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ऋतिक रोशन, शाहिद कपूर, कंगना रनौत और अक्षय कुमार वाली गलती करने जा रहे सनी देओल, लिया ये फैसला

हिंदी सिनेमा का ट्रैक रिकॉर्ड बताता है कि एयरफोर्स बैकग्राउंड वाली फिल्मों को वैसी जबरदस्त सफलता नहीं मिल पाती, जो जमीन पर लड़ी गई जंग की कहानियों को मिली है. हाल के सालों में कई बड़े सितारों ने वायुसेना के बैकग्राउंड पर फिल्में की हैं.

ऋतिक रोशन, शाहिद कपूर, कंगना रनौत और अक्षय कुमार वाली गलती करने जा रहे सनी देओल, लिया ये फैसला
सनी देओल करने जा रहे वही बड़ी गलती!

देशभक्ति और वॉर फिल्मों की बात हो और सनी देओल का नाम न आए, ऐसा मुश्किल है. ‘बॉर्डर' जैसी फिल्म ने उन्हें इस जॉनर का मजबूत चेहरा बना दिया था. अब चर्चा है कि जल्द ही ‘बॉर्डर 3' का ऐलान किया जा सकता है. इस बार कहानी भारतीय वायु सेना के इर्द-गिर्द घूमेगी और सनी देओल ही लीड रोल में होंगे. बॉर्डर-3 को एयरफोर्स के बैकग्राउंड में होने की चर्चा ने इस प्रोजेक्ट को दिलचस्प बना दिया है. इसके साथ ही इसे काफी जोखिम भरा कदम भी माना जा रहा है. दरअसल, हिंदी सिनेमा का ट्रैक रिकॉर्ड बताता है कि एयरफोर्स बैकग्राउंड वाली फिल्मों को वैसी जबरदस्त सफलता नहीं मिल पाती, जो जमीन पर लड़ी गई जंग की कहानियों को मिली है.

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एयरफोर्स के बैकग्राउंड वाली फाइटर, तेजस और स्काई फोर्स हुई थीं फ्लॉप

हाल के सालों में कई बड़े सितारों ने वायुसेना के बैकग्राउंड पर फिल्में कीं, लेकिन नतीजे उम्मीद के मुताबिक नहीं रहे. ऋतिक रोशन की ‘फाइटर' बड़े पैमाने पर रिलीज हुई, लेकिन यह बुरी तरह से फ्लॉप रही थी. वहीं बात की जाए अक्षय कुमार की ‘स्काई फोर्स' भी बॉक्स ऑफिस पर कुछ खास कमाल नहीं कर पाई थी. कंगना रनौत की ‘तेजस' बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप रही, जबकि शाहिद कपूर की मौसम भी अपने अच्छे सब्जेक्ट के बावजूद दर्शकों को खास प्रभावित नहीं कर पाई. गुंजन सक्सेना: द कारगिल गर्ल भी ज्यादा सफलता नहीं हासिल कर सकी.

एयरफोर्स बैकड्राप पर बनी इन फिल्मों की तुलना अगर बड़ी वॉर हिट्स से की जाए तो अंतर साफ दिखता है. बॉर्डर, उरी: द सर्जिकल स्ट्राइक, शेरशाह, एलओसी कारगिल और लक्ष्य जैसी फिल्मों ने जिस तरह का इमोशनल कनेक्ट और पहचान बनाई, उस स्तर तक एयरफोर्स बैकड्रॉप वाली फिल्में अब तक नहीं पहुंच सकीं.

यह पैटर्न सिर्फ एयरफोर्स तक सीमित नहीं है. ‘द गाजी अटैक' जैसी नेवी बैकड्रॉप पर बनी फिल्म को क्रिटिक्स ने काफी सराहा और इसकी मेकिंग की तारीफ भी हुई, लेकिन बॉक्स ऑफिस पर यह वैसा धमाका नहीं कर पाई, जैसा बड़े वॉर ब्लॉकबस्टर्स से उम्मीद की जाती है. यह उदाहरण बताता है कि कंटेंट मजबूत होने के बावजूद वॉर जॉनर में सफलता का फॉर्मूला हर बार काम नहीं करता.

‘बॉर्डर 3' के सामने असली चुनौती

‘बॉर्डर' फ्रेंचाइजी की पहचान हमेशा जमीनी जंग और सैनिकों की भावनाओं से रही है. एयरफोर्स पर आधारित फिल्मों की सबसे बड़ी चुनौती उनका स्केल होता है. फाइटर जेट्स, हवाई एक्शन और उड़ानों के सीक्वेंस तैयार करना टेक्नीकली मुश्किल होने के साथ-साथ काफी महंगा भी पड़ता है. स्क्रीन पर यह शानदार जरूर दिखता है, लेकिन कई बार कहानी उस स्तर का इमोशनल कनेक्ट नहीं बना पाती, जो जमीनी युद्ध पर बनी फिल्मों में देखने को मिलता है. यही वजह है कि ऐसे प्रोजेक्ट्स का बजट बढ़ जाता है, लेकिन सुपरहिट होने की गारंटी अब तक कम ही नजर आई है.

हालांकि, बॉर्डर 2 में आर्मी के साथ-साथ नेवी और एयरफोर्स की भूमिका को भी बैलेंस्ड तरीके से दिखाया गया था, जिससे कहानी का दायरा बड़ा हुआ और अलग-अलग फोर्सेज का योगदान सामने आया. ऐसे में अगर ‘बॉर्डर 3' वाकई वायुसेना पर ज्यादा फोकस करती है, तो मेकर्स के सामने चुनौती साफ है. उन्हें सिर्फ बड़े स्केल पर नहीं, बल्कि मजबूत इमोशनल कहानी पर भी उतना ही जोर देना होगा, तभी यह जॉनर के पुराने ट्रेंड को तोड़ने में कामयाब हो सकती है.

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