‘दृश्यम' फ्रेंचाइजी की कहानी अब अपने आखिरी पड़ाव पर पहुंचने वाली है. अजय देवगन स्टारर ‘दृश्यम: द कन्क्लूजन' को लेकर दर्शकों के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या हिंदी फिल्म की कहानी मलयालम फिल्म ‘दृश्यम 3' की कहानी का अनुसरण करेगी? फिल्म के निर्देशक अभिषेक पाठक ने इस सवाल का जवाब देते हुए साफ कर दिया है कि हिंदी फ्रेंचाइजी की तीसरी फिल्म मलयालम फिल्म की कहानी पर आधारित नहीं होगी. अभिषेक पाठक के मुताबिक, ‘दृश्यम: द कन्क्लूजन' पूरी तरह एक नई कहानी है और इसका मलयालम फ्रेंचाइजी की तीसरी फिल्म से कोई लेना-देना नहीं है. उन्होंने कहा, “यह पूरी तरह अलग है. यह एक नई कहानी है. इसका मलयालम से कोई लेना-देना नहीं है. यह पूरी तरह से एक अलग फिल्म है.”
इस बयान के साथ निर्देशक ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि हिंदी ‘दृश्यम' फ्रेंचाइजी अपनी कहानी को अपने तरीके से आगे बढ़ा रही है. यानी विजय सालगांवकर की कहानी के लिए दर्शकों को मलयालम संस्करण से अलग रास्ता देखने को मिलेगा.
विजय सालगांवकर की कहानी होगी खत्म?
‘दृश्यम: द कन्क्लूजन' के नाम से ही संकेत मिलता है कि यह कहानी को किसी निर्णायक मुकाम तक ले जाने वाली फिल्म होगी. अभिषेक पाठक ने भी कहा है कि वह विजय सालगांवकर की कहानी को अधूरा छोड़ने के बजाय उसका उचित अंत करना चाहते हैं.
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निर्देशक ने कहा, “यहीं मैं फिल्म को खूबसूरती से खत्म कर रहा हूं, जहां आखिरकार सभी चीजों का समाधान हो जाता है.”
विजय सालगांवकर का किरदार हिंदी ‘दृश्यम' फ्रेंचाइजी के केंद्र में रहा है. पहली दो फिल्मों में परिवार को बचाने के लिए उसके बनाए प्लान और पुलिस से बचने की कोशिशों ने कहानी को आगे बढ़ाया. अब तीसरी फिल्म में यह देखना अहम होगा कि उस पूरी कहानी का आखिरकार क्या नतीजा निकलता है.
क्या ‘दृश्यम' की दुनिया आगे बढ़ सकती है?
हालांकि विजय सालगांवकर की कहानी को खत्म करने की बात कही जा रही है, लेकिन इसका मतलब यह जरूरी नहीं कि ‘दृश्यम' की दुनिया के सभी किरदारों की कहानियां भी खत्म हो जाएं. निर्देशक अभिषेक पाठक ने माना कि फ्रेंचाइजी में कुछ ऐसे किरदार हैं, जिनके पास अपनी अलग कहानी की गुंजाइश है.
उन्होंने खास तौर पर गायतोंडे का जिक्र किया, जो अपने अलग अंदाज के कारण फ्रेंचाइजी का एक यादगार किरदार बन चुका है. पाठक ने कहा, “फिल्म में कुछ दिलचस्प किरदार हैं. उदाहरण के लिए गायतोंडे, जो सभी हिस्सों में एक क्वर्की किरदार रहा है.”
इससे यह संभावना जरूर बनती है कि भविष्य में ‘दृश्यम' की दुनिया के किसी दूसरे किरदार को केंद्र में रखकर कहानी बनाई जा सकती है. हालांकि फिलहाल निर्देशक का पूरा ध्यान विजय सालगांवकर की कहानी को उसके अंतिम मुकाम तक पहुंचाने पर है.
‘दृश्यम: द कन्क्लूजन' को लेकर सबसे दिलचस्प बात यही है कि यह मलयालम फ्रेंचाइजी के रास्ते पर चलने के बजाय अपनी अलग कहानी बताएगी. अब दर्शकों की नजर इस बात पर होगी कि अभिषेक पाठक विजय सालगांवकर और उसके परिवार की कहानी को किस तरह के अंत तक पहुंचाते हैं और क्या यह अंत वाकई इस लोकप्रिय फ्रेंचाइजी के किरदार को एक संतोषजनक विदाई दे पाएगा.
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