हाल ही में 72 वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों का ऐलान हुआ जिसमें राजकुमार राव की फिल्म ‘श्रीकांत ‘ के लिए बेस्ट हिंदी फीचर फिल्म का एलान किया गया. इस मौके पर एनडीटीवी ने फिल्म के निर्देशक तुषार हीरानंदानी और उनकी पत्नी जो की फिल्म की एक निर्माता भी हैं , इन दोनों से बातचीत की जिसमें इन्होंने श्रीकांत से लेकर स्टार सिस्टम पर खुल कर बातचीत की .
सवाल: नेशनल अवार्ड की आपके लिए क्या अहमियत है?
जवाब: अब ये सपना तो हमने देखा भी नहीं था सर. हमने उसके बहुत छोटे से अपने देखे थे... बट नेशनल अवार्ड तो सोचा भी नहीं था कि मिल जाएगा. तो ये बहुत ही बड़ा ऑनर मिला, इसको भी प्रोसेस करने में हमें थोड़ा समय लग रहा है कि ये सच में हो गया है.
सवाल: लेकिन जिम्मेदारी और बढ़ गई है अब आपके ऊपर?
जवाब: जिम्मेदारी बहुत बढ़ गई है. बिल्कुल, हम जिम्मेदार लोग हैं वैसे, अगर हमारा काम देखेंगे आप तो.
सवाल: श्रीकांत जैसा सब्जेक्ट जब आप उठाते हैं, तो बतौर प्रोड्यूसर-डायरेक्टर क्या मुश्किलें आती हैं?
जवाब: सर सबसे पहले तो पैसे जमा करने में आती है और लकीली इसमें भूषण जी डायरेक्टर-प्रोड्यूसर सर पे पहले दिन से ही उन्होंने बैक किया था. कोविड का टाइम आया तो थोड़ा बजट कट करना पड़ा, वो हमने किया बिकॉज़ वी आल्सो अंडरस्टैंड.
सवाल: क्या आपने इसे सीधे ओटीटी पर रिलीज करने के बारे में सोचा था?
जवाब: हां हां, बहुत है. मैंने खुद सोचा था एक पॉइंट पे क्योंकि उस टाइम पे इंडस्ट्री की हालत बहुत खराब थी... इनफैक्ट मैंने ये कन्वर्सेशन भूषण जी से की भी थी. भूषण जी ने बोला कि तुम विश्वास नहीं करती क्या?... तो बोले तो चुपचाप रिलीज करेंगे ना, तुम क्यों जा रहे हो उधर? मुझे भी फेथ है, हम सबको फेथ है, हम रिलीज करेंगे.
सवाल: इस तरह की फिल्मों के लिए आपको किस बात से हिम्मत मिली?
जवाब: उस टाइम पे ना पिक्चरें जो चल रही थी पठान, जवान और सब ऐसी पिक्चरें चल रही थी... और उसमें उस टाइम पे एक और बढ़िया पिक्चर आ गई थी, व्हिच इज कॉल्ड 12th फेल और उस पिक्चर ने हमको बहुत काफी हिम्मत दी. इनफैक्ट 12th फेल वाज़ द बेस्ट हिंदी फिल्म लास्ट ईयर नेशनल अवार्ड. और अभी ये साल हम जीते हैं, उनको भी फॉलो करके.
सवाल: श्रीकांत को रिलीज हुए दो साल हो गए हैं, अगली फिल्म कब आ रही है?
जवाब: नहीं, हमने एक मराठी फिल्म बनाई... बट तुषार की पिक्चर अभी तक हमारी कास्टिंग नहीं हुई है, अब हम कास्टिंग शुरू करेंगे उसकी.
सवाल: आप लोगों का कनविक्शन किस तरह की फिल्मों पर ज्यादा होता है?
जवाब: हमारा मेन ऑब्जेक्टिव ये होता है कि जब हम कहानी लिखते हैं... सबसे पहला ये होना चाहिए कि ये कुछ नई बात बोल रहे हैं और दोनों को 100% कनविक्शन होनी चाहिए. हमें अच्छी पिक्चर बनानी है, ताकि जो हमारा बेटा है वीर, जब बड़ा हो, तो ही इज़ प्राउड ऑफ़ द फिल्म दैट हिज मदर एंड फादर हैड मेड.
सवाल: कोविड के बाद सिनेमा को लेकर जो कंफ्यूजन है, उसे आप कैसे देखती हैं?
जवाब: मुझे लगता है, इनफैक्ट क्लेरिटी आ गई है. आप अगर मलयालम सिनेमा देखेंगे तो एक से एक टॉप पिक्चर निकल रही है... जो अच्छी पिक्चर है ना सर, उसको कोई नहीं रोक सकता. वो ऑटोमेटिकली लोग जाके देखते ही हैं.
सवाल: क्या स्टार्स को इस तरह के सिनेमा के लिए कन्विंस करना आसान होता है?
जवाब: अप्रोच करना इज़ी है क्योंकि हमारे पास एक्सेस है, पर कन्विंस करना बिल्कुल इज़ी नहीं है... एक्टर्स भी बहुत कन्फ्यूज्ड हैं इस वक्त. और तुषार और मेरा एक बहुत सिंपल रूल है लाइफ में कि हम अप्रोच करेंगे, पर कभी हम किसी एक्टर को कन्विंस नहीं करेंगे, हम अपनी स्क्रिप्ट नहीं बदलेंगे किसी स्टार को खुश करने के लिए.
सवाल: नेशनल अवार्ड मिलने के बाद क्या लोगों के कॉल्स आए?
जवाब: बहुत लोगों के आए, बहुत लोगों के आए इनफैक्ट. जो एक्टर्स हैं, वो कॉल करते हैं, पर उनको ये नहीं होता कि हम अंधाधुंध कुछ भी काम कर लेंगे, आके पहले सुनाओ, हमको मनाओ. हमारा स्टैंड नेशनल अवार्ड के पहले भी यही था कि हम किसी एक्टर के लिए स्क्रिप्ट बदलेंगे नहीं और अभी भी वही है.
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं