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तब्बू से नेशनल अवॉर्ड हारने पर बोलीं सोनाली कुलकर्णी, 'मैंने गुस्से और जलन में देखी उनकी फिल्म'

सोनाली कुलकर्णी ने याद किया कि उन्हें लगता था कि तब्बू इसलिए नेशनल अवॉर्ड जीतीं, क्योंकि वह शबाना आजमी की भतीजी थीं. सोनाली कुलकर्णी ने तब्बू से नेशनल अवॉर्ड हारने के बारे में बात करते हुए कहा, "जो लोग अवॉर्ड जीत रहे थे, उनसे मुझे जलन होती थी."

तब्बू से नेशनल अवॉर्ड हारने पर बोलीं सोनाली कुलकर्णी, 'मैंने गुस्से और जलन में देखी उनकी फिल्म'
तब्बू के साथ काम करना चाहती हैं सोनाली
नई दिल्ली:

एक्ट्रेस सोनाली कुलकर्णी ने हाल ही में बताया है कि जब 'माचिस' फिल्म के लिए तब्बू को बेस्ट एक्ट्रेस का नेशनल अवॉर्ड मिला और वह खुद यह अवॉर्ड नहीं जीत पाईं, तो उन्हें कैसा लगा था. सोनाली को 'दायरा' फिल्म में अपनी भूमिका के लिए नॉमिनेट किया गया था. कई सालों बाद, 'स्क्रीन स्पॉटलाइट' शो में सोनाली ने याद किया कि उन्हें लगता था कि तब्बू इसलिए जीतीं क्योंकि वह शबाना आजमी की भतीजी थीं. सोनाली कुलकर्णी ने तब्बू से नेशनल अवॉर्ड हारने के बारे में बात करते हुए कहा, "जो लोग अवॉर्ड जीत रहे थे, उनसे मुझे जलन होती थी."

उन्होंने आगे कहा, "हर साल नेशनल अवॉर्ड्स के फाइनल राउंड में मेरी फिल्मों को सबसे अच्छी फिल्मों में गिना जाता था. और हर साल मुझे निराशा ही हाथ लगती थी. उस समय मुझे सच में नेशनल अवॉर्ड चाहिए था. मैं दूसरे अवॉर्ड तो जीत रही थी, लेकिन जो चीज नहीं मिलती, उसी की सबसे ज्यादा चाहत होती है." तब्बू की जीत के बारे में अपनी सोच को याद करते हुए सोनाली ने बताया कि वह खुद से कहती थीं, "वह तो इंडस्ट्री से है न!" एक्ट्रेस का मानना ​​था कि तब्बू को अवॉर्ड इसलिए मिला, क्योंकि वह पांच बार नेशनल अवॉर्ड जीत चुकीं स्टार शबाना आजमी की भतीजी थीं.

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सोनाली ने बताया, "मुझे तब्बू से इतनी जलन और गुस्सा था कि आखिरकार मैंने 'माचिस' फिल्म देखी. जब मैंने उनकी फिल्में देखीं, तो मुझे अपनी असुरक्षा और बेचैनी से निपटने में मदद मिली."'माचिस' देखने के बाद सोनाली कुलकर्णी ने अपने विचार साझा किए. सोनाली ने बताया कि 'माचिस' में तब्बू की परफॉर्मेंस इतनी शानदार थी कि उससे उन्हें शांति मिली. उन्होंने कहा, "उनकी परफॉर्मेंस से न सिर्फ मुझे खुशी मिली, बल्कि मुझे अपनी जिंदगी और अपनी काबिलियत को समझने में मदद मिली. जब मैंने तब्बू की कई फिल्में देखीं - जैसे 'माचिस', 'अस्तित्व' और 'चांदनी बार' - तो हर बार मुझे उनसे प्यार हो गया."

एक्ट्रेस ने बताया कि बाद में नेशनल अवॉर्ड जीतने की उनकी चाहत खत्म हो गई. उस समय के अपने रवैये को याद करते हुए उन्होंने कहा, "करियर की शुरुआत में आप अपनी सभी भावनाओं को बहुत जोश के साथ दिखाना चाहते हैं. आपको पता नहीं होता कि बारीकी या सहजता क्या होती है. मुझे समझ आया कि सहजता क्या है और थिएटर एक्टिंग और फिल्म एक्टिंग में क्या फर्क है. इसलिए, अब मुझे कोई शिकायत नहीं है. मैंने खुद को स्वीकार कर लिया है और यही सबसे जरूरी बात है."

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बाद में सोनाली ने क्रांति कनाडे की मराठी शॉर्ट फfल्म 'चैत्र' के लिए नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स 2002 में स्पेशल जूरी अवॉर्ड जीता. सोनाली ने माना कि समय के साथ उनकी इच्छाएं बदली हैं और अब वह तब्बू के साथ काम करने की उम्मीद कर रही हैं.

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