1969 में रिलीज हुआ 'रूप तेरा मस्ताना' आज भी हिंदी सिनेमा के सबसे यादगार रोमांटिक गीतों में गिना जाता है. फिल्म आराधना का यह गाना आज भी उतना ही लोकप्रिय है, जितना 56 साल पहले था. लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि इस सुपरहिट गीत की पहली धुन बिल्कुल अलग थी. अगर उस दिन किशोर कुमार ने एस.डी. बर्मन को उनकी ही एक पुरानी धुन याद न दिलाई होती, तो शायद 'रूप तेरा मस्ताना' कभी उस अंदाज में बन ही नहीं पाता, जिसे आज पूरी दुनिया जानती है.
किशोर कुमार ने सचिन दा को याद दिलाई उनकी ही एक पुरानी बंगाली धुन
यह दिलचस्प किस्सा खुद किशोर कुमार के बेटे अमित कुमार ने एक कार्यक्रम में सुनाया. एस.डी. बर्मन ने शुरुआत में इस गाने की धुन भाटियाली लोक शैली से प्रेरित होकर तैयार की थी. जब वह धुन सुनाई गई, तो निर्देशक शक्ति सामंत और फिल्म से जुड़े लोगों को लगा कि इसमें वह रोमांटिक और वेस्टर्न फील नहीं आ रही, जिसकी उन्हें तलाश थी. लेकिन एसडी बर्मन इसे बदलने को तैयार नहीं थे. इसी दौरान किशोर कुमार को अचानक एस.डी. बर्मन की कई साल पुरानी एक बंगाली धुन याद आ गई. उन्होंने वहीं सचिन दा से कहा कि पहले उस धुन को एक बार याद कीजिए. इसके बाद किशोर कुमार ने वह पुरानी धुन गुनगुनाई.
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ऐसे बना रूप तेरा मस्ताना
जैसे ही किशोर कुमार ने वह धुन सुनाई, एस.डी. बर्मन को भी अपनी पुरानी कम्पोजिशन याद आ गई. उन्हें यह आइडिया इतना पसंद आया कि उसी धुन को आधार बनाकर आगे काम शुरू हुआ. बाद में आनंद बख्शी ने उस पर 'रूप तेरा मस्ताना' के बोल लिखे और किशोर कुमार की आवाज ने उसे हमेशा के लिए यादगार बना दिया.
रूप तेरा मस्ताना प्यार मेरा दीवानारूप तेरा मस्ताना प्यार मेरा दीवानाभूल कोई हमसे न हो जायेरूप तेरा मस्ताना प्यार मेरा दीवानाभूल कोई हमसे न हो जाये
रात नशीली मस्त समां हैआज नशे में सारा जहाँ हैरात नशीली मस्त समां हैआज नशे में सारा जहाँ हैहाय शराबी मौसम बहकाएरूप तेरा मस्ताना प्यार मेरा दीवानाभूल कोई हमसे न हो जाये
चल तुझे मछली खिलाता हूं
गाना फाइनल होने के बाद एस.डी. बर्मन इतने खुश हुए कि उन्होंने किशोर कुमार से कहा, "चल, पवई लेक मछली पकड़ने चलते हैं, तुझे मछली खिलाता हूं." कई बार किसी गाने की असली कहानी उसकी रिकॉर्डिंग से ज्यादा दिलचस्प होती है. 'रूप तेरा मस्ताना' का यह किस्सा भी उन्हीं कहानियों में से एक है, जिसने एक अच्छी धुन को हमेशा के लिए यादगार बना दिया.
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