आज जब 100-200 करोड़ कमाने वाली फिल्में भी कुछ ही हफ्तों में थिएटर्स से गायब हो जाती हैं, तब जरा सोचिए उस फिल्म का जलवा कितना बड़ा रहा होगा, जिसने पूरे 350 दिनों तक बड़े पर्दे पर राज किया. हर हफ्ते टिकट खिड़की पर भीड़, हर शो में दर्शकों की तालियां और हर गाने पर लोगों की दीवानगी ने इसे इतिहास बना दिया. यही फिल्म देव आनंद के करियर की सबसे बड़ी गेम चेंजर साबित हुई. 61 साल बाद भी इसकी चमक जरा भी फीकी नहीं पड़ी और आज भी इसे हिंदी सिनेमा की सबसे यादगार फिल्मों में गिना जाता है.
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देव आनंद की किस्मत बदलने वाली फिल्म
देव आनंद ने अपने करियर में 100 से ज्यादा फिल्मों में काम किया, लेकिन साल 1965 में रिलीज हुई गाइड ने उन्हें अलग ही पहचान दिलाई. इस फिल्म का निर्देशन उनके भाई विजय आनंद ने किया था. शानदार कहानी, बेहतरीन निर्देशन और दमदार अभिनय ने इसे ऐसी फिल्म बना दिया, जिसका जादू आज भी कम नहीं हुआ है. यही वजह है कि इसे हिंदी सिनेमा की सबसे यादगार फिल्मों में गिना जाता है.
50 हफ्तों तक नहीं थमा फिल्म का जादू
रिपोर्ट्स के मुताबिक, गाइड कई सिनेमाघरों में लगातार 50 हफ्तों यानी 350 दिनों तक चलती रही. उस दौर में यह किसी रिकॉर्ड से कम नहीं था. दर्शक बार-बार फिल्म देखने पहुंच रहे थे और थिएटर्स में इसकी शानदार कमाई जारी रही. इसी दमदार प्रदर्शन की वजह से इसे गोल्डन जुबली फिल्म का दर्जा मिला. इस सफलता ने देव आनंद को हिंदी सिनेमा के सबसे बड़े सितारों की कतार में खड़ा कर दिया.
इस रोल के लिए पहली पसंद नहीं थीं वहीदा रहमान
फिल्म में देव आनंद के साथ वहीदा रहमान की जोड़ी ने खूब वाहवाही लूटी. लेकिन दिलचस्प बात ये है कि वो इस रोल के लिए मेकर्स की पहली पसंद नहीं थीं. पहले यह किरदार शायरा बानो को ऑफर किया गया था, लेकिन उन्होंने किसी वजह से इसे ठुकरा दिया. इसके बाद वहीदा रहमान फिल्म से जुड़ीं और अपनी शानदार अदाकारी से इस किरदार को हमेशा के लिए यादगार बना दिया.
कहानी भी सुपरहिट, गाने भी एवरग्रीन
गाइड की कहानी मशहूर लेखक आर. के. नारायण के उपन्यास पर आधारित थी. फिल्म के गानों ने भी ऐसा जादू चलाया कि आज भी लोग उन्हें बड़े शौक से सुनते हैं. गाता रहे मेरा दिल और आज फिर जीने की तमन्ना है जैसे गाने आज भी सदाबहार हिट माने जाते हैं. यही वजह है कि 61 साल बाद भी गाइड सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि हिंदी सिनेमा की अमर विरासत मानी जाती है.
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