सिनेमा सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि दुनिया को देखने का एक अलग नजरिया भी है. इसी नजरिये और कला का जश्न मनाते हुए 19वें मुंबई इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल (मिफ 2026) का शानदार समापन हो गया है. छह दिनों तक चले इस सिनेमाई मेले में दुनिया भर के फिल्ममेकर्स, स्टूडेंट्स, इंडस्ट्री के दिग्गजों और सिनेमा प्रेमियों ने हिस्सा लिया. इस फेस्टिवल ने एक बार फिर साबित कर दिया कि डॉक्यूमेंट्री, एनिमेशन और शॉर्ट फिक्शन फिल्मों के लिए यह दुनिया के सबसे बेहतरीन प्लेटफॉर्म्स में से एक है.
क्लोजिंग सेरेमनी में इंटरनेशनल और नेशनल लेवल पर कुल 17 अवॉर्ड्स बांटे गए. आइए नजर डालते हैं इस साल के प्रमुख विजेताओं और फेस्टिवल की झलकियों पर:
इंटरनेशनल सिनेमा: 'सिल्वर' और 'अंडर द स्नो' का दबदबा
विदेशी फिल्मों की कैटेगरी में इस बार भी कई शानदार कहानियां देखने को मिलीं.
सबसे बड़ा अवॉर्ड: 'बेस्ट इंटरनेशनल डॉक्यूमेंट्री फिल्म' का प्रतिष्ठित गोल्डन शंख पोलैंड की डॉक्यूमेंट्री 'सिल्वर' को मिला. इस सम्मान के साथ फिल्म को 10 लाख रुपये का नकद इनाम भी दिया गया.
शॉर्ट फिक्शन और एनिमेशन: ईरान की 'अंडर द स्नो' ने 'बेस्ट इंटरनेशनल शॉर्ट फिक्शन' का सिल्वर शंख और 5 लाख का इनाम अपने नाम किया. वहीं, एनिमेशन कैटेगरी में जर्मनी की 'मायाज सॉन्ग' ने सिल्वर शंख जीता.
भारतीय फिल्मों ने भी दिखाया अपना दम
नेशनल कॉम्पिटिशन में भी भारतीय कहानीकारों ने अपनी गहरी छाप छोड़ी:
'वाई' को 'बेस्ट इंडियन डॉक्यूमेंट्री फिल्म' का सिल्वर शंख और 5 लाख रुपये का इनाम मिला.
शॉर्ट फिक्शन कैटेगरी में एफटीआईआई (FTII) द्वारा बनाई गई 'स्मॉल क्लाउड्स' छाई रही.
एनिमेशन में तमिल फिल्म 'आर्मस्ट्रांग फ्रॉम अंगालम्मन टेम्पल स्ट्रीट' ने बेस्ट एनिमेशन फिल्म का सिल्वर शंख हासिल किया.
स्पेशल अवॉर्ड्स: क्रिटिक्स और डेब्यू डायरेक्टर्स की पसंद
फिल्म फेस्टिवल में कुछ खास सम्मान भी दिए गए जो नए टैलेंट की हौसलाअफजाई करते हैं:
फिप्रेशी (FIPRESCI) इंटरनेशनल क्रिटिक्स प्राइज: प्रदीप केंचनुरु की फिल्म 'द हग ऑफ एम्प्टीनेस' को क्रिटिक्स ने अपना फेवरिट चुना.
बेस्ट डेब्यू डायरेक्टर: पूजा तोलानी को उनकी फिल्म 'राजा' के लिए 'दादा साहेब फाल्के चित्रनगरी अवॉर्ड' से नवाजा गया.
स्टूडेंट फिल्म: मिलन कुमार को उनकी फिल्म 'द ओल्ड बुल नोज, ऑर वन्स न्यू' के लिए आईडीडीपीए (IDPA) का बेस्ट स्टूडेंट फिल्म अवॉर्ड मिला.
ग्लोबल लेवल पर दिखा मिफ का क्रेज
इस साल मिफ को लेकर जो दीवानगी थी, वो इसके आंकड़ों में भी साफ नजर आई. फेस्टिवल में दुनिया भर से कुल 1,459 फिल्मों की एंट्री आई थी. कॉम्पिटिशन सेक्शन: इसमें 13 देशों की 144 फिल्में (52 इंटरनेशनल और 92 नेशनल) दिखाई गईं. नॉन-कॉम्पिटिशन सेक्शन: यह सेगमेंट भी बेहद शानदार रहा, जिसमें 46 देशों की 202 फिल्में दिखाई गईं. इस सेक्शन को 24 अलग-अलग कैटेगरीज में बांटा गया था, जिसमें 'ऑस्कर विनर्स', 'बुसान नेक्स्ट वेव', 'मराठी फिल्म्स' और 'इकोस फ्रॉम नॉर्थ ईस्ट' जैसे खास सेगमेंट्स शामिल थे.
कुल मिलाकर, मिफ 2026 सिर्फ एक इवेंट नहीं था, बल्कि यह अलग-अलग संस्कृतियों, बेहतरीन कहानियों और सिनेमा की उस ताकत का जश्न था, जो दुनिया में बदलाव लाने का दम रखती है. अगली बार फिर से इस मंच पर कुछ नई और दिलचस्प कहानियों का इंतजार रहेगा!
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