दीपिका पादुकोण का असर सिर्फ बॉक्स-ऑफिस के आंकड़ों और यादगार अभिनय तक ही सीमित नहीं है. उन्होंने बार-बार अपनी आवाज़ और दुनिया भर में मिली पहचान का इस्तेमाल उन मुद्दों पर बात शुरू करने के लिए किया है जो सच में ज़रूरी हैं, कई बार वह सबसे पहले आगे आईं और हर बार सबसे ज़्यादा असर छोड़ने वाली रहीं. यहां हम इस बात पर बात कर रहे हैं कि कैसे दीपिका ने काम और निजी जीवन के संतुलन की बहस को सही तरीके से समझाया और हमारे समय की सबसे बड़ी बहस को न सिर्फ शुरू किया, बल्कि उसमें मजबूती से अपनी बात भी रखी.

वर्क–लाइफ बैलेंस की बात को आगे बढ़ाते हुए और फिल्म इंडस्ट्री से मिले समर्थन के साथ
जब दीपिका ने खुले तौर पर काम और निजी ज़िंदगी के संतुलन की अहमियत पर बात की, तो इसका असर पूरे इंडस्ट्री में साफ दिखा. जहां ज्यादा काम को अक्सर बढ़ावा दिया जाता है, वहां उनकी बात नई और जरूरी लगी. इसके बाद फिल्म जगत से, खासकर महिलाओं की तरफ से, उन्हें मजबूत समर्थन मिला. कियारा आडवाणी, काजोल, रश्मिका मंदाना, नेहा धूपिया, मोना सिंह सहित कई अभिनेत्रियों ने खुलकर उनका साथ दिया और बेहतर काम के समय और साफ सीमाओं की ज़रूरत पर ज़ोर दिया. दीपिका ने सिर्फ बहस शुरू नहीं की, बल्कि उस सोच को सामान्य बना दिया जिसका लोग लंबे समय से इंतजार कर रहे थे.

भारत में मेंटल हेल्थ की दिशा का नेतृत्व करती हुईं
मानसिक स्वास्थ्य पर खुलकर बातचीत आम होने से बहुत पहले ही दीपिका ने ईमानदारी और हिम्मत के साथ आगे कदम बढ़ाया. अपनी निजी यात्रा के बारे में खुलकर बात करके और भारत की पहली मेंटल हेल्थ एंबेसडर बनकर उन्होंने डिप्रेशन और एंग्जायटी को देखने का नजरिया बदल दिया. अपनी फाउंडेशन के ज़रिए दीपिका ने इस मुद्दे को नई पहचान दी. उनकी पहल ने मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी झिझक को तोड़ा, अनगिनत लोगों को मदद लेने के लिए प्रेरित किया और यह साफ कर दिया कि मानसिक स्वास्थ्य कोई वर्जित विषय नहीं, बल्कि एक जरूरी प्राथमिकता है.

ग्लोबल प्लेटफॉर्म्स पर भारतीयों के लिए राह खोलने वाली
दीपिका ने लगातार दुनिया के मंच पर भारत का नाम रोशन किया है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीयों के लिए नए मौके बनाए हैं. चाहे विदेशी रेड कार्पेट हों, बड़े ग्लोबल ब्रांड्स हों या दुनिया भर के कल्चरल प्लेटफॉर्म्स, उन्होंने यह दिखाया कि भारतीय मौजूदगी सिर्फ दिखाई ही नहीं देती, बल्कि दमदार और प्रभावी भी होती है. उनके अंतरराष्ट्रीय जुड़ाव ने दुनिया में भारतीय प्रतिभा को आत्मविश्वास से भरा, भरोसेमंद और असरदार तरीके से दिखाते हुए देखने का तरीका बदला है. खास तौर पर उन्होंने दुनिया के मंचों पर मानसिक स्वास्थ्य जैसे ज़रूरी मुद्दों पर खुलकर बात की, जिससे कई और लोग भी उनके रास्ते पर चलने के लिए प्रेरित हुए.

समझदारी के साथ नेतृत्व करते हुए
उन्होंने बार-बार अपनी पहुंच का इस्तेमाल समाज सेवा के अलग-अलग पहलुओं को सामने लाने के लिए किया है, यह दिखाते हुए कि स्टारडम के साथ बड़ी सोच भी चल सकती है. उनकी क्लोसेट एडिट से मिलने वाली राशि लिव लव लाफ फाउंडेशन को दी जाती है.
महिलाओं के लिए शक्ति, सादगी और नेतृत्व की नई परिभाषा: केंद्रीय मंत्रालय द्वारा भारत की पहली मेंटल हेल्थ एंबेसडर नियुक्त दीपिका पादुकोण
शायद दीपिका का सबसे बड़ा योगदान यह है कि उन्होंने लोगों के सामने एक मजबूत महिला होने का मतलब बदल दिया है. वह सादगी, आत्मविश्वास और सच्चाई के साथ आगे बढ़ती हैं, चाहे वह कड़ी प्रतिस्पर्धा वाली इंडस्ट्री में अपनी जगह बनाना हो, सही मुद्दों पर बात करना हो या अपनी बात पर डटे रहना हो. उन्होंने दिखाया है कि असर डालने के लिए तेज आवाज़ होना जरूरी नहीं होता.
अपने सफर के हर दौर में दीपिका पादुकोण समय से एक कदम आगे रही हैं, वह सिर्फ बदलाव के पीछे चलने वाली नहीं, बल्कि बदलाव की राह बनाने वाली सच्ची मिसाल हैं.
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