मुंबई:
महिला सशक्तिकरण पर बने अपने 'माई च्वॉयस' वीडियो के विवाद पर आखिरकार दीपिका पादुकोण ने अपना पक्ष रखा है और NDTV को बताया कि वीडियो पर विवाद और सोशल मीडिया पर बैकलैश से उन्हें दुख हुआ।
इस वीडियो में महिला सशिक्तिकरण के लिए शादी का फ़ैसला, स्ट्रेट या समलैंगिक होने की आज़ादी, कपड़े पहनने की आज़ादी से लेकर इनफिडेलिटी यानी शादी में बेवफाई की आज़ादी जैसी शर्तों को दीपिका ने गिनाया था।
सोशल मीडिया में इस वीडियो को लेकर हुए विवाद पर दीपिका ने NDTV से कहा कि विवाद बेबुनियाद था, मुझे बहुत ठेस पहुंची जब इंडस्ट्री से कुछ लोगों ने मेरे बारे में बहुत कुछ कहा। 'माई च्वॉयस' वीडियो में ऐसी कुछ बातें थीं, जो निजी तौर पर मैं नहीं मानती। जैसे शादी में बेवफाई मैं ये बात नहीं मानती। किसी भी रिश्ते में बेवफाई नहीं होनी चाहिए। मेरा खुद का पक्ष पूछें तो महिला सशक्तिकरण के मायने मेरे लिए हैं कि मर्दों और औरतों में समानता हो। दोनों को फैसले लेने की एक जैसी आज़ादी होनी चाहिए।
'माई च्वॉयस' वीडियो बनाने का मेरा मक्सद था ये दिखाना कि महिलाएं पुरुषों से कम नहीं, लेकिन लोगों ने मान लिया कि वीडियो में कही गई सारी बातों को मैं मानती हूं। लेकिन उनका ये मानना गलत है।
वीडियो कैंपेन रिलीज़ होने के चंद घंटे बाद ही इस वीडियो को 33 लाख से ज़्यादा लोग देख चुके थे और वीडियो की तारीफ़ भी हो रही है साथ ही आलोचना भी। इस पर दीपिका ने NDTV से कहा, मुझे बुरा लगा कि लोगों ने अपने आप धारणा बना ली और मेरे बारे में काफी कुछ लिखा-बोला। सशक्तिकरण सिर्फ़ आपके पहनावे पर निर्भर नहीं करता, इसका मतलब है रोज़गार और हिम्मत। ये अच्छा कदम था। पर इसके संदेश को तोड़-मरोड़ के सनसनीखेज़ बनाया गया।
इस वीडियो में महिला सशिक्तिकरण के लिए शादी का फ़ैसला, स्ट्रेट या समलैंगिक होने की आज़ादी, कपड़े पहनने की आज़ादी से लेकर इनफिडेलिटी यानी शादी में बेवफाई की आज़ादी जैसी शर्तों को दीपिका ने गिनाया था।
सोशल मीडिया में इस वीडियो को लेकर हुए विवाद पर दीपिका ने NDTV से कहा कि विवाद बेबुनियाद था, मुझे बहुत ठेस पहुंची जब इंडस्ट्री से कुछ लोगों ने मेरे बारे में बहुत कुछ कहा। 'माई च्वॉयस' वीडियो में ऐसी कुछ बातें थीं, जो निजी तौर पर मैं नहीं मानती। जैसे शादी में बेवफाई मैं ये बात नहीं मानती। किसी भी रिश्ते में बेवफाई नहीं होनी चाहिए। मेरा खुद का पक्ष पूछें तो महिला सशक्तिकरण के मायने मेरे लिए हैं कि मर्दों और औरतों में समानता हो। दोनों को फैसले लेने की एक जैसी आज़ादी होनी चाहिए।
'माई च्वॉयस' वीडियो बनाने का मेरा मक्सद था ये दिखाना कि महिलाएं पुरुषों से कम नहीं, लेकिन लोगों ने मान लिया कि वीडियो में कही गई सारी बातों को मैं मानती हूं। लेकिन उनका ये मानना गलत है।
वीडियो कैंपेन रिलीज़ होने के चंद घंटे बाद ही इस वीडियो को 33 लाख से ज़्यादा लोग देख चुके थे और वीडियो की तारीफ़ भी हो रही है साथ ही आलोचना भी। इस पर दीपिका ने NDTV से कहा, मुझे बुरा लगा कि लोगों ने अपने आप धारणा बना ली और मेरे बारे में काफी कुछ लिखा-बोला। सशक्तिकरण सिर्फ़ आपके पहनावे पर निर्भर नहीं करता, इसका मतलब है रोज़गार और हिम्मत। ये अच्छा कदम था। पर इसके संदेश को तोड़-मरोड़ के सनसनीखेज़ बनाया गया।
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