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This Article is From Nov 04, 2025

कभी 1 रूपये दिहाड़ी पर किया काम, अमिताभ बच्चन के लिए बना मसीहा, दी बिग बी के करियर की टॉप 5 ब्लॉबस्टर फिल्में...

अमिताभ बच्चन बैक टू बैक 11 फ्लॉप फिल्में की थी और लगभग उन्होंने घर जाने का मन बना लिया था.

कभी 1 रूपये दिहाड़ी पर किया काम, अमिताभ बच्चन के लिए बना मसीहा, दी बिग बी के करियर की टॉप 5 ब्लॉबस्टर फिल्में...
कभी 1 रूपये दिहाड़ी पर किया था काम
नई दिल्ली:

Amitabh Bachchan Prakash Mehra Movies: दिग्गज फिल्म डायरेक्टर प्रकाश मेहरा ने हिंदी सिनेमा को एक से एक शानदार फिल्में दी हैं. इसमें उनकी कड़ी मेहनत और लगन के साथ उनका छिपा हुआ संघर्ष भी शामिल है. प्रकाश ने बचपन में ही अपनी मां को खो दिया था. उनके पिता वैरागी हो गए थे और फिर दिल्ली में उनका पालन-पोषण उनकी मौसी के यहां हुआ. वहीं, अपने पैरों पर खड़े होने के लिए वह मुंबई आ गए और फिर कभी घर नहीं लौटे, क्योंकि वह बचपन से ही फिल्मों के शौकीन थे. उनका दिन-रात का संघर्ष उन्हें फिल्म लाइन में ले गया. इधर, अमिताभ बच्चन फ्लॉप होकर घर जाने की तैयारी कर रहे थे, तभी प्रकाश मेहरा महानायक की जिंदगी में रोशनी बनकर आए.

अमिताभ बच्चन को बनाया स्टार

अमिताभ बच्चन बैक टू बैक 11 फ्लॉप फिल्में की थी और लगभग उन्होंने घर जाने का मन बना लिया था. तीन से चार एक्टर के फिल्म जंजीर को ठुकराने के बाद यह फिल्म अमिताभ की झोली में गई और इस फिल्म की कहानी सलीम-जावेद ने मिलकर लिखी थी और प्रकाश मेहरा को इस फिल्म को डायरेक्ट करने का मौका मिला था. कमाल की बात तो यह है कि प्रकाश मेहरा के साथ-साथ अमिताभ और सलीम-जावेद भी सिनेमा में पहचान बनाने के लिए संघर्ष कर रहे थे. फिल्म इतनी बड़ी हिट साबित हुई कि सभी की लॉटरी लग गई. इसके बाद तो प्रकाश ने अमिताभ के साथ मुकद्दर का सिकन्दर, लावारिस, नमक हलाल और शराबी जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्में दी, जिसे उनके साथ-साथ प्रकाश मेहरा का भी सिक्का चल पड़ा.

1 रुपये दिहाड़ी पर किया था काम

यूपी के बिजनौर जिले में पैदा हुए प्रकाश मेहरा ने बताया, 'मां बचपन में चली गई, पिता हरिद्वार चले गए और मेरी मौसी मुझे बिजनौर से दिल्ली लेकर आ गई, मैं 10वीं पास हूं, और 13 रुपये लेकर मुंबई गया था, मुंबई में 1 रुपये दिहाड़ी पर काम मिला था, बचपन से ही फिल्मों का शौक था, मैं कैमरे को उठाना, कैमरा फोकस करना, कभी भीड़ में बैठने का काम करता था, मेरे काम से खुश हुए तो 3 रुपये दिहाड़ी कर दी, मैंने उन्हें अपना सपना बताया, तो बोले तुम्हें हीरो नहीं बताऊंगा, मैंने कहा हीरो बनना भी नहीं है, मेरे दोस्त विपिन ने यहां काम दिलाया था और उस वक्त फोटोकॉपी की मशीन नहीं होती तो मुझे एक स्क्रिप्ट को चार अलग-अलग पेज पर लिखने का काम दिया, मैंने मना कर दिया, फिर विपिन ने मुझे  रवि देसाई के समधी धीरू भाई देसाई से मिलाया'. बता दें, प्रकाश मेहरा अमिताभ को स्टार बनाने से पहले चार फिल्में हसीना मान जाएगी, मेला, समाधि और हाथ की सफाई बना चुके थे. 

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