दो साल पहले जब चंदू चैंपियन सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी, तब इस फिल्म ने न सिर्फ भारत के पहले पैरालंपिक गोल्ड मेडलिस्ट मुरलीकांत पेटकर की प्रेरणादायक कहानी को बड़े पर्दे पर पेश किया, बल्कि उस असाधारण मेहनत और तैयारी को भी सामने लाया, जिसने इसे अविश्वसनीय बनाया. दर्शकों ने पर्दे पर कार्तिक आर्यन का जबरदस्त ट्रांसफॉर्मेशन देखा, लेकिन इसके पीछे महीनों की कड़ी ट्रेनिंग, त्याग और अनुशासन की कहानी छिपी थी. यही समर्पण आगे चलकर कार्तिक के करियर की सबसे यादगार उपलब्धियों में से एक बना और उन्हें पहला फिल्मफेयर बेस्ट एक्टर अवॉर्ड भी दिलाया.

ट्रेनर त्रिदेव पांडे ने बताया कार्तिक का फिटनेस सीक्रेट
इस ट्रांसफॉर्मेशन को सबसे करीब से देखने वालों में फिटनेस ट्रेनर त्रिदेव पांडे का नाम शामिल है. कार्तिक की मेहनत और समर्पण को याद करते हुए वे कहते हैं, “अपने 17 साल के अनुभव में मैंने उनके जैसा किसी को नहीं देखा.” गौरतलब है कि एक साल से अधिक समय तक कार्तिक की जिंदगी सिर्फ ट्रेनिंग, रिकवरी और सख्त डाइट रूटीन के इर्द-गिर्द घूमती रही. इस दौरान न कोई शॉर्टकट था और न ही किसी तरह की ढील. एक घटना को याद करते हुए त्रिदेव पांडे बताते हैं, “नवंबर में कार्तिक का जन्मदिन था और उनके दोस्तों ने उनके लिए हेल्दी केक मंगवाए थे. उन्होंने केक काटा, लेकिन उसका एक टुकड़ा तक नहीं खाया.” यह किस्सा बताता है कि भूमिका के लिए कार्तिक कितने फोकस्ड और अनुशासित थे.
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हालांकि चुनौती सिर्फ फिट बॉडी पाने तक सीमित नहीं थी. एक खिलाड़ी के किरदार को विश्वसनीय तरीके से निभाने के लिए कार्तिक को शुरुआत से कई नई शारीरिक क्षमताएं और खेल संबंधी स्किल्स सीखनी पड़ीं. बॉक्सिंग सेशंस, स्विमिंग ड्रिल्स, एंड्योरेंस ट्रेनिंग और फंक्शनल स्ट्रेंथ एक्सरसाइज उनकी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन गई थीं. त्रिदेव पांडे के मुताबिक, “वह पहले स्किपिंग में ज्यादा अच्छे नहीं थे, लेकिन लगातार अभ्यास से उन्होंने स्किपिंग के 14-15 स्टाइल सीखे, जो पहले एक पुश-अप भी नहीं कर पाते थे. वही कार्तिक आर्यन ने 50-60 किलो प्लेट्स पीठ पर रखकर पुश-अप्स किये. सच कहूं तो कार्तिक ने खुद को बहुत ज्यादा पुश किया.” तैयारी के दौरान अभिनेता ने लगभग 18 किलो वजन कम किया और बॉडी फैट प्रतिशत में भी बड़ी कमी लाई, जिसे हाल के वर्षों में बॉलीवुड के सबसे चर्चित फिजिकल ट्रांसफॉर्मेशन्स में गिना गया.

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आज भी चंदू चैंपियन की यात्रा इसलिए खास मानी जाती है, क्योंकि यह ट्रांसफॉर्मेशन सिर्फ लुक्स बदलने तक सीमित नहीं थी, बल्कि एक असाधारण सच्ची कहानी को सम्मान देने का जरिया था. इस पूरे सफर को संक्षेप में बताते हुए त्रिदेव पांडे कहते हैं, “हमें यह सब करने में 14 महीने लगे थे और मैंने उन्हें खेल को बिल्कुल शुरुआत से सिखाया था.” दो साल बाद भी यह फिल्म इस बात की याद दिलाती है कि किसी दमदार परफॉर्मेंस के पीछे महीनों की अनदेखी मेहनत छिपी होती है. कार्तिक आर्यन के लिए यह सफर सिर्फ उनके लुक्स बदलने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उसने उन्हें एक एथलीट की तरह ढाल दिया और भारत की सबसे प्रेरणादायक खेल कहानियों में से एक को जीवंत बनाने में मदद की.
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