आज हम जिस सिंगर की बात कर रहे हैं, वो 90 के दशक में आशिकों के दिलों पर राज करते थे. दिलचस्प बात ये है कि इस सिंगर ने फिल्मों के गाने तो कम ही गाए लेकिन इनके म्यूजिक एल्बम इतने बड़े हिट रहे कि उन गानों ने फिल्मों के गानों को भी पीछे छोड़ दिया. इस सिंगर ने कव्वाली को मॉर्डर टच दिया और इसे हर घर में पहुंचाया. इनका हटके स्टाइल ही इन्हें अलग बनाता है. इस सिंगर का एक गाना 90 के दशक का सबसे बड़ा गैर फिल्मी ब्लॉकबस्टर बना. हम बात कर रहे हैं अल्ताफ राजा के सुपरहिट सॉन्ग ‘तुम तो ठहरे परदेसी, साथ क्या निभाओगे' की.
ये गाना 1997 में रिलीज हुआ था जो इसी नाम के एल्बम का हिस्सा था. लेकिन गाने ने ऐसा जादू किया कि ये उस दौर का न सिर्फ सबसे पॉपुलर गाना बना गया बल्कि इसने वर्ल्ड रिकॉर्ड भी बनाया. उस दौर में चाहे बस हो या टैक्सी या चाय की दुकान ये गाना जरूर सुनाई देता था. गाने में जनवरी से लेकर दिसंबर तक हर महीने का जिक्र किया गया है, वो भी इस अंदाज में जो कभी भूला नहीं जा सकता.
गाने ने बनाया वर्ल्ड रिकॉर्ड
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस गाने की एक ही दिन में 70 लाख (7 मिलियन) कॉपियां बिकने का रिकॉर्ड है, जो अपने आप में एक इतिहास था. अल्ताफ राजा अपनी इस एल्बम में इस गाने को नहीं जोड़ना चाहते थे, लेकिन अपनी मां के कहने पर उन्होंने इसे शामिल किया और यह न सिर्फ उस एल्बम की पहचान बना बल्कि खुद अल्ताफ राजा को भी इसी गाने से पहचान दी. आज भी उन्हें तुम तो ठहरे परदेसी के सिंगर के तौर पर पहचाना जाता है.
खुद कैसेट बेचते थे अल्ताफ राजा
शुरुआती दिनों में अल्ताफ राजा अपने स्टेज शो के दौरान खुद इस गाने की कैसेट का डिब्बा साथ लेकर चलते थे और लोगों के बीच बेचते थे. एल्बम 'तुम तो ठहरे परदेसी' रिलीज होते ही रातों-रात देश भर में ब्लॉकबस्टर बन गया. गानों में उर्दू शायरी और अल्ताफ राजा का अलग ही अंदाज उनकी पहचान बन गया. गाने में जिस तरह 12 महीनों के नाम लिए गए हैं वो भी कमाल है. एल्बम्स के अलावा अल्ताफ राजा ने 'शपथ', 'कंपनी' और 'तमाशा' जैसी फिल्मों के लिए भी गाने गाए हैं.
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