फिल्म रिलीज होने से पहले उसका विवादों में आना कोई नई बात नहीं है. लेकिन एक समय ऐसा भी था, जब एक फिल्म को लेकर माहौल इतना गर्म हो गया कि दंगों की धमकी तक दे दी गई. इस मुश्किल दौर से गुजरने वाले स्टार थे दारा सिंह. उनकी एक पंजाबी फिल्म को लेकर इतना विरोध हुआ कि फिल्म पर रोक लग गई, रिलीज अटक गई और उन्हें भारी नुकसान भी झेलना पड़ा. दिलचस्प बात ये है कि बाद में संजय गांधी की मदद से ये फिल्म आखिरकार सिनेमाघरों तक पहुंच सकी.
इमरजेंसी के दौर में फंसी फिल्म
दारा सिंह ने इस पंजाबी फिल्म में सिर्फ एक्टिंग ही नहीं की थी, बल्कि इसका निर्देशन भी खुद किया था. फिल्म की कहानी सिख इतिहास से जुड़ी थी. शूटिंग के दौरान उन्हें बिल्कुल भी अंदाजा नहीं था कि रिलीज के वक्त ये फिल्म इतने बड़े विवाद में फंस जाएगी. इमरजेंसी के दौर में जैसे ही फिल्म रिलीज की तैयारी शुरू हुई, विरोध की आवाजें भी तेज हो गईं.
नाम बदला, फिर भी नहीं थमा बवाल
शुरुआत में फिल्म का नाम 'राज करेगा खालसा' रखा गया था. बाद में विवाद से बचने के लिए इसका नाम बदलकर 'सवा लाख से एक लड़ाऊं' कर दिया गया. लेकिन नाम बदलने के बाद भी मामला शांत नहीं हुआ. कुछ संगठनों और नेताओं ने फिल्म का विरोध शुरू कर दिया. उनका कहना था कि फिल्म की कुछ बातों पर उन्हें आपत्ति है.
दंगों की धमकी से रुक गई रिलीज
मामला धीरे-धीरे इतना बढ़ गया कि फिल्म की रिलीज पर रोक लग गई. विरोध करने वालों ने दंगों की चेतावनी भी दी. दारा सिंह ने कई लोगों को फिल्म देखकर फैसला लेने की बात कही, लेकिन किसी ने उनकी बात नहीं मानी. उन्होंने अलग-अलग लोगों से मदद भी मांगी, लेकिन विवाद खत्म नहीं हुआ. इस पूरे मामले में उन्हें लाखों रुपये का नुकसान उठाना पड़ा.
संजय गांधी की मदद से मिली राहत
करीब तीन साल बाद दारा सिंह की मुलाकात संजय गांधी से हुई. उन्होंने फिल्म पर लगी रोक की पूरी कहानी बताई. इसके बाद फिल्म को रिलीज करने का रास्ता साफ हुआ और आखिरकार ये सिनेमाघरों तक पहुंच गई. हालांकि इतनी देरी हो चुकी थी कि फिल्म अपनी पूरी लागत भी नहीं निकाल पाई. बाद में विरोध करने वालों में से एक ने दारा सिंह को चिट्ठी लिखकर माफी भी मांगी.
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