स्वातंत्र्यवीर सावरकर के लिए रणदीप हुड्डा को राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया है. उन्होंने कहा कि यह मेरे लिए ऐसा पल है, जिसे मैं अभी भी पूरी तरह से महसूस और समझने की कोशिश कर रहा हूं. इस फिल्म ने मुझसे उतना कुछ मांगा, जितना शायद मेरे अब तक के किसी भी काम ने नहीं मांगा था. इस फिल्म का सफर हर मोड़ पर चुनौतियों से भरा रहा, लेकिन मुझे खुशी है कि हमने हर मुश्किल का सामना किया और उसे पार करते हुए इस यात्रा को पूरा किया. तमाम कठिनाइयों के बावजूद, न जाने कहां से हमें आगे बढ़ते रहने की ताकत मिलती रही.
एक अभिनेता, सह-लेखक और पहली बार निर्देशक के रूप में मैंने इस फिल्म में अपना सब कुछ झोंक दिया, क्योंकि मुझे महसूस होता था कि वीर सावरकर की कहानी को पूरी ईमानदारी, सच्चाई और संवेदनशीलता के साथ दर्शकों तक पहुंचाने की बहुत बड़ी ज़िम्मेदारी मेरे कंधों पर है. इस फिल्म को बनाते समय हमने जो भी संघर्ष झेले, वे वीर सावरकर के जीवन और उनके द्वारा दिए गए त्याग के सामने कुछ भी नहीं हैं.
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मैं अपनी पूरी टीम का दिल से आभारी हूं, जिसने इस सपने पर विश्वास किया और हर अच्छे-बुरे दौर में मेरे साथ मजबूती से खड़ी रही. यह सम्मान हम सभी का है. मैं आशा करता हूं कि यह सम्मान अधिक से अधिक लोगों, विशेषकर युवा पीढ़ी को, वीर सावरकर की विरासत को जानने, समझने और उस पर विचार करने के लिए प्रेरित करेगा.
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