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केशव प्रसाद मिश्र की वो उपन्यास, जिस पर बनी भोजपुरी और हिंदी की 2 सुपरहिट फिल्में, 1982 वाली ने काटा गदर, 1994 वाली बनी ब्लॉकबस्टर

केशव प्रसाद मिश्र के उपन्यास ‘कोहबर की शर्त’ पर बनी ‘नदिया के पार’ और ‘हम आपके हैं कौन’ ने अलग-अलग दौर में बॉक्स ऑफिस पर सफलता के झंडे गाड़े और दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाई.

केशव प्रसाद मिश्र की वो उपन्यास, जिस पर बनी भोजपुरी और हिंदी की 2 सुपरहिट फिल्में, 1982 वाली ने काटा गदर, 1994 वाली बनी ब्लॉकबस्टर
प्रसिद्ध उपन्यास पर बनी थे ये दो फिल्में

हिंदी सिनेमा में कई ऐसी फिल्में बनी हैं, जिनकी कहानियां साहित्य से प्रेरित रही हैं. लेकिन बहुत कम लोगों को पता है कि 1982 की सुपरहिट फिल्म ‘नदिया के पार' और 1994 की ब्लॉकबस्टर ‘हम आपके हैं कौन' की जड़ें एक ही उपन्यास से जुड़ी हुई हैं. प्रसिद्ध साहित्यकार केशव प्रसाद मिश्र के उपन्यास ‘कोहबर की शर्त' ने इन दोनों फिल्मों को जन्म दिया. 18 जून 1982 को रिलीज हुई ‘नदिया के पार' ने ग्रामीण भारत की सादगी, पारिवारिक रिश्तों और प्रेम को जिस खूबसूरती से पर्दे पर उतारा, उसने दर्शकों का दिल जीत लिया. वहीं 12 साल बाद इसी कहानी को नए अंदाज में पेश करते हुए ‘हम आपके हैं कौन' बनाई गई, जिसने बॉक्स ऑफिस पर इतिहास रच दिया और भारतीय सिनेमा की सबसे सफल फिल्मों में शामिल हो गई.

‘कोहबर की शर्त' से निकली थी ‘नदिया के पार' की कहानी

राजश्री प्रोडक्शंस के बैनर तले बनी ‘नदिया के पार' का निर्देशन गोविंद मूनिस ने किया था. फिल्म में सचिन पिलगांवकर और साधना सिंह मुख्य भूमिकाओं में नजर आए थे. यह फिल्म पूर्वी उत्तर प्रदेश के ग्रामीण परिवेश पर आधारित थी और इसमें गांव की संस्कृति, पारिवारिक परंपराओं और रिश्तों की मिठास को बेहद सहज तरीके से दिखाया गया था.

फिल्म की कहानी केशव प्रसाद मिश्र के उपन्यास ‘कोहबर की शर्त' के पहले हिस्से पर आधारित थी. ‘नदिया के पार' ने अपनी सादगी और भावनात्मक कहानी के दम पर दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाई. इसके गाने भी बेहद लोकप्रिय हुए और आज भी उन्हें याद किया जाता है. कम बजट में बनी इस फिल्म ने शानदार सफलता हासिल की थी.

12 साल बाद बनी ‘हम आपके हैं कौन'

इसके बाद, 1994 में निर्देशक सूरज बड़जात्या ने इसी उपन्यास पर हिंदी फिल्म हम आपके हैं कौन बनाई. फिल्म में सलमान खान और माधुरी दीक्षित की जोड़ी ने दर्शकों का दिल जीत लिया. हालांकि ‘हम आपके हैं कौन' पूरी तरह ‘कोहबर की शर्त' का सीधा रूपांतरण नहीं थी, लेकिन इसकी मूल कहानी और रिश्तों का आधार उसी उपन्यास से प्रेरित था. फिल्म ने भारतीय बॉक्स ऑफिस पर रिकॉर्ड तोड़ कमाई की और उस दौर की सबसे बड़ी ब्लॉकबस्टर बन गई.

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दिलचस्प बात यह है कि एक ही उपन्यास से निकली दो फिल्मों ने अलग-अलग दौर में दर्शकों के दिलों पर राज किया. एक ने गांव की सादगी से लोगों को जोड़ा, तो दूसरी ने भारतीय पारिवारिक मनोरंजन को नया आयाम दिया.
 

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