हम लाए हैं, आपके पसंदीदा अभिनेताओं-अभिनेत्रियों की उन भूमिकाओं की सूची, जो यादगार रहीं, लेकिन जिनके लिए वे निर्देशकों की पहली पसंद कतई नहीं थे...
नई दिल्ली:
'सुपरस्टार ऑफ द मिलेनियम' कहकर पुकारे जाने वाले बॉलीवुड के 'शहंशाह' अमिताभ बच्चन का करियर आज जिस ऊंचाई पर है, उसमें प्रकाश मेहरा की 'ज़ंजीर' का योगदान अविस्मरणीय है, लेकिन क्या अब कोई हिन्दी फिल्म दर्शक 'ज़ंजीर' की कल्पना अमिताभ बच्चन के बिना कर सकता है...
क्या कोई हिन्दी फिल्म प्रेमी राजेश खन्ना की जगह किसी भी और अभिनेता का तसव्वुर 'आनंद' के रूप में कर पाएगा... क्या 'मदर इंडिया' के बिना सुनील दत्त का करियर और ज़िन्दगी वैसी ही होती, जैसी बाद में रही... क्या संजय दत्त के बिना 'मुन्नाभाई एमबीबीएस' उसी तरह की हिट साबित हो पाती, जैसी वह हुई...
क्या सलमान खान का करियर आज उसी बुलंदी पर हो सकता था, अगर वह 'मैंने प्यार किया' के हीरो नहीं बनते... क्या अरबाज़ खान या अनिल कपूर 'बाज़ीगर' की भूमिका को वैसा ही प्रभावशाली बना पाते, जैसा शाहरुख खान ने बना दिया...
क्या 'नगीना' में श्रीदेवी वाली छाप छोड़ने में कामयाब हो पातीं जया बच्चन, जो नायिका के रूप में निर्देशक की पहली पसंद थीं... क्या फिल्म 'दीवार' में वैजयन्तीमाला भी 'मां' के किरदार को वैसा ही 'कालजयी' बना पातीं, जैसा निरूपा रॉय ने बना दिया...
ऐसे ही बहुत-से सवाल उपज रहे हैं, उन तथ्यों से, जो हमारे पास मौजूद हैं... सो, हम आपके लिए लेकर आए हैं, आपके पसंदीदा अभिनेताओं और अभिनेत्रियों की उन भूमिकाओं की सूची, जिनके लिए दरअसल वह निर्माता-निर्देशकों की पहली पसंद नहीं थे... वे भूमिकाएं किस्मत ने उनकी झोली में डलवाईं, और फिर उन्हें उसी रोल के लिए बहुत कामयाबी, शोहरत और मकबूलियत हासिल हुई...
'ज़ंजीर' के निर्देशक के लिए पांचवीं पसंद थे अमिताभ बच्चन...
सबसे पहले बात करते हैं, अमिताभ बच्चन की, जिनके करियर को फिल्म 'ज़ंजीर' से क्या मुकाम हासिल हुआ, यह सभी जानते हैं, लेकिन यह सच्चाई बेहद कम लोग जानते हैं कि दरअसल, अमिताभ इस फिल्म में निभाई इंस्पेक्टर विजय श्रीवास्तव की भूमिका के लिए निर्देशक प्रकाश मेहरा के लिए पांचवीं पसंद थे... मेहरा इस रोल के लिए 'जानी' राजकुमार को साइन करना चाहते थे, लेकिन उन्होंने बहुत विचित्र कारण बताकर फिल्म ठुकरा दी... राजकुमार के अनुसार, उन्हें उस तेल की गंध पसंद नहीं आई, जो प्रकाश मेहरा अपने सिर में लगाते थे... इसके बाद उस भूमिका की पेशकश धर्मेन्द्र से की गई, लेकिन उनके पास तारीखें नहीं थीं... तीसरी पसंद के रूप में देव आनंद के पास पहुंचा गया, लेकिन इसलिए बात नहीं बनी, क्योंकि वह अपने गीत अपनी ही आवाज़ में रिकॉर्ड करना चाहते थे... अब प्रकाश मेहरा ने राजेश खन्ना से उम्मीद लगाई, लेकिन वह अपनी 'रोमांटिक' छवि के विपरीत भूमिका निभाने की हिम्मत नहीं जुटा पाए... इसके बाद लगभग हताश हो चुके मेहरा को 'ज़ंजीर' में 'शेर खान' की भूमिका निभाने वाले प्राण ने सलाह दी कि वह उन्हीं दिनों रिलीज़ हुई फिल्म 'बॉम्बे टु गोवा' में काम कर रहे 'नए लड़के' को देखें... बस, आगे क्या हुआ, यह तो बॉलीवुड के इतिहास में दर्ज है ही...
'शोले' का 'जय' भी अमिताभ को नहीं, शत्रुघ्न सिन्हा को बनना था...
इसके अलावा फिल्म 'शोले' में निभाई 'जय' की भूमिका के लिए भी अमिताभ बच्चन पहली पसंद नहीं थे... निर्देशक रमेश सिप्पी दरअसल शत्रुघ्न सिन्हा को उस भूमिका में रखना चाहते थे, लेकिन धर्मेन्द्र की सिफारिश से वह रोल अमिताभ को मिल गया...
'शोले' में 'गब्बर सिंह' भी अमजद खान नहीं बनने वाले थे...
इसके अलावा फिल्म 'शोले' में ही 'डाकू गब्बर सिंह' का रोल निभाकर अपने करियर को आकाश की बुलंदियों पर देखने में कामयाब रहे अमजद खान भी दरअसल सिप्पी की पहली पसंद नहीं थे, लेकिन डैनी डेनजोंग्पा चूंकि अफगानिस्तान में फिरोज़ खान की फिल्म 'धर्मात्मा' की शूटिंग में व्यस्त थे, इसलिए उन्होंने रोल ठुकरा दिया... इसके बाद भी अमजद खान को इस भूमिका के लिए अनिच्छा से ही साइन किया गया था, क्योंकि पटकथा लेखक जावेद अख्तर को लगता था कि अमजद की आवाज़ उतनी भारी नहीं है, जितनी किसी खल चरित्र को प्रभावी ढंग से निभाने के लिए ज़रूरी होती है... बहरहाल, रोल अमजद खान की झोली में आया, और हिन्दी फिल्मों के लिए खल चरित्रों की परिभाषा ही बदल गई...
'नया दौर' के लिए दिलीप नहीं, अशोक कुमार थे बीआर की पहली पसंद...
निर्देशक बीआर चोपड़ा की सुपरहिट फिल्म 'नया दौर' के लिए अगर 'दादामुनि' अशोक कुमार मान गए होते, तो दिलीप कुमार के करियर में यह सुनहरी फिल्म नहीं जुड़ने वाली थी... इसके अलावा बीआर चोपड़ा ने फिल्म में नायिका की भूमिका के लिए तत्कालीन सुपरस्टार मधुबाला को साइन किया था, लेकिन उनके पिता अताउल्लाह खान ने अपनी बेटी को भोपाल जाकर शूटिंग करने की अनुमति देने से मना कर दिया, क्योंकि उन्हें लगता था कि यह दिलीप कुमार और मधुबाला को फिर करीब लाने की कोशिशों का हिस्सा है, जिनके बीच कथित रूप से अफेयर चलता रहा था... इस बात को लेकर बीआर चोपड़ा ने मधुबाला और उनके पिता अताउल्लाह खान पर मुकदमा भी किया, लेकिन अंततः 'नया दौर' की नायिका की भूमिका वैजयन्तीमाला को मिल गई...
'मदर इंडिया' का 'बिरजू' भी सुनील दत्त नहीं, दिलीप कुमार हो सकते थे...
इसी तरह बॉलीवुड की आज तक की सबसे मशहूर और हिट फिल्मों में शुमार की जाने वाली निर्देशक महबूब खान की 'मदर इंडिया' में 'बिरजू' की भूमिका सुनील दत्त को नहीं मिलने वाली थी... उल्लेखनीय है कि सुनील दत्त को इस फिल्म ने न सिर्फ बॉलीवुड में बेहद ऊंचा दर्जा दिलाया, बल्कि उनकी शादीशुदा ज़िन्दगी भी इसी फिल्म की बदौलत आगे बढ़ी... दरअसल 'मदर इंडिया' की शूटिंग के दौरान एक दृश्य में सचमुच आग में फंस जाने पर अपनी 'मां' की भूमिका निभा रही नरगिस को बचाने के बाद दोनों के बीच प्यार हो गया था... वास्तव में महबूब खान इस भूमिका के लिए भारतीय मूल के हॉलीवुड अभिनेता साबू दस्तगीर को साइन करना चाहते थे, जिन्हें 'द थीफ ऑफ बगदाद' और 'जंगल बुक' जैसी फिल्मों के लिए काफी प्रसिद्धि मिल चुकी थी... तब तक अमेरिकी नागरिक बन चुके साबू को दुर्भाग्य से भारत में काम करने के लिए वर्क परमिट नहीं मिल पाया, और महबूब खान ने दिलीप कुमार को पेशकश करनी चाही, लेकिन उनके नाम पर नरगिस सहमत नहीं हुईं, क्योंकि उन्हें लगा कि पिछली फिल्मों में रोमांटिक जोड़ी के रूप में दर्शकों के सामने आ चुके दिलीप और नरगिस को दर्शक मां-बेटे की भूमिका में पसंद नहीं कर पाएंगे... और बस, फिर सुनील दत्त को 'बिरजू' बना दिया गया...
'साहेब, बीवी और ग़ुलाम' का 'ग़ुलाम' हो सकते थे शशि कपूर...
निर्देशक गुरुदत्त की प्रसिद्ध फिल्म 'साहेब, बीवी और ग़ुलाम' में 'ग़ुलाम' की भूमिका के लिए दरअसल शशि कपूर पहली पसंद थे, लेकिन गुरुदत्त और अबरार अल्वी के साथ होने वाली बैठक के लिए ढाई घंटे देर से पहुंचने के कारण उन्हें यह रोल नहीं मिल पाया... इसके बाद बांग्ला अभिनेता बिस्वजीत के बारे में सोचा गया, और यदि बात बन जाती तो 'साहेब, बीवी और ग़ुलाम' उनकी डेब्यू हिन्दी फिल्म होती... लेकिन गुरुदत्त के साथ एक्सक्लूसिव कॉन्ट्रैक्ट साइन करने के लिए बिस्वजीत तैयार नहीं हुए, और आखिरकार 'ग़ुलाम', यानि 'भूतनाथ' की भूमिका गुरुदत्त ने स्वयं निभाई...
शशि या राज कपूर मान जाते, तो राजेश खन्ना नहीं बन पाते 'आनंद'...
हिन्दी फिल्मोद्योग के पहले सुपरस्टार कहे जाने वाले 'काका' राजेश खन्ना की सबसे मशहूर फिल्मों का ज़िक्र किया जाए तो 'आनंद' का शुमार करना कतई लाज़िमी है... लेकिन अगर निर्देशक ऋषिकेश मुखर्जी की पेशकश को राज कपूर या शशि कपूर ने कबूल कर लिया होता तो राजेश खन्ना को यह भूमिका मिलती ही नहीं... दरअसल, एक बार अपने परम मित्र राज कपूर के बीमार पड़ जाने पर उनकी मौत की आशंका से विचलित होने पर ही ऋषिकेश मुखर्जी ने 'आनंद' बनाने का विचार बनाया था... लेकिन बाद में उन्होंने यह सोचकर राज कपूर को नायक बनाने का विचार छोड़ दिया, क्योंकि वह पर्दे पर भी अपने मित्र की मौत का ख्याल नहीं कर पा रहे थे... फिर यह भूमिका राज के भाई शशि कपूर को देने के बारे में सोचा गया, लेकिन उन्होंने यह भूमिका निभाने से इनकार कर दिया... दोनों कपूर बंधुओं के अतिरिक्त ऋषिकेश दा ने 'आनंद' की शीर्षक भूमिका के लिए बांग्ला अभिनेता उत्तम कुमार और अभिनेता-पार्श्वगायक किशोर कुमार के बारे में भी सोचा था, लेकिन आखिर में करियर को बदलकर रख देने वाली यह भूमिका राजेश खन्ना को मिली...
तो फिर 'तीसरी मंज़िल' के हीरो शम्मी कपूर नहीं, देव आनंद होते...
निर्देशक नासिर हुसैन की प्रसिद्ध फिल्मों 'तीसरी मंज़िल' और 'तुमसा नहीं देखा' की कल्पना भी शम्मी कपूर के बिना नहीं की जा सकती, लेकिन इन दोनों ही फिल्मों के लिए नासिर साहब की पहली पसंद देव आनंद थे, लेकिन शम्मी कपूर के भाग्य में ये फिल्में थीं, और इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर भी नहीं देखा...
मजबूरी में मुमताज़ को दी गई थी 'खिलौना' में नायिका की भूमिका...
अपने समय में बेहद हिट रही फिल्म 'खिलौना' के लिए मुमताज़ के बारे में सोचा भी नहीं गया था, लेकिन बताया जाता है कि उस दौर में शायद ही कोई अभिनेत्री रही होगी, जिसने यह भूमिका ठुकरा न दी हो... आखिरकार मजबूरी में मुमताज़ को साइन किया गया, और न सिर्फ फिल्म हिट रही, बल्कि मुमताज़ ने संजीव कुमार के सामने निभाई इस भूमिका के लिए अपने करियर का एकमात्र 'सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री' का फिल्मफेयर पुरस्कार हासिल किया...
'वक्त' के लिए पृथ्वीराज और उनके बेटे थे बीआर की पहली पसंद...
एक और सुपरहिट फिल्म थी 'वक्त', जिसमें एक भूकम्प की वजह से अपने माता-पिता से बिछुड़ गए तीन भाइयों की कहानी दिखाई गई है... बीआर चोपड़ा इस फिल्म को पृथ्वीराज कपूर और उनके तीन बेटों राज, शम्मी और शशि के साथ बनाना चाहते थे... इसके बाद अन्य फिल्मकारों ने बीआर चोपड़ा का ध्यान इस बात की ओर दिलाया कि फिल्म के कुछ दृश्यों में जब ये तीनों भाई और पिता एक-दूसरे से अनजान बनने का अभिनय करेंगे, तो दर्शक संभवतः उसे हज़म नहीं कर पाएंगे... इस पर बीआर ने उस आइडिया को छोड़ दिया, और फिर फिल्म में पिता का रोल मिला बलराज साहनी को, और बेटों की भूमिकाएं निभाईं राजकुमार, सुनील दत्त और शशि कपूर ने... इस फिल्म का निर्दशन भी बीआर चोपड़ा ने छोटे भाई यश चोपड़ा से करवाया...
तो फिर जया-रेखा नहीं, परवीन-स्मिता होतीं 'सिलसिला' की नायिकाएं...
कथित रूप से अमिताभ बच्चन की असल ज़िन्दगी की कहानी दर्शाने वाली एक बेहद महत्वपूर्ण फिल्म रही है 'सिलसिला', जिसमें उनके साथ उनकी पत्नी जया बच्चन और प्रेमिका कही जाने वाली रेखा ने काम किया था... इस फिल्म के निर्देशक थे यश चोपड़ा, जिन्होंने इसके लिए पहले परवीन बाबी और स्मिता पाटिल को साइन कर लिया था... इसके बाद एक दिन बातचीत के दौरान उन्होंने अमिताभ बच्चन से कहा कि वह दरअसल इस फिल्म में जया और रेखा को कास्ट करना चाहते थे... उम्मीद के विपरीत अमिताभ ने बिना हिचक अनुमति दे दी... असल ज़िन्दगी में एक-दूसरे की 'प्रेम-प्रतिद्वंद्वी' कहलाने वाली जया और रेखा ने भी फिल्म के लिए हां कर दी, और इतिहास बना... उधर, परवीन बाबी ने कास्ट बदले जाने को सहजता से कबूल किया, लेकिन स्मिता पाटिल इस बात से नाराज़ हो गई थीं...
जया बच्चन के ठुकराने की वजह से श्रीदेवी को मिली थी 'नगीना'...
अपने समय की बेहद हिट रही फिल्म 'नगीना' ने श्रीदेवी को घर-घर की चहेती बना दिया था, लेकिन यह फिल्म उन्हें इसलिए मिली थी, क्योंकि जया बच्चन ने इस फिल्म में काम करने से इनकार कर दिया था, क्योंकि वह सांपों से बेहद डरती हैं...
सलमान खान नहीं थे 'मैंने प्यार किया' के 'ओरिजिनल' हीरो...
अब आज के सुपरस्टार सल्लू भाई, यानि सलमान खान की बात करते हैं... क्या आप जानते हैं कि सलमान को नायक के तौर पर अभूतपूर्व सफलता दिलाने वाली फिल्म 'मैंने प्यार किया' के लिए पहली पसंद विकास भल्ला नामक एक अभिनेता थे, जो अब टीवी धारावाहिकों में काम करते हैं...
तो शाहरुख खान नहीं, अरबाज़ खान होते 'बाज़ीगर' के हीरो...
इसी तरह, बॉलीवुड के 'बादशाह' शाहरुख खान को हरफनमौला अभिनेता के रूप में स्थापित करने वाली फिल्म 'बाज़ीगर' के लिए पहले अक्षय कुमार, अरबाज़ खान, सलमान खान और अनिल कपूर को चुना गया था, लेकिन इन सबने एन्टी-हीरो का किरदार निभाने से इनकार कर दिया, जिसकी वजह से से शाहरुख के हाथ यह फिल्म आई...
संजय दत्त नहीं, शाहरुख खान बनने वाले थे 'मुन्नाभाई'...
क्या आप जानते हैं कि आज 'मुन्नाभाई' के नाम काफी मशहूर हो चुके संजय दत्त की जगह फिल्म में शाहरुख खान को लिए जाने की योजना थी... शाहरुख के फिल्म में काम करने से मना करने के बावजूद फिल्म के अंत में दिखाए गए क्रेडिट्स में क्रिएटिव इनपुट देने के लिए उनका शुक्रिया अदा किया गया है... दरअसल, शुरुआत में संजय दत्त को कैंसर के मुस्लिम मरीज की उस भूमिका के लिए चुना गया था, जो बाद में फिल्म में जिमी शेरगिल ने निभाई, और उनके करियर की यादगार भूमिकाओं में शुमार की जाती है...
अजय देवगन ने छोड़ी, इसलिए सलमान खान को मिली थी 'करण अर्जुन'...
वैसे सलमान खान की एक और हिट फिल्म 'करण अर्जुन' में उन्हें शाहरुख खान के साथ काम करने का मौका इसलिए मिला, क्योंकि निर्माता-निर्देशक राकेश रोशन से कामकाजी मतभेदों के चलते अजय देवगन ने 'करण अर्जुन' छोड़ दी थी...
'संगम' का 'गोपाल' भी दिलीप कुमार ही होते, राजेन्द्र कुमार नहीं...
राज कपूर की हिट फिल्म 'संगम' में नायक के मित्र का रोल संभवतः दिलीप कुमार ने ही किया होता, क्योंकि वह राज कपूर की पहली पसंद थे... दरअसल, 'संगम' दो दोस्तों की कहानी है, जो एक ही लड़की से प्यार करने लगते हैं... बहरहाल, दिलीप साहब ने यह भूमिका निभाने से इनकार कर दिया, क्योंकि वह फिल्म के क्लाईमेक्स से संतुष्ट नहीं थे, और नहीं चाहते थे कि 'गोपाल' का किरदार अपना बलिदान दे... इसके बाद राज कपूर ने देव आनंद से बात की, जिन्होंने तारीखों की समस्या की वजह से फिल्म में काम करने में असमर्थता ज़ाहिर कर दी, और आखिरकार यह भूमिका 'जुबली कुमार' कहे जाने वाले राजेन्द्र कुमार की झोली में आ गिरी...
'दीवार' में वैजयन्तीमाला हो सकती थीं अमिताभ-शशि की मां...
फिर अमिताभ बच्चन की फिल्म की बात... यश चोपड़ा की ही एक और 'कल्ट' फिल्म 'दीवार' में दरअसल पहले शत्रुघ्न सिन्हा और नवीन निश्चल को साइन किया गया था, और उस समय फिल्म में 'मां' की भूमिका वैजयन्तीमाला निभाने वाली थीं... लेकिन जब यश चोपड़ा ने नायकों के रूप में शत्रुघ्न और नवीन के स्थान पर अमिताभ बच्चन और शशि कपूर को साइन कर लिया, तो वैजयन्तीमाला ने भी इनकार कर दिया... इसके बाद 'मां' की 'कालजयी' भूमिका निभाने का मौका मिला 'दो बीघा ज़मीन' जैसी फिल्मों की नायिका निरूपा रॉय को... और इस भूमिका ने निरूपा रॉय के करियर को नया जीवन और दिशा दे दी...
बहन की शादी के लिए जितेंद्र ने कबूल की शत्रुघ्न की ठुकराई फिल्म...
हिट फिल्म 'फर्ज़' में 'मस्त बहारों का मैं आशिक...' गीत से हंगामा मचा देने वाले जितेन्द्र दरअसल इस फिल्म में नायक की भूमिका के लिए निर्देशक की पहली पसंद नहीं थे, लेकिन शत्रुघ्न सिन्हा के इनकार कर देने के बाद जितेन्द्र को यह रोल दिया गया... बताया जाता है कि जितेन्द्र ने भी यह भूमिका सिर्फ इसलिए कबूल की थी, क्योंकि वह अपनी बहन के शादी के लिए पैसे जुटाना चाहते थे...
'चांदनी' में काम करने से इनकार कर दिया था माधुरी, मीनाक्षी ने...
यश चोपड़ा की ही एक और हिट फिल्म 'चांदनी' में नायिका श्रीदेवी के साथ एक छोटी-सी, लेकिन महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का मौका जूही चावला को इसलिए मिला था, क्योंकि माधुरी दीक्षित, मीनाक्षी शेषाद्रि तथा माधवी ने उस भूमिका के लिए साफ इनकार कर दिया था...
रणधीर कपूर निभाने वाले थे 'जोकर' के बचपन की भूमिका...
निर्देशक राज कपूर की एक और हिट फिल्म 'मेरा नाम जोकर' में नायक के बचपन की भूमिका के लिए उनके पुत्र रणधीर कपूर को चुना गया था, लेकिन उनका वज़न ज़रूरत से ज़्यादा होने के कारण छोटे भाई ऋषि कपूर को वह भूमिका निभानी पड़ी, और उनका बॉलीवुड करियर अपने बड़े भाई से पहले शुरू हो गया...
'रंग दे बसंती' में आमिर के साथ ऋतिक-शाहरुख को चाहते थे मेहरा...
राकेश ओमप्रकाश मेहरा की हिट फिल्म 'रंग दे बसंती' के तीन नायकों के लिए उनकी 'असंभव' विश-लिस्ट में आमिर खान के साथ शाहरुख खान और ऋतिक रोशन शामिल थे, जिनमें से आखिर सिर्फ आमिर ही फिल्म का हिस्सा बन पाए...
आठ हीरोइनों के ठुकराने के बाद रानी को मिली थी 'कुछ कुछ होता है'...
करण जौहर की सुपरहिट फिल्म 'कुछ कुछ होता है' में 'टीना' की सहायक भूमिका के लिए रानी मुखर्जी नवीं पसंद थीं... इस रोल को ठुकराने वाली नायिकाओं में करिश्मा कपूर और रवीना टंडन भी शामिल थीं... करण जौहर का खुद भी यही कहना रहा है कि उन्हें शुरुआत में इस बात का पक्का भरोसा नहीं हो पा रहा था कि रानी उस भूमिका में जंच पाएंगी या नहीं... लेकिन रानी खूब जंचीं, और न सिर्फ करण की फिल्मों से हमेशा के लिए जुड़ गईं, बल्कि एक बेहतरीन अभिनेत्री के रूप में खुद को स्थापित किया...
तो 'राजा हिन्दुस्तानी' की 'रानी' बन जातीं ऐश्वर्या राय बच्चन...
अब बात, ऐश्वर्या राय बच्चन की... फिल्म 'राजा हिन्दुस्तानी' की नायिका के किरदार की पेशकश पहले ऐश्वर्या को ही की गई थी, और वही उनका बॉलीवुड में डेब्यू (पदार्पण) भी होता, लेकिन उस समय वह 'मिस वर्ल्ड' की कमिटमेंट्स से बंधी हुई थीं, और उन्होंने अपने फिल्म करियर के बारे में भी कोई ठोस निर्णय तब तक नहीं लिया था... इसलिए वह भूमिका करिश्मा कपूर को मिली, और उनके करियर की सबसे बड़ी हिट फिल्मों में शुमार हुई...
करीना 'हां' कह देती, तो ऐश्वर्या को नहीं मिलती 'हम दिल दे चुके सनम'...
मधुर भंडारकर की हालिया फिल्म 'हीरोइन' में ऐश्वर्या राय बच्चन का स्थान करीना कपूर ने लिया था... लेकिन क्या आप जानते हैं कि अगर करीना कपूर ने हां कर दी होती तो ऐश्वर्या राय बच्चन को अपने करियर की सबसे महत्वपूर्ण भूमिकाओं में से एक - 'हम दिल दे चुके सनम' की 'नन्दिनी' - से हाथ धोना पड़ जाता...
'परिणीता' भी विद्या बालन नहीं, ऐश्वर्या ही बनने वाली थीं...
फिल्मकार विधू विनोद चोपड़ा भी अपनी फिल्म 'परिणीता' में 'ललिता' की भूमिका ऐश्वर्या राय बच्चन को देना चाहते थे, क्योंकि उनके लिए नायिका ऐसी होनी चाहिए, जो खूबसूरत तो हो ही, नायिका-प्रधान फिल्म को खींच भी सके... लेकिन निर्देशक प्रदीप सरकार ने विधू को इस बात के लिए राज़ी किया कि वह विद्या बालन को साइन कर लें, और कहने की ज़रूरत नहीं कि वह भूमिका बॉलीवुड की सबसे दमदार 'डेब्यू' भूमिकाओं में गिनी जाती है...
(अनुवाद एनडीटीवीख़बर.कॉम टीम द्वारा...)
क्या कोई हिन्दी फिल्म प्रेमी राजेश खन्ना की जगह किसी भी और अभिनेता का तसव्वुर 'आनंद' के रूप में कर पाएगा... क्या 'मदर इंडिया' के बिना सुनील दत्त का करियर और ज़िन्दगी वैसी ही होती, जैसी बाद में रही... क्या संजय दत्त के बिना 'मुन्नाभाई एमबीबीएस' उसी तरह की हिट साबित हो पाती, जैसी वह हुई...
क्या सलमान खान का करियर आज उसी बुलंदी पर हो सकता था, अगर वह 'मैंने प्यार किया' के हीरो नहीं बनते... क्या अरबाज़ खान या अनिल कपूर 'बाज़ीगर' की भूमिका को वैसा ही प्रभावशाली बना पाते, जैसा शाहरुख खान ने बना दिया...
क्या 'नगीना' में श्रीदेवी वाली छाप छोड़ने में कामयाब हो पातीं जया बच्चन, जो नायिका के रूप में निर्देशक की पहली पसंद थीं... क्या फिल्म 'दीवार' में वैजयन्तीमाला भी 'मां' के किरदार को वैसा ही 'कालजयी' बना पातीं, जैसा निरूपा रॉय ने बना दिया...
ऐसे ही बहुत-से सवाल उपज रहे हैं, उन तथ्यों से, जो हमारे पास मौजूद हैं... सो, हम आपके लिए लेकर आए हैं, आपके पसंदीदा अभिनेताओं और अभिनेत्रियों की उन भूमिकाओं की सूची, जिनके लिए दरअसल वह निर्माता-निर्देशकों की पहली पसंद नहीं थे... वे भूमिकाएं किस्मत ने उनकी झोली में डलवाईं, और फिर उन्हें उसी रोल के लिए बहुत कामयाबी, शोहरत और मकबूलियत हासिल हुई...
'ज़ंजीर' के निर्देशक के लिए पांचवीं पसंद थे अमिताभ बच्चन...
सबसे पहले बात करते हैं, अमिताभ बच्चन की, जिनके करियर को फिल्म 'ज़ंजीर' से क्या मुकाम हासिल हुआ, यह सभी जानते हैं, लेकिन यह सच्चाई बेहद कम लोग जानते हैं कि दरअसल, अमिताभ इस फिल्म में निभाई इंस्पेक्टर विजय श्रीवास्तव की भूमिका के लिए निर्देशक प्रकाश मेहरा के लिए पांचवीं पसंद थे... मेहरा इस रोल के लिए 'जानी' राजकुमार को साइन करना चाहते थे, लेकिन उन्होंने बहुत विचित्र कारण बताकर फिल्म ठुकरा दी... राजकुमार के अनुसार, उन्हें उस तेल की गंध पसंद नहीं आई, जो प्रकाश मेहरा अपने सिर में लगाते थे... इसके बाद उस भूमिका की पेशकश धर्मेन्द्र से की गई, लेकिन उनके पास तारीखें नहीं थीं... तीसरी पसंद के रूप में देव आनंद के पास पहुंचा गया, लेकिन इसलिए बात नहीं बनी, क्योंकि वह अपने गीत अपनी ही आवाज़ में रिकॉर्ड करना चाहते थे... अब प्रकाश मेहरा ने राजेश खन्ना से उम्मीद लगाई, लेकिन वह अपनी 'रोमांटिक' छवि के विपरीत भूमिका निभाने की हिम्मत नहीं जुटा पाए... इसके बाद लगभग हताश हो चुके मेहरा को 'ज़ंजीर' में 'शेर खान' की भूमिका निभाने वाले प्राण ने सलाह दी कि वह उन्हीं दिनों रिलीज़ हुई फिल्म 'बॉम्बे टु गोवा' में काम कर रहे 'नए लड़के' को देखें... बस, आगे क्या हुआ, यह तो बॉलीवुड के इतिहास में दर्ज है ही...
'शोले' का 'जय' भी अमिताभ को नहीं, शत्रुघ्न सिन्हा को बनना था...
इसके अलावा फिल्म 'शोले' में निभाई 'जय' की भूमिका के लिए भी अमिताभ बच्चन पहली पसंद नहीं थे... निर्देशक रमेश सिप्पी दरअसल शत्रुघ्न सिन्हा को उस भूमिका में रखना चाहते थे, लेकिन धर्मेन्द्र की सिफारिश से वह रोल अमिताभ को मिल गया...
'शोले' में 'गब्बर सिंह' भी अमजद खान नहीं बनने वाले थे...
इसके अलावा फिल्म 'शोले' में ही 'डाकू गब्बर सिंह' का रोल निभाकर अपने करियर को आकाश की बुलंदियों पर देखने में कामयाब रहे अमजद खान भी दरअसल सिप्पी की पहली पसंद नहीं थे, लेकिन डैनी डेनजोंग्पा चूंकि अफगानिस्तान में फिरोज़ खान की फिल्म 'धर्मात्मा' की शूटिंग में व्यस्त थे, इसलिए उन्होंने रोल ठुकरा दिया... इसके बाद भी अमजद खान को इस भूमिका के लिए अनिच्छा से ही साइन किया गया था, क्योंकि पटकथा लेखक जावेद अख्तर को लगता था कि अमजद की आवाज़ उतनी भारी नहीं है, जितनी किसी खल चरित्र को प्रभावी ढंग से निभाने के लिए ज़रूरी होती है... बहरहाल, रोल अमजद खान की झोली में आया, और हिन्दी फिल्मों के लिए खल चरित्रों की परिभाषा ही बदल गई...
'नया दौर' के लिए दिलीप नहीं, अशोक कुमार थे बीआर की पहली पसंद...
निर्देशक बीआर चोपड़ा की सुपरहिट फिल्म 'नया दौर' के लिए अगर 'दादामुनि' अशोक कुमार मान गए होते, तो दिलीप कुमार के करियर में यह सुनहरी फिल्म नहीं जुड़ने वाली थी... इसके अलावा बीआर चोपड़ा ने फिल्म में नायिका की भूमिका के लिए तत्कालीन सुपरस्टार मधुबाला को साइन किया था, लेकिन उनके पिता अताउल्लाह खान ने अपनी बेटी को भोपाल जाकर शूटिंग करने की अनुमति देने से मना कर दिया, क्योंकि उन्हें लगता था कि यह दिलीप कुमार और मधुबाला को फिर करीब लाने की कोशिशों का हिस्सा है, जिनके बीच कथित रूप से अफेयर चलता रहा था... इस बात को लेकर बीआर चोपड़ा ने मधुबाला और उनके पिता अताउल्लाह खान पर मुकदमा भी किया, लेकिन अंततः 'नया दौर' की नायिका की भूमिका वैजयन्तीमाला को मिल गई...
'मदर इंडिया' का 'बिरजू' भी सुनील दत्त नहीं, दिलीप कुमार हो सकते थे...
इसी तरह बॉलीवुड की आज तक की सबसे मशहूर और हिट फिल्मों में शुमार की जाने वाली निर्देशक महबूब खान की 'मदर इंडिया' में 'बिरजू' की भूमिका सुनील दत्त को नहीं मिलने वाली थी... उल्लेखनीय है कि सुनील दत्त को इस फिल्म ने न सिर्फ बॉलीवुड में बेहद ऊंचा दर्जा दिलाया, बल्कि उनकी शादीशुदा ज़िन्दगी भी इसी फिल्म की बदौलत आगे बढ़ी... दरअसल 'मदर इंडिया' की शूटिंग के दौरान एक दृश्य में सचमुच आग में फंस जाने पर अपनी 'मां' की भूमिका निभा रही नरगिस को बचाने के बाद दोनों के बीच प्यार हो गया था... वास्तव में महबूब खान इस भूमिका के लिए भारतीय मूल के हॉलीवुड अभिनेता साबू दस्तगीर को साइन करना चाहते थे, जिन्हें 'द थीफ ऑफ बगदाद' और 'जंगल बुक' जैसी फिल्मों के लिए काफी प्रसिद्धि मिल चुकी थी... तब तक अमेरिकी नागरिक बन चुके साबू को दुर्भाग्य से भारत में काम करने के लिए वर्क परमिट नहीं मिल पाया, और महबूब खान ने दिलीप कुमार को पेशकश करनी चाही, लेकिन उनके नाम पर नरगिस सहमत नहीं हुईं, क्योंकि उन्हें लगा कि पिछली फिल्मों में रोमांटिक जोड़ी के रूप में दर्शकों के सामने आ चुके दिलीप और नरगिस को दर्शक मां-बेटे की भूमिका में पसंद नहीं कर पाएंगे... और बस, फिर सुनील दत्त को 'बिरजू' बना दिया गया...
'साहेब, बीवी और ग़ुलाम' का 'ग़ुलाम' हो सकते थे शशि कपूर...
निर्देशक गुरुदत्त की प्रसिद्ध फिल्म 'साहेब, बीवी और ग़ुलाम' में 'ग़ुलाम' की भूमिका के लिए दरअसल शशि कपूर पहली पसंद थे, लेकिन गुरुदत्त और अबरार अल्वी के साथ होने वाली बैठक के लिए ढाई घंटे देर से पहुंचने के कारण उन्हें यह रोल नहीं मिल पाया... इसके बाद बांग्ला अभिनेता बिस्वजीत के बारे में सोचा गया, और यदि बात बन जाती तो 'साहेब, बीवी और ग़ुलाम' उनकी डेब्यू हिन्दी फिल्म होती... लेकिन गुरुदत्त के साथ एक्सक्लूसिव कॉन्ट्रैक्ट साइन करने के लिए बिस्वजीत तैयार नहीं हुए, और आखिरकार 'ग़ुलाम', यानि 'भूतनाथ' की भूमिका गुरुदत्त ने स्वयं निभाई...
शशि या राज कपूर मान जाते, तो राजेश खन्ना नहीं बन पाते 'आनंद'...
हिन्दी फिल्मोद्योग के पहले सुपरस्टार कहे जाने वाले 'काका' राजेश खन्ना की सबसे मशहूर फिल्मों का ज़िक्र किया जाए तो 'आनंद' का शुमार करना कतई लाज़िमी है... लेकिन अगर निर्देशक ऋषिकेश मुखर्जी की पेशकश को राज कपूर या शशि कपूर ने कबूल कर लिया होता तो राजेश खन्ना को यह भूमिका मिलती ही नहीं... दरअसल, एक बार अपने परम मित्र राज कपूर के बीमार पड़ जाने पर उनकी मौत की आशंका से विचलित होने पर ही ऋषिकेश मुखर्जी ने 'आनंद' बनाने का विचार बनाया था... लेकिन बाद में उन्होंने यह सोचकर राज कपूर को नायक बनाने का विचार छोड़ दिया, क्योंकि वह पर्दे पर भी अपने मित्र की मौत का ख्याल नहीं कर पा रहे थे... फिर यह भूमिका राज के भाई शशि कपूर को देने के बारे में सोचा गया, लेकिन उन्होंने यह भूमिका निभाने से इनकार कर दिया... दोनों कपूर बंधुओं के अतिरिक्त ऋषिकेश दा ने 'आनंद' की शीर्षक भूमिका के लिए बांग्ला अभिनेता उत्तम कुमार और अभिनेता-पार्श्वगायक किशोर कुमार के बारे में भी सोचा था, लेकिन आखिर में करियर को बदलकर रख देने वाली यह भूमिका राजेश खन्ना को मिली...
तो फिर 'तीसरी मंज़िल' के हीरो शम्मी कपूर नहीं, देव आनंद होते...
निर्देशक नासिर हुसैन की प्रसिद्ध फिल्मों 'तीसरी मंज़िल' और 'तुमसा नहीं देखा' की कल्पना भी शम्मी कपूर के बिना नहीं की जा सकती, लेकिन इन दोनों ही फिल्मों के लिए नासिर साहब की पहली पसंद देव आनंद थे, लेकिन शम्मी कपूर के भाग्य में ये फिल्में थीं, और इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर भी नहीं देखा...
मजबूरी में मुमताज़ को दी गई थी 'खिलौना' में नायिका की भूमिका...
अपने समय में बेहद हिट रही फिल्म 'खिलौना' के लिए मुमताज़ के बारे में सोचा भी नहीं गया था, लेकिन बताया जाता है कि उस दौर में शायद ही कोई अभिनेत्री रही होगी, जिसने यह भूमिका ठुकरा न दी हो... आखिरकार मजबूरी में मुमताज़ को साइन किया गया, और न सिर्फ फिल्म हिट रही, बल्कि मुमताज़ ने संजीव कुमार के सामने निभाई इस भूमिका के लिए अपने करियर का एकमात्र 'सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री' का फिल्मफेयर पुरस्कार हासिल किया...
'वक्त' के लिए पृथ्वीराज और उनके बेटे थे बीआर की पहली पसंद...
एक और सुपरहिट फिल्म थी 'वक्त', जिसमें एक भूकम्प की वजह से अपने माता-पिता से बिछुड़ गए तीन भाइयों की कहानी दिखाई गई है... बीआर चोपड़ा इस फिल्म को पृथ्वीराज कपूर और उनके तीन बेटों राज, शम्मी और शशि के साथ बनाना चाहते थे... इसके बाद अन्य फिल्मकारों ने बीआर चोपड़ा का ध्यान इस बात की ओर दिलाया कि फिल्म के कुछ दृश्यों में जब ये तीनों भाई और पिता एक-दूसरे से अनजान बनने का अभिनय करेंगे, तो दर्शक संभवतः उसे हज़म नहीं कर पाएंगे... इस पर बीआर ने उस आइडिया को छोड़ दिया, और फिर फिल्म में पिता का रोल मिला बलराज साहनी को, और बेटों की भूमिकाएं निभाईं राजकुमार, सुनील दत्त और शशि कपूर ने... इस फिल्म का निर्दशन भी बीआर चोपड़ा ने छोटे भाई यश चोपड़ा से करवाया...
तो फिर जया-रेखा नहीं, परवीन-स्मिता होतीं 'सिलसिला' की नायिकाएं...
कथित रूप से अमिताभ बच्चन की असल ज़िन्दगी की कहानी दर्शाने वाली एक बेहद महत्वपूर्ण फिल्म रही है 'सिलसिला', जिसमें उनके साथ उनकी पत्नी जया बच्चन और प्रेमिका कही जाने वाली रेखा ने काम किया था... इस फिल्म के निर्देशक थे यश चोपड़ा, जिन्होंने इसके लिए पहले परवीन बाबी और स्मिता पाटिल को साइन कर लिया था... इसके बाद एक दिन बातचीत के दौरान उन्होंने अमिताभ बच्चन से कहा कि वह दरअसल इस फिल्म में जया और रेखा को कास्ट करना चाहते थे... उम्मीद के विपरीत अमिताभ ने बिना हिचक अनुमति दे दी... असल ज़िन्दगी में एक-दूसरे की 'प्रेम-प्रतिद्वंद्वी' कहलाने वाली जया और रेखा ने भी फिल्म के लिए हां कर दी, और इतिहास बना... उधर, परवीन बाबी ने कास्ट बदले जाने को सहजता से कबूल किया, लेकिन स्मिता पाटिल इस बात से नाराज़ हो गई थीं...
जया बच्चन के ठुकराने की वजह से श्रीदेवी को मिली थी 'नगीना'...
अपने समय की बेहद हिट रही फिल्म 'नगीना' ने श्रीदेवी को घर-घर की चहेती बना दिया था, लेकिन यह फिल्म उन्हें इसलिए मिली थी, क्योंकि जया बच्चन ने इस फिल्म में काम करने से इनकार कर दिया था, क्योंकि वह सांपों से बेहद डरती हैं...
सलमान खान नहीं थे 'मैंने प्यार किया' के 'ओरिजिनल' हीरो...
अब आज के सुपरस्टार सल्लू भाई, यानि सलमान खान की बात करते हैं... क्या आप जानते हैं कि सलमान को नायक के तौर पर अभूतपूर्व सफलता दिलाने वाली फिल्म 'मैंने प्यार किया' के लिए पहली पसंद विकास भल्ला नामक एक अभिनेता थे, जो अब टीवी धारावाहिकों में काम करते हैं...
तो शाहरुख खान नहीं, अरबाज़ खान होते 'बाज़ीगर' के हीरो...
इसी तरह, बॉलीवुड के 'बादशाह' शाहरुख खान को हरफनमौला अभिनेता के रूप में स्थापित करने वाली फिल्म 'बाज़ीगर' के लिए पहले अक्षय कुमार, अरबाज़ खान, सलमान खान और अनिल कपूर को चुना गया था, लेकिन इन सबने एन्टी-हीरो का किरदार निभाने से इनकार कर दिया, जिसकी वजह से से शाहरुख के हाथ यह फिल्म आई...
संजय दत्त नहीं, शाहरुख खान बनने वाले थे 'मुन्नाभाई'...
क्या आप जानते हैं कि आज 'मुन्नाभाई' के नाम काफी मशहूर हो चुके संजय दत्त की जगह फिल्म में शाहरुख खान को लिए जाने की योजना थी... शाहरुख के फिल्म में काम करने से मना करने के बावजूद फिल्म के अंत में दिखाए गए क्रेडिट्स में क्रिएटिव इनपुट देने के लिए उनका शुक्रिया अदा किया गया है... दरअसल, शुरुआत में संजय दत्त को कैंसर के मुस्लिम मरीज की उस भूमिका के लिए चुना गया था, जो बाद में फिल्म में जिमी शेरगिल ने निभाई, और उनके करियर की यादगार भूमिकाओं में शुमार की जाती है...
अजय देवगन ने छोड़ी, इसलिए सलमान खान को मिली थी 'करण अर्जुन'...
वैसे सलमान खान की एक और हिट फिल्म 'करण अर्जुन' में उन्हें शाहरुख खान के साथ काम करने का मौका इसलिए मिला, क्योंकि निर्माता-निर्देशक राकेश रोशन से कामकाजी मतभेदों के चलते अजय देवगन ने 'करण अर्जुन' छोड़ दी थी...
'संगम' का 'गोपाल' भी दिलीप कुमार ही होते, राजेन्द्र कुमार नहीं...
राज कपूर की हिट फिल्म 'संगम' में नायक के मित्र का रोल संभवतः दिलीप कुमार ने ही किया होता, क्योंकि वह राज कपूर की पहली पसंद थे... दरअसल, 'संगम' दो दोस्तों की कहानी है, जो एक ही लड़की से प्यार करने लगते हैं... बहरहाल, दिलीप साहब ने यह भूमिका निभाने से इनकार कर दिया, क्योंकि वह फिल्म के क्लाईमेक्स से संतुष्ट नहीं थे, और नहीं चाहते थे कि 'गोपाल' का किरदार अपना बलिदान दे... इसके बाद राज कपूर ने देव आनंद से बात की, जिन्होंने तारीखों की समस्या की वजह से फिल्म में काम करने में असमर्थता ज़ाहिर कर दी, और आखिरकार यह भूमिका 'जुबली कुमार' कहे जाने वाले राजेन्द्र कुमार की झोली में आ गिरी...
'दीवार' में वैजयन्तीमाला हो सकती थीं अमिताभ-शशि की मां...
फिर अमिताभ बच्चन की फिल्म की बात... यश चोपड़ा की ही एक और 'कल्ट' फिल्म 'दीवार' में दरअसल पहले शत्रुघ्न सिन्हा और नवीन निश्चल को साइन किया गया था, और उस समय फिल्म में 'मां' की भूमिका वैजयन्तीमाला निभाने वाली थीं... लेकिन जब यश चोपड़ा ने नायकों के रूप में शत्रुघ्न और नवीन के स्थान पर अमिताभ बच्चन और शशि कपूर को साइन कर लिया, तो वैजयन्तीमाला ने भी इनकार कर दिया... इसके बाद 'मां' की 'कालजयी' भूमिका निभाने का मौका मिला 'दो बीघा ज़मीन' जैसी फिल्मों की नायिका निरूपा रॉय को... और इस भूमिका ने निरूपा रॉय के करियर को नया जीवन और दिशा दे दी...
बहन की शादी के लिए जितेंद्र ने कबूल की शत्रुघ्न की ठुकराई फिल्म...
हिट फिल्म 'फर्ज़' में 'मस्त बहारों का मैं आशिक...' गीत से हंगामा मचा देने वाले जितेन्द्र दरअसल इस फिल्म में नायक की भूमिका के लिए निर्देशक की पहली पसंद नहीं थे, लेकिन शत्रुघ्न सिन्हा के इनकार कर देने के बाद जितेन्द्र को यह रोल दिया गया... बताया जाता है कि जितेन्द्र ने भी यह भूमिका सिर्फ इसलिए कबूल की थी, क्योंकि वह अपनी बहन के शादी के लिए पैसे जुटाना चाहते थे...
'चांदनी' में काम करने से इनकार कर दिया था माधुरी, मीनाक्षी ने...
यश चोपड़ा की ही एक और हिट फिल्म 'चांदनी' में नायिका श्रीदेवी के साथ एक छोटी-सी, लेकिन महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का मौका जूही चावला को इसलिए मिला था, क्योंकि माधुरी दीक्षित, मीनाक्षी शेषाद्रि तथा माधवी ने उस भूमिका के लिए साफ इनकार कर दिया था...
रणधीर कपूर निभाने वाले थे 'जोकर' के बचपन की भूमिका...
निर्देशक राज कपूर की एक और हिट फिल्म 'मेरा नाम जोकर' में नायक के बचपन की भूमिका के लिए उनके पुत्र रणधीर कपूर को चुना गया था, लेकिन उनका वज़न ज़रूरत से ज़्यादा होने के कारण छोटे भाई ऋषि कपूर को वह भूमिका निभानी पड़ी, और उनका बॉलीवुड करियर अपने बड़े भाई से पहले शुरू हो गया...
'रंग दे बसंती' में आमिर के साथ ऋतिक-शाहरुख को चाहते थे मेहरा...
राकेश ओमप्रकाश मेहरा की हिट फिल्म 'रंग दे बसंती' के तीन नायकों के लिए उनकी 'असंभव' विश-लिस्ट में आमिर खान के साथ शाहरुख खान और ऋतिक रोशन शामिल थे, जिनमें से आखिर सिर्फ आमिर ही फिल्म का हिस्सा बन पाए...
आठ हीरोइनों के ठुकराने के बाद रानी को मिली थी 'कुछ कुछ होता है'...
करण जौहर की सुपरहिट फिल्म 'कुछ कुछ होता है' में 'टीना' की सहायक भूमिका के लिए रानी मुखर्जी नवीं पसंद थीं... इस रोल को ठुकराने वाली नायिकाओं में करिश्मा कपूर और रवीना टंडन भी शामिल थीं... करण जौहर का खुद भी यही कहना रहा है कि उन्हें शुरुआत में इस बात का पक्का भरोसा नहीं हो पा रहा था कि रानी उस भूमिका में जंच पाएंगी या नहीं... लेकिन रानी खूब जंचीं, और न सिर्फ करण की फिल्मों से हमेशा के लिए जुड़ गईं, बल्कि एक बेहतरीन अभिनेत्री के रूप में खुद को स्थापित किया...
तो 'राजा हिन्दुस्तानी' की 'रानी' बन जातीं ऐश्वर्या राय बच्चन...
अब बात, ऐश्वर्या राय बच्चन की... फिल्म 'राजा हिन्दुस्तानी' की नायिका के किरदार की पेशकश पहले ऐश्वर्या को ही की गई थी, और वही उनका बॉलीवुड में डेब्यू (पदार्पण) भी होता, लेकिन उस समय वह 'मिस वर्ल्ड' की कमिटमेंट्स से बंधी हुई थीं, और उन्होंने अपने फिल्म करियर के बारे में भी कोई ठोस निर्णय तब तक नहीं लिया था... इसलिए वह भूमिका करिश्मा कपूर को मिली, और उनके करियर की सबसे बड़ी हिट फिल्मों में शुमार हुई...
करीना 'हां' कह देती, तो ऐश्वर्या को नहीं मिलती 'हम दिल दे चुके सनम'...
मधुर भंडारकर की हालिया फिल्म 'हीरोइन' में ऐश्वर्या राय बच्चन का स्थान करीना कपूर ने लिया था... लेकिन क्या आप जानते हैं कि अगर करीना कपूर ने हां कर दी होती तो ऐश्वर्या राय बच्चन को अपने करियर की सबसे महत्वपूर्ण भूमिकाओं में से एक - 'हम दिल दे चुके सनम' की 'नन्दिनी' - से हाथ धोना पड़ जाता...
'परिणीता' भी विद्या बालन नहीं, ऐश्वर्या ही बनने वाली थीं...
फिल्मकार विधू विनोद चोपड़ा भी अपनी फिल्म 'परिणीता' में 'ललिता' की भूमिका ऐश्वर्या राय बच्चन को देना चाहते थे, क्योंकि उनके लिए नायिका ऐसी होनी चाहिए, जो खूबसूरत तो हो ही, नायिका-प्रधान फिल्म को खींच भी सके... लेकिन निर्देशक प्रदीप सरकार ने विधू को इस बात के लिए राज़ी किया कि वह विद्या बालन को साइन कर लें, और कहने की ज़रूरत नहीं कि वह भूमिका बॉलीवुड की सबसे दमदार 'डेब्यू' भूमिकाओं में गिनी जाती है...
(अनुवाद एनडीटीवीख़बर.कॉम टीम द्वारा...)
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मशहूर भूमिकाएं, बॉलीवुड के 100 साल, अमिताभ बच्चन, शाहरुख खान, दिलीप कुमार, संजय दत्त, Bollywood At 100