'भारत की नाइटिंगेल' कही जाने वाली गायिका लता मंगेशकर ने अपने करियर में हजारों गाने रिकॉर्ड किए. वह भारत की सबसे लोकप्रिय गायिका थी, जिनका दशकों का कार्यकाल उपलब्धियों से भरा पड़ा है. लता ने लगभग तीस से ज्यादा भाषाओं में फिल्मी और गैर-फिल्मी गाने गाये हैं. उनकी पहचान भारतीय सिनेमा में एक पार्श्वगायिका के रूप में रही है. लता की जादुई आवाज की पूरी दुनिया दीवानी है. भारत सरकार ने उन्हें 'भारतरत्न' से सम्मानित किया था. आज हम बता रहे हैं लता के 10 गानों के बारे में जो आज भी फैंस के दिलों पर राज करते हैं.
ना बोले ना बोले रे 'आजाद' (1955)
इस गाने और डांस नंबर में मंगेशकर ने टॉप स्टार मीना कुमारी के लिए अपनी आवाज दीय इस गाने का धार्मिक महत्व भी है, जिसमें राधा भगवान कृष्ण की स्तुति में गाती हैं.
मन मोहना बड़े झूठे 'सीमा' (1955)
अपनी शास्त्रीय संगीत की जड़ों को दिखाते हुए लता मंगेशकर ने कृष्ण की स्तुति में एक और गाना गाया, जिसे “सीमा” फिल्म में नूतन पर खूबसूरती से फिल्माया गया.
नैन सो नैन नहीं मिलाओ “झनक झनक पायल बाजे” (1955)
वसंत देसाई के संगीत वाली वी. शांताराम की डांस फिल्म लता मंगेशकर ने अपने शास्त्रीय गायकी का हुनर दिखाया. भले ही इसमें अभिनय करने वाली अभिनेत्री संध्या थीं—जो मीना कुमारी, नरगिस या वैजयंतीमाला जैसी बहुत मशहूर स्टार नहीं थीं.
रसिका बलमा “चोरी चोरी” (1956)
लता मंगेशकर ने नरगिस के लिए दर्जनों बार गाने गाए, जिनमें “चोरी चोरी” का यह दिल को छू लेने वाला गाना भी शामिल है. यह फिल्म “इट हैपन्ड वन नाइट” का रीमेक थी.
“मधुमती” (1958)
म्यूजिक डायरेक्टर सलिल चौधरी इस फिल्म के साउंडट्रैक से मशहूर हुए. यह फिल्म एक आदिवासी लड़की की कहानी थी, जिसके साथ अन्याय हुआ था. इस गाने को वैजयंतीमाला पर फिल्माया गया था.
ओ सजना “परख” (1960)
म्यूजिक डायरेक्टर सलिल चौधरी के इस खुशनुमा गाने की शुरुआत सितार की धुन से होती है, जिसने हिंदी फिल्मों के कई शौकीनों का दिल जीत लिया. इसे साधना पर फिल्माया गया था, जो पहली बार प्यार में पड़ी एक युवा लड़की का किरदार निभा रही थीं.
अजीब दास्तां है ये, दिल अपना और प्रीत पराई (1960)
किशोर साहू के निर्देशन और शंकर-जयकिशन के संगीत वाली इस लव ट्राएंगल फिल्म में मीना कुमारी की लिप-सिंकिंग लता मंगेशकर की आवाज से एकदम मेल खाती है.
अल्लाह तेरो नाम, हम दोनों (1961)
देव आनंद के डबल रोल और साधना व नंदा के लीड रोल वाली यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर हिट रही. साहिर लुधियानवी के बोल और जयदेव के संगीत ने इस भक्ति गीत की चमक और बढ़ा दी, जिसे सुनकर रोंगटे खड़े हो जाते थे.
नैना बरसे रिमझिम, “वो कौन थी” (1964)
एक रहस्यमयी महिला (साधना) की डरावनी कहानी, जो बारिश की रात एक गाड़ी चलाने वाले के सामने आती है और “नैना बरसे रिमझिम” गाते हुए कब्रिस्तान में गायब हो जाती है. राज खोसला की साइकोलॉजिकल थ्रिलर फिल्म के शानदार संगीत में यह गाना मुख्य आकर्षण था.
तू जहां-जहां चलेगा, “मेरा साया” (1966)
यह डायरेक्टर खोसला और साधना की एक और साइकोलॉजिकल थ्रिलर फिल्म थी. इस दिल को छू लेने वाले गाने के अलावा फिल्म में लता मंगेशकर की बहन आशा भोंसले का एक आकर्षक गाना झुमका गिरा रे भी बेहद खूबसूरत गाना है.
इन्हीं लोगों ने, इन्हीं लोगों ने, “पाकीजा” (1972)
एक तवायफ पर फिल्माया गया यह गाना काफी खास था, क्योंकि लता मंगेशकर ऐसी चीजों के लिए अपनी आवाज देने को लेकर काफी सख्त थीं जिनमें कुछ भी अश्लील या बुरा लगे. फिल्म की कहानी काफी साफ-सुथरी थी. एक युवा लड़की (मीना कुमारी) जो कोठे पर पली-बढ़ी है, प्यार में पड़ जाती है और शादी करना चाहती है, जो समाज के नियमों के खिलाफ था.
एक प्यार का नगमा है, “शोर” (1972)
एक्ट्रेस जया भादुरी ने एक इंटरव्यू में कहा था कि जब मंगेशकर ने पहली बार उनके लिए गाना गाया, तो वह बहुत खुश थीं. एक नई कलाकार होने के नाते, उन्हें लगा कि उन्होंने कामयाबी हासिल कर ली है क्योंकि सुरों की रानी ने उन्हें अपनी आवाज दी थी.
रैना बीती जाए, “अमर प्रेम” (1972)
राजेश खन्ना, शर्मिला टैगोर के दिल को छू लेने वाले अंदाज से मोहित हो जाते हैं. शर्मिला एक स्थानीय तवायफ के रोल में थीं. शक्ति सामंत की बंगाली कहानी पर आधारित इस फिल्म में शास्त्रीय धुन पर लिप-सिंक करते हुए उन्हें अपनी ओर ध्यान खींचा.
बाहों में चले आओ, अनामिका (1973)
जया भादुरी, राहुल देव बर्मन के इस गाने के जरिए संजीव कुमार को लुभाने की कोशिश करती हैं.
तेरे बिना जिंदगी में कोई, “आंधी” (1975)
इस फिल्म में सुचित्रा सेन ने एक ऐसी नेता का रोल किया है जो एक ट्रिप के दौरान अपने एक्स-हसबैंड से दोबारा मिलती है. कहा जाता है कि फिल्म की कहानी यह उस समय की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी पर आधारित था.
ऐ दिल-ए-नादान ,(रज़िया सुल्तान, 1983)
हेमा मालिनी ने रानी रजिया सुल्तान पर बनी इस पीरियड फिल्म में काम किया. डायरेक्टर कमाल अमरोही को खय्याम का स्टाइल पसंद था. हालांकि म्यूजिक डायरेक्टर ने ज्यादातर दूसरे सिंगर्स का इस्तेमाल किया, लेकिन उन्होंने यह गाना मंगेशकर को दिया.
जिया जले, “दिल से” (1998)
डायरेक्टर मणिरत्नम ने ऑस्कर विनर को उनका बड़ा ब्रेक दिया और अपनी फिल्म “दिल से” के लिए उन्होंने शाहरुख खान और प्रीति जिंटा पर फिल्माए गए इस गाने में मंगेशकर की आवाज का इस्तेमाल किया.
एक तू ही भरोसा, “पुकार” (2000)
ए आर रहमान ने मंगेशकर के साथ मिलकर उनके आखिरी गानों में से एक के लिए काम किया. यह फिल्म औसत थी लेकिन अपने म्यूजिक की वजह से खास बन गई. “स्लमडॉग मिलियनेयर” फेम अनिल कपूर ने इसमें एक आर्मी ऑफिसर का रोल किया है जो एक किडनैप हुई नेता को बचाता है.
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