस्तुतियों, सांस्कृतिक आयोजनों और पारिवारिक समारोहों में यह गीत सालों से लगातार सुनाई देता है. इसकी धुन, बोल और स्क्रीन पर दिखने वाला पारिवारिक माहौल इसे हर उम्र के लोगों से जोड़ देता है. इस गीत के बोल देव कोहली ने लिखे थे, जबकि संगीत राम लक्ष्मण ने तैयार किया था. सूरज बड़जात्या की फिल्मों की तरह इस गीत में भी भारतीय परिवार, रिश्ते और त्योहारों की गर्माहट साफ महसूस होती है. यही वजह है कि यह गाना सिर्फ सुनने के लिए नहीं, बल्कि हर उत्सव का हिस्सा बन गया.
आज भी बालकृष्ण से जुड़ा कोई भी प्रसंग हो, ये गीत हर प्लेलिस्ट में जगह बना लेता है. सोशल मीडिया रील्स से लेकर स्कूल डांस और मंदिरों के कार्यक्रमों तक इसकी लोकप्रियता बरकरार है. शायद यही वजह है कि 27 साल बाद भी 'मैय्या यशोदा ये तेरा कन्हैया' हिंदी सिनेमा के सबसे पसंदीदा पारिवारिक और भक्ति-भाव वाले गीतों में गिना जाता है.
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