बॉलीवुड ने कई अभिनेत्रियों ने अपने अभिनय और अपनी कलाकारी से अपना बड़ा नाम बनाया है. लेकिन आज हम जिस एक्ट्रेस की बात कर रहे हैं, वो अपने समय में एक मिसाल थी और उन्होंने आने वाली पीढ़ियों के लिए नए रास्ते बनाए. उन्हें हिंदी फिल्म जगत की पहले ग्रेजुएट एक्ट्रेस कहा जाता है. उन्होंने उस पॉपुलर ब्यूटी सोप का ऐड किया, जो उनसे पहले केवल हॉलीवुड की सुंदरियां ही करती थीं. प्रोफेशनल फ्रंट पर सफलता के बावजूद उनका निजी जीवन काफी संघर्षों से भरा रहा.
कौन हैं वो एक्ट्रेस?
हम बात कर रहे हैं बीते जमाने की मशहूर अभिनेत्री लीला चिटनिस की. लीला चिटनिस ने बॉलीवुड में 1930 से 1980 के दशक तक काम किया. उनका जन्म 1909 में हुआ था. ये उन चुनिंदा महिला अभिनेताओं में से थीं जो ग्रेजुएट (आर्ट्स में बैचलर) थीं. वह पहली फीमेल एक्टर थीं, जो ग्रेजुएट थी. उनके पिता इंग्लिश लिटरेचर के प्रोफेसर थे. उन्होंने लीला की शादी 16 साल की उम्र में ही तय कर दी थी.
लीला चिटनिस की शादीशुदा जिंदगी
लीला चिटनिस ने गजानन यशवंत चिटनिस से शादी की, जो एक डॉक्टर थे और उसी ब्रह्म समाज समुदाय से थे जिससे उनका परिवार जुड़ा था. शादी के बाद उनके चार बेटे हुए. उनकी राजनीतिक सोच भी एक जैसी थी. उन्होंने एक बार मशहूर मार्क्सवादी स्वतंत्रता सेनानी एम.एन. रॉय को अपने घर में पनाह दी थी और ब्रिटिश राज के खिलाफ भारत की आजादी की लड़ाई में अपना योगदान दिया था.

हालांकि, शादी सफल न हो पाने के कारण आखिरकार वह अपने शराब पीने वाले पति से अलग हो गईं. वापस लौटने पर, उन्हें अकेले ही अपने चार छोटे बेटों की परवरिश करने की मुश्किल चुनौती का सामना करना पड़ा. उस समय ग्रेजुएट होने वाली चुनिंदा महिलाओं में से एक होने के नाते, उन्होंने एक स्कूल में पढ़ाना शुरू किया. हालांकि, प्रोग्रेसिव मराठी ग्रुप 'नाट्यमन्वंतर' के साथ थिएटर की ट्रेनिंग लेने के कारण, उन्हें एक्टिंग में ही अपना असली मकसद मिला.
फिल्मों में शुरुआती संघर्ष
हिंदी सिनेमा में लीला चिटनिस का सफर आसान नहीं था. 'जेंटलमैन डाकू' (1937) में ब्रेक मिलने से पहले उन्होंने कई फिल्मों में एक्स्ट्रा (सहायक कलाकार) के तौर पर काम किया. इस फिल्म में उन्होंने पुरुष के वेश में एक्शन सीन भी किए थे. 1939 में 'कंगन' की बॉक्स ऑफिस सफलता के साथ ही उन्होंने आखिरकार एक लीड एक्ट्रेस के तौर पर अपनी जगह बनाई. फिल्म में उन्होंने एक हिंदू पुजारी की बेटी का किरदार निभाया, जो अपने पिता की मर्जी के खिलाफ जाकर एक स्थानीय जमींदार के बेटे से प्यार करने लगती है.

बॉम्बे टॉकीज, वह मशहूर प्रोडक्शन हाउस जिसने इस फिल्म को सपोर्ट किया था, समाज की स्थापित मान्यताओं को चुनौती देने वाली फिल्में चुनने की वजह से मुश्किल दौर से गुजर रहा था. 'कंगन' फिल्म की जबरदस्त कामयाबी के बाद, लीला ने उस दौर की मशहूर अभिनेत्री देविका रानी की जगह ले ली. लीला चिटनिस ने बॉम्बे टॉकीज के एक और बड़े कलाकार अशोक कुमार के साथ कई यादगार फिल्मों में काम किया, जिनमें एन.आर. आचार्य की 'बंधन' और 'आजाद' (1940) और ज्ञान मुखर्जी की 'झूला' (1941) शामिल है. ये सभी फिल्में उस समय समाज में मौजूद मुद्दों पर आधारित थीं.
लक्स का ऐड करने वाली पहली इंडियन एक्ट्रेस
1941 में लीला ने इतिहास रचते हुए मशहूर लग्जरी सोप ब्रांड 'लक्स' का विज्ञापन करने वाली पहली भारतीय अभिनेत्री बनने का गौरव हासिल किया. उनसे पहले केवल हॉलीवुड की एक्ट्रेसेस ने ही ये ऐड किया था. हालांकि, 1940 के दशक की शुरुआत में जब हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में नए चेहरे आने लगे, तो लीला की पकड़ कमजोर पड़ने लगी, जैसा कि उन दशकों में मुख्य अभिनेत्रियों के करियर के साथ अक्सर होता था.
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