संगीतकार देवऋषि ने श्रीकृष्ण भक्ति पर आधारित नया गीत 'मनमोहना' रिलीज किया है. इससे पहले उनकी 'कृष्ण स्तुति' को पर यूट्यूब पर14 मिलियन से अधिक व्यूज मिल चुके हैं. जन्माष्टमी से पहले अब 'राधा की आभा में श्याम' और 'जय राधे राधे कीर्तन' भी श्रोताओं के बीच आने वाले हैं. श्रीकृष्ण जन्माष्टमी से पहले देवऋषि ने अपना नया भक्ति गीत 'मनमोहना' रिलीज किया है. यह गीत श्रीकृष्ण के भाव, आकर्षण और भक्तिभाव को केंद्र में रखकर तैयार किया गया है और देवऋषि की कृष्ण-केंद्रित संगीत रचनाओं की नई कड़ी है.
इससे पहले रिलीज हुई उनकी 'कृष्ण स्तुति' ने डिजिटल मंचों पर बड़ी संख्या में श्रोताओं तक पहुंच बनाई है. यूट्यूब पर अब तक इस गाने को 14 मिलियन से अधिक व्यूज मिले हैं, जबकि यूट्यूब म्यूजिक पर यह आंकड़ा 7 मिलियन के पार पहुंच चुका है.
जन्माष्टमी से पहले राधा की आभा में श्याम
'मनमोहना' के बाद देवऋषि की दो और श्रीकृष्ण भक्ति रचनाएं रिलीज की तैयारी में हैं. इनमें 'राधा की आभा में श्याम' और 'जय राधे राधे कीर्तन' शामिल हैं. दोनों गीत जन्माष्टमी से पहले जारी किए जाएंगे. देवऋषि ने इस बार जन्माष्टमी के लिए तीन अलग-अलग संगीत रचनाएं तैयार की हैं. तीनों का विषय श्रीकृष्ण भक्ति है, लेकिन उनकी संगीत संरचना और प्रस्तुति को अलग रखा गया है. 'मनमोहना' जहां एक भावपूर्ण भक्ति गीत है, वहीं 'राधा की आभा में श्याम' राधा-कृष्ण के भाव पर केंद्रित है और 'जय राधे राधे कीर्तन' सामूहिक भक्ति और कीर्तन की ऊर्जा को सामने लाता है.
लंबे समय से संगीत से जुड़े हैं देवऋषि
देवऋषि पिछले कई वर्षों से संगीत के क्षेत्र में सक्रिय रहे हैं. उनकी रचनाओं को शान, सोनू निगम, शंकर महादेवन, जावेद अली और जुबिन नौटियाल जैसे गायकों ने अपनी आवाज दी है. इंदौर के स्वच्छता और नागरिक जागरूकता अभियानों से जुड़े कई संगीत और ध्वनि आधारित अभियानों पर भी वह काम कर चुके हैं. हाल के वर्षों में उनके संगीत में मंत्र, कीर्तन और भारतीय भक्ति परंपरा की मौजूदगी बढ़ी है. देवऋषि कहते हैं, “भारतीय संगीत में भक्ति के कई स्वरूप हैं. गीत, मंत्र और कीर्तन तीनों की अपनी अलग प्रकृति है. मैं इन्हें एक जैसा बनाने के बजाय इनके मूल भाव के साथ समकालीन श्रोता तक पहुंचाना चाहता हूं.”
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बचपन के कीर्तन से जुड़ी है यह यात्रा
देवऋषि के लिए भक्ति संगीत का संबंध बचपन से रहा है. उनकी मां साधना पांडेय उन्हें कीर्तन और सत्संग के आयोजनों में लेकर जाती थीं. उनका कहना है कि वहीं उन्होंने संगीत को केवल मंचीय प्रस्तुति के रूप में नहीं, बल्कि सामूहिक अनुभव और साधना के रूप में भी जाना. यही अनुभव आगे चलकर उनके संगीत में मंत्र, कीर्तन और भक्ति-ध्वनि की ओर बढ़ती रुचि का आधार बना. फिलहाल 'मनमोहना' की रिलीज के साथ देवऋषि की जन्माष्टमी संगीत शृंखला शुरू हो चुकी है. अब श्रोताओं की नजर 'राधा की आभा में श्याम' और 'जय राधे राधे कीर्तन' पर है, जिन्हें जन्माष्टमी से पहले रिलीज किया जाएगा.
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