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30 साल पुराना वो गाना, जिससे मुश्किल में आ गई थी गोविंदा की जान, जारी हुआ था वारंट 23 साल तक चला केस, अलका-उदित की जुगलबंदी ने बनाया सुपरहिट

एक सुपरहिट गाने के कुछ बोलों ने ऐसा विवाद खड़ा किया कि गोविंदा और शिल्पा शेट्टी को वर्षों तक कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ी. 1997 में शुरू हुआ यह मामला करीब 23 साल तक चला, जिसके बाद दोनों कलाकारों को अदालत से राहत मिली.

30 साल पुराना वो गाना, जिससे मुश्किल में आ गई थी गोविंदा की जान, जारी हुआ था वारंट 23 साल तक चला केस, अलका-उदित की जुगलबंदी ने बनाया सुपरहिट
गोविंदा-शिल्पा का यह गाना 30 साल बाद भी है हिट

गोविंदा को 90 के दशक का ऐसा स्टार कहा जाता है, जिसने अपनी कॉमेडी, डांस और जबरदस्त स्क्रीन प्रेजेंस से दर्शकों के दिलों पर राज किया. उनकी फिल्मों के कई गाने आज भी लोगों को याद हैं, लेकिन एक गाना ऐसा भी था जो लोकप्रिय होने के साथ-साथ उनके लिए कानूनी परेशानी की वजह बन गया. फिल्म थी ‘छोटे सरकार' और गाना था ‘एक चुम्मा तू मुझको उधार दे दे'. 1996 में रिलीज हुए इस गाने के बोलों पर आपत्ति जताते हुए अगले ही साल झारखंड के पाकुड़ में मामला दर्ज कराया गया. इसके बाद गोविंदा और शिल्पा शेट्टी को लंबे समय तक कानूनी प्रक्रिया का सामना करना पड़ा. 

गाने के बोलों पर क्यों उठे सवाल?

‘एक चुम्मा तू मुझको उधार दे दे' उस दौर के लोकप्रिय डांस नंबर्स में शामिल था. गाने में गोविंदा और शिल्पा शेट्टी की जोड़ी नजर आई थी और इसे उदित नारायण और अलका याग्निक ने आवाज दी थी. इसके संगीतकार आनंद-मिलिंद और गीतकार रानी मलिक थीं. गाना 1996 में ‘छोटे सरकार' के एल्बम का हिस्सा बना था. 

विवाद की असली वजह गाने के वे बोल बने, जिनमें एक चुम्मे के बदले UP और बिहार लेने की बात कही गई थी. शिकायतकर्ता ने इसे इन दोनों राज्यों के लोगों के लिए अपमानजनक और आपत्तिजनक बताया. साथ ही गाने को अश्लील और सार्वजनिक रूप से आपत्तिजनक भी बताया गया. इसी आधार पर गोविंदा और शिल्पा शेट्टी के खिलाफ कानूनी शिकायत पहुंची. 

1997 में शुरू हुआ मामला

इस विवाद ने जल्द ही गंभीर कानूनी रूप ले लिया. 1997 में पाकुड़ जिले में एक वकील ने गोविंदा, शिल्पा शेट्टी और फिल्म से जुड़े अन्य लोगों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई. उस समय पाकुड़ बिहार का हिस्सा था, जबकि अब यह झारखंड में है. शिकायत में भारतीय दंड संहिता की धारा 294 और मानहानि से जुड़ी धाराओं का भी हवाला दिया गया था. 

मामला यहीं नहीं रुका. 2001 में स्थानीय अदालत ने गोविंदा और शिल्पा शेट्टी के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी कर दिया. बाद में फिल्म के निर्देशक विमल कुमार, गायक उदित नारायण और अलका याग्निक, संगीतकार जोड़ी आनंद-मिलिंद और गीतकार रानी मलिक के नाम भी इस कानूनी विवाद में सामने आए. गोविंदा ने अपनी तरफ से यह तर्क दिया कि उनका किसी राज्य या वहां के लोगों को बदनाम करने का इरादा नहीं था और फिल्म को सेंसर बोर्ड से मंजूरी मिली थी. 

23 साल बाद मिली राहत

कई साल तक मामला अदालत में चलता रहा और बीच-बीच में गोविंदा को कानूनी राहत भी लेनी पड़ी. 2017 में बॉम्बे हाई कोर्ट ने उन्हें गिरफ्तारी से अंतरिम सुरक्षा देते हुए ट्रांजिट बेल दी थी. उस समय अदालत में यह मामला करीब दो दशक पुराना हो चुका था. 

आखिरकार 2019 में हाई कोर्ट ने गोविंदा और शिल्पा शेट्टी को बड़ी राहत दी. अदालत ने फिल्म के सेंसर बोर्ड से प्रमाणित होने के तथ्य को अहम माना. रिपोर्ट्स के अनुसार, फिल्म को Cinematography Act, 1952 के तहत सेंसर बोर्ड की मंजूरी मिली थी. इसके आधार पर दोनों कलाकारों के खिलाफ चल रही कार्यवाही में उन्हें राहत मिली और करीब 23 साल से चले आ रहे इस विवाद का अंत हुआ. 

इस तरह 90 के दशक का एक मजेदार और बेहद चर्चित डांस नंबर गोविंदा के करियर की उन घटनाओं में शामिल हो गया, जिसकी वजह से उन्हें पर्दे से बाहर भी लंबे समय तक कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ी.

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