भारतीय सिनेमा अब सिर्फ भाषा या किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रह गया है. इसी बदलते दौर को ध्यान में रखते हुए जी स्टूडियोज ने 2026-27 के लिए अपनी कंटेंट स्ट्रैटेजी को और मजबूत किया है. स्टूडियो की आने वाली फिल्मों की स्लेट हिंदी, मराठी, तेलुगु, तमिल, मलयालम, गुजराती, कन्नड़ और अन्य भारतीय भाषाओं में फैली हुई है. इस स्लेट में कमर्शियल एंटरटेनर्स, एक्शन, रोमांस, थ्रिलर, माइथोलॉजी, सस्पेंस और कई अलग तरह की कहानियां शामिल हैं. यह स्ट्रैटेजी भारत के अलग-अलग दर्शकों और उनकी पसंद को ध्यान में रखते हुए तैयार की गई है.
कई भाषाएं, कई जॉनर
हिंदी सिनेमा में जी स्टूडियोज की स्लेट में 'बाप', 'रामभूमि', 'दिल्ली 2021', 'ब्लाइंड बाबू' जैसे प्रोजेक्ट्स शामिल हैं. इन फिल्मों में बड़े पैमाने का एंटरटेनमेंट, एक्शन, सस्पेंस और मॉडर्न स्टोरीटेलिंग देखने को मिलेगी. साउथ में भी जी स्टूडियोज अपनी मौजूदगी को मजबूत कर रहा है. तेलुगु में 'इंद्रपुत्र', 'कनका दुर्गा' और 'अनसूया जनरल स्टोर्स' जैसे प्रोजेक्ट्स हैं. वहीं कन्नड़ में 'अन्ना फ्रॉम मेक्सिको' और तमिल में 'सत्यवान सावित्री' जैसी फिल्में शामिल हैं. स्टूडियो ने हाल ही में फिल्म 'टॉम एंड चेरी' के साथ गुजराती सिनेमा में भी कदम रखा है. मराठी सिनेमा भी जी स्टूडियोज की स्ट्रैटेजी का एक अहम हिस्सा है. 'आत्मपैम्फलेट' को राष्ट्रीय पुरस्कारों में मिली सराहना के बाद स्टूडियो की नई स्लेट में 'झेप', 'फुलवारा', 'मान', 'जोगाई' जैसी फिल्में शामिल हैं. इन फिल्मों के जरिए अलग-अलग मार्केट और ऑडियंस तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है. फिल्मों की रेंज सिर्फ भाषाओं तक ही सीमित नहीं है, बल्कि जॉनर के स्तर पर भी काफी अलग है. 'सिला', 'सत्यवान सावित्री', 'ब्लाइंड गेम', 'जनवरी 12 विदुदला', और 'दिल्ली 2021' जैसी फिल्में स्टूडियो की अलग-अलग तरह की कहानियों को दिखाती हैं.
दूसरी भाषाओं तक
इसका फोकस किसी एक रीजन या ऑडियंस तक सीमित रहने के बजाय ऐसी फिल्मों पर है जो अलग-अलग मार्केट के दर्शकों को पसंद आएं. जी स्टूडियोज के एक प्रवक्ता ने कहा, "हमारी पोर्टफोलियो स्ट्रैटेजी इस सोच पर आधारित है कि भारत को सिर्फ एक तरह की कहानी, एक भाषा या एक सिनेमाई नजरिए से नहीं दिखाया जा सकता. हर मार्केट की अपनी ऑडियंस, टैलेंट और एंटरटेनमेंट की अलग पसंद है. हमारा उद्देश्य इसी विविधता को अपनी फिल्मों के जरिए दिखाना है. हिंदी, मराठी, मलयालम और गुजराती से लेकर तेलुगु, तमिल, कन्नड़ और दूसरी भाषाओं तक, हम अलग तरह की कहानियों के साथ एक मजबूत और अलग कंटेंट इकोसिस्टम तैयार करने की दिशा में काम कर रहे हैं. हमारे लिए एंटरटेनमेंट और मल्टी-जॉनर सिनेमा का सबसे अहम हिस्सा है. हम ऐसी कहानियां दर्शकों तक लाना चाहते हैं, जो पूरे भारत और देश के बाहर भी लोगों से कनेक्ट कर सकें".
कमर्शियल फिल्मों पर
जॉनर की बात करें तो 'बाप' और 'सिला' बड़े पैमाने के कमर्शियल एक्शन एंटरटेनमेंट को दिखाते हैं. वहीं 'ब्लाइंड गेम', 'ब्लाइंड बाबू' और 'दिल्ली 2021' में साइकोलॉजिकल और थ्रिलर एलिमेंट्स देखने को मिलेंगे. 'इंद्रपुत्र' और 'रामभूमि' भारतीय माइथोलॉजी और इतिहास से प्रेरित बड़े सिनेमाई संसार को सामने लाएंगे. वहीं 'टॉम एंड चेरी', 'सत्यवान सावित्री', 'अन्ना फ्रॉम मेक्सिको', 'झेप', 'फुलवारा', 'जोगाई', 'कनका दुर्गा' और 'अनसूया जनरल स्टोर्स' जैसी फिल्में अलग-अलग भाषाओं और मार्केट में जी स्टूडियोज की कंटेंट रेंज को और मजबूत करती हैं. यह पूरी स्ट्रैटेजी आने वाले समय में नए ऑडियंस और नए भाषा मार्केट तक पहुंचने के बड़े प्लान का हिस्सा है. स्टूडियो एक तरफ स्टार-ड्रिवन कमर्शियल फिल्मों पर काम कर रहा है, तो दूसरी तरफ हाई-कॉन्सेप्ट और अलग तरह की कहानियों को भी अपनी स्लेट में जगह दे रहा है. इसी के साथ बड़े पैमाने की फिल्मों के साथ ऐसी कहानियों को भी शामिल किया जा रहा है, जो अलग-अलग भारतीय संस्कृतियों और स्थानीय कहानियों को सामने लाती हैं.
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